Homeराशिफलवृष राशिफल 29 अगस्त 2022

वृष राशिफल 29 अगस्त 2022

***|| जय श्री राधे ||***
🌺🙏 महर्षि पाराशर पंचांग 🙏🌺
🙏🌺🙏 अथ पंचांगम् 🙏🌺🙏
****ll जय श्री राधे ll****
🌺🌺🙏🙏🌺🌺🙏🙏🌺🌺

दिनाँक:-29/08/2022, सोमवार
द्वितीया, शुक्ल पक्ष,
भाद्रपद
“””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

💮🚩 दैनिक राशिफल 🚩💮

देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके।
नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।।
विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे।
जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत ।।

वृष

समाजसेवा में रुझान रहेगा। प्रतिष्ठा बढ़ेगी। नई आर्थिक नीति बनेगी। कार्यप्रणाली में सुधार होगा। पुरानी व्याधि से परेशानी हो सकती है। नौकरी में प्रभाव बढ़ेगा। व्यापार वृद्धि होगी। ऐश्वर्य पर व्यय होगा। भाइयों का सहयोग मिलेगा। समय अनुकूल है। लाभ लें। प्रमाद न करें।

तिथि———- द्वितीया 15:20:06 तक
पक्ष————————- शुक्ल
नक्षत्र—–उत्तराफाल्गुनी23:02:56
योग———— साध्य 25:01:31
करण———– कौलव 15:20:06
करण———– तैतुल 27:29:11
वार———————– सोमवार
माह———————– भाद्रपद
चन्द्र राशि—————– कन्या
सूर्य राशि——————– सिंह
ऋतु————————– वर्षा
सायन———————— शरद
आयन—————- दक्षिणायण
संवत्सर—————– शुभकृत
संवत्सर (उत्तर)——————– नल
विक्रम संवत—————- 2079
गुजराती संवत————– 2078
शक संवत—————— 1944

वृन्दावन
सूर्योदय————— 05:57:43
सूर्यास्त—————- 18:42:10
दिन काल————- 12:44:27
रात्री काल————- 11:16:01
चंद्रोदय—————- 07:30:23
चंद्रास्त————— 20:07:34

लग्न—- सिंह 11°31′ , 131°31′

सूर्य नक्षत्र——————– मघा
चन्द्र नक्षत्र——— उत्तरा फाल्गुनी
नक्षत्र पाया——————- रजत

🚩💮🚩 पद, चरण 🚩💮🚩

टो—- उत्तरा फाल्गुनी 10:31:53

पा—- उत्तरा फाल्गुनी 16:48:06

पी—- उत्तरा फाल्गुनी 23:02:56

पू—- हस्त 29:16:22

💮🚩💮 ग्रह गोचर 💮🚩💮

ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद
==========================
सूर्य=सिंह 11:12 मघा , 4 मे
चन्द्र =कन्या 00 °23, उ o फा o , 4 टो
बुध =कन्या 08 ° 07′ उ o फा o ‘ 4 पी
शुक्र=कर्क 27°05, आश्लेषा ‘ 4 डो
मंगल=वृषभ 10°30 ‘ रोहिणी’ 1 ओ
गुरु=मीन 12°30 ‘ उ o भा o, 3 झ
शनि=कुम्भ 26°33 ‘ धनिष्ठा ‘ 2 गी
राहू=(व) मेष 22°40’ भरणी , 3 ले
केतु=(व) तुला 22°40 विशाखा , 1 ती

🚩💮🚩 मुहूर्त प्रकरण 🚩💮🚩

राहू काल 07:33 – 09:09 अशुभ
यम घंटा 10:44 – 12:20 अशुभ
गुली काल 13:56 – 15: 31अशुभ
अभिजित 11:54 – 12:45 शुभ
दूर मुहूर्त 12:45 – 13:36 अशुभ
दूर मुहूर्त 15:18 – 16:09 अशुभ
वर्ज्यम 31:45* – 33:25* अशुभ

💮चोघडिया, दिन
अमृत 05:58 – 07:33 शुभ
काल 07:33 – 09:09 अशुभ
शुभ 09:09 – 10:44 शुभ
रोग 10:44 – 12:20 अशुभ
उद्वेग 12:20 – 13:56 अशुभ
चर 13:56 – 15:31 शुभ
लाभ 15:31 – 17:07 शुभ
अमृत 17:07 – 18:42 शुभ

🚩चोघडिया, रात
चर 18:42 – 20:07 शुभ
रोग 20:07 – 21:31 अशुभ
काल 21:31 – 22:56 अशुभ
लाभ 22:56 – 24:20* शुभ
उद्वेग 24:20* – 25:45* अशुभ
शुभ 25:45* – 27:09* शुभ
अमृत 27:09* – 28:34* शुभ
चर 28:34* – 29:58* शुभ

