Homeराशिफलकन्या राशिफल 14 अप्रैल 2022 Virgo Horoscope 14 April 2022

कन्या राशिफल 14 अप्रैल 2022 Virgo Horoscope 14 April 2022

***|| जय श्री राधे ||***

*** महर्षि पाराशर पंचांग ***
*** अथ पंचांगम् ***
****ll जय श्री राधे ll****
*** *** *** *** *** *** 

दिनाँक:-14/04/2022, गुरुवार
त्रयोदशी, शुक्ल पक्ष
चैत्र
*** *** *** *** *** *** *** *** (समाप्ति काल)

*** दैनिक राशिफल ***

देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके।
नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।।
विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे।
जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत ।।

कन्या

Virgo Horoscope 14 April 2022 : आज का दिन आपके लिए उत्तम संपत्ति के संकेत दे रहा है। नवीन वस्त्राभूषण की प्राप्ति होगी। प्रमाद न करें। नौकरी, राज्यपक्ष में अपेक्षित सुधार होगा। लाभप्रद कार्य, स्थिति बनेगी। भरोसे में कार्य नहीं होंगे। प्रतिष्ठित व्यक्तियों से भेंट का लाभ भविष्य में मिलेगा। बेरोजगारी दूर होगी। यात्रा, निवेश व नौकरी मनोनुकूल रहेंगे। घर में आपके उत्तरदायित्व में वृद्धि होगी,लेकिन परिवार में सभी सदस्य आपकी बात मानते नजर आएंगे, जिसे देखकर आपको प्रसन्नता होगी।

आप किसी भूमि,वाहन,मकान आदि की भी खरीदारी कर सकते हैं। सायंकाल से लेकर रात्रि तक आपका पुराने मित्रों के मिलने से मन प्रसन्न रहेगा और आप अपने परिवार के सदस्यों के साथ किसी मांगलिक आयोजन में भी सम्मिलित होंगे। कार्यक्षेत्र में आज आपको मन मुताबिक कार्य न मिलने के कारण आपका मन थोड़ा परेशान रहेगा,लेकिन फिर भी आप मुख से प्रसन्न नजर आएंगे।

 

तिथि ————त्रयोदशी 27:55:20 तक
पक्ष———————— शुक्ल
नक्षत्र—- पूर्वाफाल्गुनी 09:54:51
योग————–वृद्वि 09:49:45
करण———– कौलव 16:27:15
करण———- तैतुल 27:55:20
वार———————– गुरूवार
माह————————– चैत्र
चन्द्र राशि——– सिंह 15:53:14
चन्द्र राशि—————— कन्या
सूर्य राशि——– मीन 08:40:19
सूर्य राशि———————- मेष
रितु————————– वसंत
आयन—————— उत्तरायण
संवत्सर———————– नल
संवत्सर (उत्तर) ——————राक्षस
विक्रम संवत————— 2079
विक्रम संवत (कर्तक)———- 2078
शाका संवत—————–1944

वृन्दावन
सूर्योदय————— 05:57:14
सूर्यास्त————— 18:42:07
दिन काल————- 12:44:52
रात्री काल————- 11:14:06
चंद्रोदय————— 16:22:15
चंद्रास्त—————- 29:05:34

लग्न—-मीन 29°53′ , 359°53′

सूर्य नक्षत्र—————— रेवती
चन्द्र नक्षत्र————- पूर्वाफाल्गुनी
नक्षत्र पाया—————— रजत

*** पद, चरण ***

टू—- पूर्वाफाल्गुनी 09:54:51

टे—- उत्तराफाल्गुनी 15:53:14

टो—- उत्तराफाल्गुनी 21:49:11

पा—- उत्तराफाल्गुनी 27:42:46

*** ग्रह गोचर ***

ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद
*** *** *** *** *** *** *** *** ***

सूर्य=मीन 29:12 रेवती , 4 ची
चन्द्र =सिंह 24°23, पू o फा o, 4 टू
बुध =मेष 11 ° 07′ अश्विनी ‘ 4 ला
शुक्र=कुम्भ 14°05, शतभिषा ‘ 3 सी
मंगल=कुम्भ 05°30 ‘ धनिष्ठा’ 4 गे
गुरु=मीन 00°30 ‘ पू o भा o, 4 दी
शनि=मकर 29°33 ‘ धनिष्ठा ‘ 2 गी
राहू=(व)वृषभ 29°55’ कृतिका , 1 अ
केतु=(व) तुला 29°55 विशाखा , 3 ते

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*** मुहूर्त प्रकरण ***

राहू काल 13:55 – 15:31 अशुभ
यम घंटा 05:57 – 07:33 अशुभ
गुली काल 09:08 – 10:44 अशुभ
अभिजित 11:54 -12:45 शुभ
दूर मुहूर्त 10:12 – 11:03 अशुभ
दूर मुहूर्त 15:18 – 16:09 अशुभ

*** चोघडिया, दिन *** 
शुभ 05:57 – 07:33 शुभ
रोग 07:33 – 09:08 अशुभ
उद्वेग 09:08 – 10:44 अशुभ
चर 10:44 – 12:20 शुभ
लाभ 12:20 – 13:55 शुभ
अमृत 13:55 – 15:31 शुभ
काल 15:31 – 17:07 अशुभ
शुभ 17:07 – 18:42 शुभ

