गलत तरीके से न उठे-न बैठे, बढ़ती है स्लिप डिस्क होने की संभावना

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आमतौर पर देखा गया है कि कमर दर्द या कहे कि स्लिप डिस्‍क की समस्या से अधिकांश लोग प्रभावित रहते हैं। यह समस्या लंबर स्पॉंडलाइटिस से जुड़ी है। कई बार तो यह बेहद पीड़ादायक हो जाता है और लोग चलने फिरने में लाचार महसूस करने लगते हैं। इसलिए इसके शुरुआती लक्षण आने पर ही अपनी जीवनशैली में सुधार लाकर और डाक्टर के परामर्श से व्यायाम आदि कर इसे नियंत्रित कर सकते हैं।

इस संबंध में फिजिथिरेपिस्ट जुगुल किशोर चतुर्वेदी का कहना है कि यह समस्या स्पाइन के लंबर रीजन में आए कुछ बदलाव के कारण होती है। स्पाइन की दो हड्डियों के बीच डिस्क होता है जो वासर की तरह होता है। अपनी जगह से हट जाना या दबकर स्पाइनल कार्ड की तरफ निकल जाना ही डिस्क प्रोलैप्स या स्लिप डिस्क कहलाता है। डिस्क के बाहर निकले हिस्से से स्पाइन के नस पर दबाव पड़ता है जो दर्द कारण बनता है। कई मरीजों को सर्जरी की जरूरत पड़ जाती है। इसलिए सामान्य लोगों को इससे बचने के लिए अपने उठने बैठने के तरीके, काम करने के तरीके का ख्याल रखना चाहिए।

वहीं डॉ.विनीत कहते है कि समस्या के लक्षण आएं तो डाक्टर के परामर्श से उचित व्ययाम करना चाहिए, जिससे कि इसको वक्‍त रहते तेजी से बढ़ने से रोका जा सके। उनका यह भी कहना है कि आमतौर पर 25 से 40 वर्ष की उम्र के लोगों को डिस्क प्रोलैप्स यानि स्लिप डिस्क की समस्या अधिक होती है। डिस्क प्रोलैप्स का खतरा भारी वजन उठाने, दुर्घटना के कारण हड्डी में चोट लगाने, कमर झुकाकर काम करने, गलत तरीके से झुककर या लगातार ज्यादा देर तक बैठने , गद्देदार बिछावन पर सोने वालों में अधिक होते देखा गया है।

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