Corona vaccination: a big challenge in front of the government! कोरोना टीकाकरण: सरकार के सामने बड़ी चुनौती!

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‘हारिये न हिम्मत बिसारिये न राम।
तू क्यों सोचे बंदे सब की सोचे राम॥’
हमारे देश में रोजमर्रा में बोली जाने वाली उपरोक्त कहावत हमें विपरीत से विपरीत परिस्थितियों में भी जीवन को खुशी के साथ मस्त रहकर जीने का हौसला प्रदान करती है। ठीक उसी प्रकार अधिकांश देशवासियों ने इस कहावत को भयंकर महामारी के काल में सत्य साबित किया है। देश की जनता कोरोना की दूसरी लहर का सामना बेहद नकारात्मक परिस्थितियों के साथ संघर्ष करके लगातार कर रही है।
वह ध्वस्त चिकित्सा व्यवस्था व विभिन्न प्रकार के बेहद आवश्यक संसाधनों के अभाव के बाद भी कोरोना वायरस के संक्रमण से पूर्ण हिम्मत व हौसले के साथ लड़ रही है। अपनों के अससमय काल का ग्रास बनने के चलते कोरोना की बेहद घातक इस दूसरी लहर ने बहुत सारे देशवासियों को जीवन भर के लिए बहुत अधिक गहरे जख्म दे दिये हैं। पूर्व की भांति इसबार भी दुनिया भर के कोरोना विशेषज्ञ भारत के नीतिनिमार्ताओं व सिस्टम को एकबार फिर से लगातार चेता रहे हैं कि देश को कोरोना की तीसरी लहर से लड़ने के लिए बहुत जल्द से जल्द धरातल पर ठोस आवश्यक कदम उठाकर तैयार करना होगा। इसके लिए हमारे प्यारे देश में जल्द से जल्द कोरोना के टीके की डोज की किल्लत को दूर करते हुए उसको लगवाने की प्रक्रिया को सरल बनाना बेहद जरूरी है।
वैसे एक सच्चाई यह भी है कि जिस समय पूरी दुनिया एक अनजान, अदृश्य और अबूझ बेहद घातक कोरोना वायरस से बुरी तरह डरी-सहमी हुई थी, तब भारत के विद्वान वैज्ञानिक विश्व समुदाय को उस जानलेवा घातक कोरोना वायरस की काट उपलब्ध कराने में अपना दिनरात एक करके बेहद तत्परता से काम करने में लैबोरेट्री में लगे हुआ थे। आज देश के उन वैज्ञानिकों की मेहनत के बलबूते ही भारत ने दुनिया को कोरोना का बेहद कारगर एक टीका बनाकर दिया है।
वैसे भी आजकल भारत दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान चला रहा है। यही नहीं देश आज भारतीयों को कोरोना का टीका लगवाने के साथ-साथ कई अन्य देशों को भी “संयुक्त राष्ट्र संघ” समर्थित “विश्व स्वास्थ्य संगठन” के “कोवैक्स” कार्यक्रम के तहत कोरोना का टीका उपलब्ध करवा कर लोगों के अनमोल जीवन को सुरक्षित करने का कार्य कर रहा है। भयंकर आपदाकाल के समय में भारत एक बार फिर दुनिया के लिए उम्मीदों की किरण का बहुत बड़ा केंद्र बनकर उभरा है, क्योंकि हमारे देश में बनने वाला कोरोना वायरस का टीका बेहद प्रभावी होने के साथ-साथ कीमत तापमान व भंडारण के दृष्टिकोण से विकासशील और विकसित सभी श्रेणी के देशों के लिए बेहद अनुकूल है।
