Business News : देश के विकास में बैंकों को निभानी होगी बड़ी भूमिका : नागेश्वरन

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Business News : देश के विकास में बैंकों को निभानी होगी बड़ी भूमिका : नागेश्वरन
Business News : देश के विकास में बैंकों को निभानी होगी बड़ी भूमिका : नागेश्वरन

कहा, भारत जैसे बड़े विकासशील देश की अर्थव्यवस्था में बैंकों और वित्तीय संस्थाओं का अहम योगदान

Business News (आज समाज), बिजनेस डेस्क : भारत लगातार तेजी से उभरती हुई अर्थव्यवस्था बन चुका है। पिछले कुछ समय से विश्व में अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव और बदलते वैश्विक व्यापार समीकरणों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था ने ऊंची विकास दर हासिल की है। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने कहा है कि देश की अर्थव्यवस्था की विकास दर बनाए रखने में बैंक व वित्तीय संस्थाएं अहम भूमिका निभाएंगी।

उन्होंने कहा कि बैंक कार्यशील पूंजी, संबंध आधारित ऋण और प्रारंभिक चरण की परियोजनाओं के लिए वित्त प्रदान करेंगे। ऋण पूंजी बाजारों को बड़ी कंपनियों और मध्य बाजार जारीकर्ताओं के मामले में अग्रणी भूमिका निभानी होगी। दोहरे इंजन वाला वित्तपोषण मॉडल वैकल्पिक नहीं है। यह आधारभूत है। देश में कुछ मजबूतियां हैं। जैसे निरंतर उच्च आर्थिक विकास, वैश्विक झटकों के बावजूद आर्थिक स्थिरता, मजबूत खाताबही वाली बैंकिंग प्रणाली, स्थिर महंगाई अनुमान और रिकॉर्ड विदेशी मुद्रा भंडार।

विदेशी निवेशकों का विश्वास बढ़ा

नागेश्वरन ने कहा, इन बुनियादी बातों ने भारत में घरेलू और विदेशी निवेशकों का विश्वास बढ़ाया है। भारतीय सरकारी प्रतिभूतियों को वैश्विक सूचकांक में शामिल करने में योगदान दिया है। यह एक ऐसा मील का पत्थर है जो न केवल स्थिरता, बल्कि भारत के संस्थानों और ऋण प्रबंधन की विश्वसनीयता में विश्वास को भी दर्शाता है।

बॉन्ड बाजार में खत्म होना चाहिए एकाधिकार

इसके साथ ही नागेश्वरन ने बॉन्ड बाजार में बड़ी और अच्छी रेटिंग वाली कंपनियों के एकाधिकार पर सरकार ने चिंता जताई है। मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि मध्यम आकार की कंपनियों को व्यवस्थित और सस्ते तरीके से बाजार तक पहुंचने में सक्षम बनाने की जरूरत है। साथ ही, बाजार में तरलता भी बढ़ाने की आवश्यकता है।

निवेशकों को परिपक्वता तक बॉन्ड रखने की प्रवृत्ति को छोड़नी होगी। नागेश्वरन ने एक कार्यक्रम में कहा, बॉन्ड बाजार और बैंक फंडिंग का डबल-इंजन भारत जैसी बढ़ती अर्थव्यवस्था को आगे चलकर आवश्यक वित्तीय सहायता प्रदान करने में मदद करेगा। आर्थिक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की मांगों के बीच घरेलू धन को भारतीय ऋण बाजारों में फंडिंग का संचालन करना चाहिए और विदेशी प्रवाह को इसका पूरक होना चाहिए।

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