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*** चोघडिया, रात *** 
अमृत 18:42 – 20:06 शुभ
चर 20:06 – 21:31 शुभ
रोग 21:31 – 22:55 अशुभ
काल 22:55 – 24:19* अशुभ
लाभ 24:19* – 25:43* शुभ
उद्वेग 25:43* – 27:08* अशुभ
शुभ 27:08* – 28:32* शुभ
अमृत 28:32* – 29:56* शुभ

*** होरा, दिन *** 
बृहस्पति 05:57 – 07:01
मंगल 07:01 – 08:05
सूर्य 08:05 – 09:08
शुक्र 09:08 – 10:12
बुध 10:12 – 11:16
चन्द्र 11:16 – 12:20
शनि 12:20 – 13:23
बृहस्पति 13:23 – 14:27
मंगल 14:27 – 15:31
सूर्य 15:31 – 16:35
शुक्र 16:35 – 17:38
बुध 17:38 – 18:42

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*** होरा, रात *** 
चन्द्र 18:42 – 19:38
शनि 19:38 – 20:34
बृहस्पति 20:34 – 21:31
मंगल 21:31 – 22:27
सूर्य 22:27 – 23:23
शुक्र 23:23 – 24:19
बुध 24:19* – 25:15
चन्द्र 25:15* – 26:12
शनि 26:12* – 27:08
बृहस्पति 27:08* – 28:04
मंगल 28:04* – 29:00
सूर्य 29:00* – 29:56

*** उदयलग्न प्रवेशकाल ***

मीन > 03:00 से 04:56 तक
मेष > 05:56 से 06:47 तक
वृषभ > 06:47 से 08:45 तक
मिथुन > 08:45 से 10:59 तक
कर्क > 10:59 से 13:15 तक
सिंह > 13:15 से 15:28 तक
कन्या > 15:28 से 07:39 तक
तुला > 07:39 से 07:54 तक
वृश्चिक > 07:54 से 10:11 तक
धनु > 10:11 से 00:16 तक
मकर > 00:16 से 02:02 तक
कुम्भ > 02:02 से 03:00 तक

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*** विभिन्न शहरों का रेखांतर (समय)संस्कार *** 

(लगभग-वास्तविक समय के समीप)
दिल्ली +10मिनट——— जोधपुर -6 मिनट
जयपुर +5 मिनट—— अहमदाबाद-8 मिनट
कोटा +5 मिनट———— मुंबई-7 मिनट
लखनऊ +25 मिनट——–बीकानेर-5 मिनट
कोलकाता +54—–जैसलमेर -15 मिनट

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नोट– दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।
प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥
अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।
लाभ में व्यापार करें ।
रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।
काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।
अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।

दिशा शूल ज्ञान————-दक्षिण
परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो घी अथवा केशर खाके यात्रा कर सकते है l
इस मंत्र का उच्चारण करें-:
शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l
भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll

***  अग्नि वास ज्ञान ***
यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,
चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।
दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,
नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।। महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्
नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।

13 + 5 + 1 = 19 ÷ 4 = 3 शेष
मृत्यु लोक पर अग्नि वास हवन के लिए शुभ कारक है l

*** ग्रह मुख आहुति ज्ञान ***

सूर्य नक्षत्र से अगले 3 नक्षत्र गणना के आधार पर क्रमानुसार सूर्य , बुध , शुक्र , शनि , चन्द्र , मंगल , गुरु , राहु केतु आहुति जानें । शुभ ग्रह की आहुति हवनादि कृत्य शुभपद होता है

शनि ग्रह मुखहुति

*** शिव वास एवं फल ***

13 + 13 + 5 = 31 ÷ 7 = 3 शेष

वृषभारूढ़ = शुभ कारक

*** भद्रा वास एवं फल ***

स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।
मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।

*** विशेष जानकारी ***

*प्रदोष व्रत (शिव पूजन)

*अनंग त्रयोदशी

* मेष संक्रान्ति 8:40 पर

*श्रीमहावीर जयन्ती

*डा०अम्बेटकर जयन्ती

*अग्निशामक दिवस

*वैशाखी (पंजाब)

*

*** शुभ विचार ***

अनुलोमेन बलिनं प्रतिलोमेन दुर्जन्म् ।
आत्मतुल्यबलं शत्रुः विनयेन बलेन वा ।।
।। चा o नी o।।

ब्राह्मण अच्छे भोजन से तृप्त होते है. मोर मेघ गर्जना से. साधू दुसरो की सम्पन्नता देखकर और दुष्ट दुसरो की विपदा देखकर.

*** सुभाषितानि ***

गीता -: गुणत्रयविभागयोग अo-14

कैर्लिङ्‍गैस्त्रीन्गुणानेतानतीतो भवति प्रभो ।,
किमाचारः कथं चैतांस्त्रीन्गुणानतिवर्तते ॥,

अर्जुन बोले- इन तीनों गुणों से अतीत पुरुष किन-किन लक्षणों से युक्त होता है और किस प्रकार के आचरणों वाला होता है तथा हे प्रभो! मनुष्य किस उपाय से इन तीनों गुणों से अतीत होता है?॥,21॥,

*** आपका दिन मंगलमय हो *** 

*** *** *** *** *** *** *** 

आचार्य नीरज पाराशर (वृन्दावन)
(व्याकरण,ज्योतिष,एवं पुराणाचार्य)

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