Monsoon Effect on GDP Growth Rate : विकास दर को प्रभावित करेगा खराब मानसून

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Monsoon Effect on GDP Growth Rate : विकास दर को प्रभावित करेगा खराब मानसून
Monsoon Effect on GDP Growth Rate : विकास दर को प्रभावित करेगा खराब मानसून

इस साल अभी तक मानसून सीजन के दौरान सामान्य से काफी कम हुई है बारिश

खरीफ फसलों की बिजाई और रोपाई का काम पिछड़ा, अर्थव्यवस्था के लिए नकारात्मक साइन है मानसून की खराब शुरुआत

Monsoon Effect on GDP Growth Rate (आज समाज), बिजनेस डेस्क : देश में इस साल दक्षिण-पश्चिमी मानसून सामान्य से कम बारिश कर रहा है। इसे भारत में प्रवेश किए 24 दिन के लगभग समय हो चुका है लेकिन अभी तक यह सामान्य से काफी कम बरसा है। मानसून के इस बर्ताव के पीछे अल नीनो को मुख्य कारण बताया जा रहा है। मानसून के इस तरह से आगे बढ़ने से देश के नीति-निर्माताओं और अर्थशास्त्रियों की सांसें अटकी हुई हैं। भारत एक कृषि प्रधान देश है और यहां पर विकास का रास्ता गांवों से होकर गुजरता है।

यदि बारिश अच्छी तरह नहीं होती तो इसका सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। जानकारों का कहना है कि कम बारिश अपने साथ खराब सेंटीमेंट लेकर आती है, जिसका सीधा असर शेयर बाजार और ग्रामीण खर्च पर पड़ता है। त्योहारी सीजन के दौरान ग्रामीण इलाकों में खर्च में बड़ी कटौती देखने को मिल सकती है। उनका कहना है कि मानसून में 10 फीसदी की कमी से उपभोक्ता महंगाई एक फीसदी तक बढ़ सकती है।

वैश्विक एजेंसियां भारतीय जीडीपी को लेकर सकारात्मक

वैश्विक निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स ने भारत का वित्त वर्ष 2026-27 का विकास अनुमान 6.1 फीसदी से बढ़ाकर 6.5 फीसदी कर दिया है। एजेंसी का कहना है कि चालू तिमाही की जीडीपी उम्मीद से बेहतर है। कच्चे तेल में गिरावट का सीधा फायदा भारत को मिलेगा। उधर, ईवाई ने चालू वित्त वर्ष में रियल जीडीपी वृद्धि दर 6.6 से 6.8 फीसदी रहने का अनुमान जताया है।

एजेंसी के मुताबिक, मजबूत घरेलू बुनियादी कारकों और विनिर्माण व सेवा क्षेत्र के दम पर देश बाहरी अनिश्चितताओं से आसानी से निपट लेगा। जहां एजेंसियां भारत के पेट्रोलियम रिफाइनिंग इकोसिस्टम और बुनियादी ढांचे को देखकर गदगद हैं, वहीं कृषि और ग्रामीण ऋण विशेषज्ञ अलग हकीकत बयान कर रहे हैं। भारत की 300 अरब डॉलर की कृषि अर्थव्यवस्था और ग्रामीण मांग पूरी तरह दक्षिण-पश्चिम मानसून पर टिकी है।

कच्चे तेल की कीमत कम होने से मिली राहत

हालांकि इस बीच अच्छी खबर यह है कि अमेरिका-ईरान के बीच समझौता होने से और होर्मुज पूरी तरह खुलने से कच्चे तेल की कीमतों में काफी कमी आ गई है। यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक चिन्ह है। पिछले दिनों कच्चा तेल महंगा होने से देश में पेट्रोल-डीजल के दाम लगातार बढ़ाए गए। जिससे माल-भाड़ा के दाम भी बढ़ने लगे और इसका सीधा असर आम आदमी की जिंदगी पर पड़ने लगा था।

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