वैसे कोरोना की दूसरी लहर के हालात के मद्देनजर देखा जाये तो देशवासियों को भविष्य में कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाने के लिए जल्दी से कोरोना का टीका लगवा कर उनके जीवन को सुरक्षित करना होगा। लेकिन यह तो भविष्य में आने वाला समय ही बतायेगा कि भारत के कर्ताधतार्ओं ने कोरोना की दूसरी लहर से कुछ सबक लिया है या नहीं। हालांकि विश्व के सभी देशों के आकड़ों के आधार पर भारत सरकार लगातार यह कहकर खुद अपनी पीठ थपथपा रही है कि भारत दुनिया में सबसे तेज कोरोना टीके से लोगों का टीकाकरण करने वाला देश है, वैसे इसे आकड़ों के अनुसार देखा जाये तो यह बात सत्य भी है, लेकिन इसके लिए इतनी अधिक आत्ममुग्धता अभी ठीक नहीं है। क्योंकि अभी तक के आकड़ों के अनुसार  विश्व में 141 करोड़ लोगों को कोरोना के टीके की पहली डोज दी जा चुकी है, जिसमें से 34.6 करोड़ लोग दूसरी डोज लेकर अपने आपका पूर्ण रूप से टीकाकरण करवा चुकें हैं, जो कि पूरी दुनिया की आबादी का मात्र 4.4 प्रतिशत बैठता है।
वहीं भारत में 16 जनवरी 2021 को फ्रंटलाइन वर्कर के साथ शुरू हुए टीकाकरण अभियान का विस्तार करके बहुत कम समय में ही 18 करोड़ लोगों को टीके की पहली डोज लगायी जा चुकी है, 3.98 करोड़ लोगों ने दोनों डोज लेकर अपना टीकाकरण पूरा कर लिया है, लेकिन अगर हम बात जनसंख्या के प्रतिशत की करें तो मात्र 2.9 प्रतिशत लोगों को भारत में कोरोना के टीके की दोनों डोज अभी तक लग पायी है, जो स्थिति हमें विकासशील व अन्य बहुत सारे देशों से बहुत पीछे करती हैं। वैसे भी कोरोना की तीसरी लहर के प्रकोप से बचने के मद्देनजर यह स्थिति बेहद चिंताजनक है।
टीके की डोज की भारी किल्लत की वजह से देश में जनसंख्या के हिसाब से टीकाकरण का कार्य बेहद धीमा चल रहा है, उस हिसाब से तो टीके की दोनों डोज देशवासियों को देने में लगभग दो से तीन वर्ष का लंबा समय लग सकता है। इतने लंबे समय तक अपने आपको कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए हम सभी देशवासियों को सरकार की कोरोना गाइडलाइंस का अक्षरश: पालन करना होगा। हालांकि कोरोना विशेषज्ञों के अनुसार जब तक आप बचाव के उपाय करते हुए सावधानियां बरतते हैं तब तक सब ठीक है। लेकिन यह भी एक कटु सत्य है कि टीका लगने के बाद कोरोना वायरस संक्रमण का खतरा बेहद कम हो जाता है। लेकिन अगर आप टीका लगने के बाद भी रोजमर्रा के जीवन में  लापरवाही करते हैं, तो उसका परिणाम यह होगा कि आप भी वायरस से संक्रमित हो सकते हैं।
वैसे टीका लगवाने के बाद लोग खुद को मानसिक व शारिरिक स्तर पर बहुत अधिक सुरक्षित महसूस करते हुए सब कुछ करने के लिए खुद को स्वतंत्र महसूस करेंगे, लेकिन कोरोना महामारी के काल में इस तरह के सकारात्मकता भरे व्यवहार में कदम-कदम पर सावधानी बरतनी बेहद आवश्यक है। कोरोना आपदाकाल के आने वाले समय में हम सभी देशवासियों के रोजमर्रा के जीवन को सुरक्षित व सरल बनाने के लिए कोरोना का टीका लगवाना आवश्यक है। भारत जैसे 138 करोड़ की आबादी वाले देश में इसके लिए भारी मात्रा में टीके की डोज की आवश्यकता है, फिलहाल 18 वर्ष से कम आयु वर्ग वाले 32 करोड़ लोगों के लिए टीके का ट्रायल चलने के कारण देश में कोरोना के टीके अभी उपलब्ध नहीं है। तो देश में बाकी बची 106 करोड़ लोगों की आबादी को कोरोना का टीका सरकार को जल्द उपलब्ध करवाने हैं।

दीपक कुमार त्यागी
(लेखक स्तंभकार व रचनाकार हैं। यह इनके निजी विचार हैं।)

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