💮होरा, दिन
चन्द्र 05:58 – 07:01
शनि 07:01 – 08:05
बृहस्पति 08:05 – 09:09
मंगल 09:09 – 10:13
सूर्य 10:13 – 11:16
शुक्र 11:16 – 12:20
बुध 12:20 – 13:24
चन्द्र 13:24 – 14:27
शनि 14:27 – 15:31
बृहस्पति 15:31 – 16:35
मंगल 16:35 – 17:38
सूर्य 17:38 – 18:42

🚩होरा, रात
शुक्र 18:42 – 19:39
बुध 19:39 – 20:35
चन्द्र 20:35 – 21:31
शनि 21:31 – 22:28
बृहस्पति 22:28 – 23:24
मंगल 23:24 – 24:20
सूर्य 24:20* – 25:17
शुक्र 25:17* – 26:13
बुध 26:13* – 27:09
चन्द्र 27:09* – 28:06
शनि 28:06* – 29:02
बृहस्पति 29:02* – 29:58

🚩💮 उदयलग्न प्रवेशकाल 💮🚩

सिंह > 04:16 से 06:22 तक
कन्या > 06:22 से 0832 तक
तुला > 08:32 से 10:46 तक
वृश्चिक > 10:46 से 13:02 तक
धनु > 13:02 से 15:32 तक
मकर > 15:32 से 17:10 तक
कुम्भ > 17:10 से 18:38 तक
मीन > 18:36 से 19:12 तक
मेष > 19:12 से 20:44 तक
वृषभ > 20:44 से 23:32 तक
मिथुन > 23:32 से 01:56 तक
कर्क > 01:56 से 04:46 तक

🚩विभिन्न शहरों का रेखांतर (समय)संस्कार

(लगभग-वास्तविक समय के समीप)
दिल्ली +10मिनट——— जोधपुर -6 मिनट
जयपुर +5 मिनट—— अहमदाबाद-8 मिनट
कोटा +5 मिनट———— मुंबई-7 मिनट
लखनऊ +25 मिनट——–बीकानेर-5 मिनट
कोलकाता +54—–जैसलमेर -15 मिनट

नोट– दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।
प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥
अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।
लाभ में व्यापार करें ।
रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।
काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।
अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।

💮दिशा शूल ज्ञान————-पूर्व
परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो घी अथवा काजू खाके यात्रा कर सकते है l
इस मंत्र का उच्चारण करें-:
शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l
भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll

🚩 अग्नि वास ज्ञान -:
यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,
चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।
दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,
नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।। महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्
नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।

2 + 2 + 1 = 5 ÷ 4 = 1 शेष
पाताल लोक पर अग्नि वास हवन के लिए अशुभ कारक है l

🚩💮 ग्रह मुख आहुति ज्ञान 💮🚩

सूर्य नक्षत्र से अगले 3 नक्षत्र गणना के आधार पर क्रमानुसार सूर्य , बुध , शुक्र , शनि , चन्द्र , मंगल , गुरु , राहु केतु आहुति जानें । शुभ ग्रह की आहुति हवनादि कृत्य शुभपद होता है

सूर्य ग्रह मुखहुति

💮 शिव वास एवं फल -:

2 + 2 + 5 = 9 ÷ 7 = 2 शेष

गौरि सन्निधौ = शुभ कारक

🚩भद्रा वास एवं फल -:

स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।
मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।

💮🚩 विशेष जानकारी 🚩💮

* राष्ट्रीय खेल दिवस

*बाबा रामदेव मेला जैसरमेल (राज०) 9 दिवसीय

*मेजर ध्यानचंद जयंती

💮🚩💮 शुभ विचार 💮🚩💮

विप्राऽस्मिन्नगरे महान् कथयकस्तालद्रुमाणां गणः
को दाता रजको ददाति वसनं प्रातर्गृ हीत्वा निशि ।
को दक्षः परवित्तदारहरणे सर्वोऽपि दक्षो जनः
कस्माज्जीवसि हे सखे विष कृमिन्यायेन जीवाम्यहम् ।।
।। चा o नी o।।

एक अजनबी ने एक ब्राह्मण से पूछा. “बताइए, इस शहर में महान क्या है?”. ब्राह्मण ने जवाब दिया की खजूर के पेड़ का समूह महान है.
अजनबी ने सवाल किया की यहाँ दानी कौन है? जवाब मिला के वह धोबी जो सुबह कपडे ले जाता है और शाम को लौटाता है.
प्रश्न हुआ यहाँ सबसे काबिल कौन है. जवाब मिला यहाँ हर कोई दुसरे का द्रव्य और दारा हरण करने में काबिल है.
प्रश्न हुआ की आप ऐसी जगह रह कैसे लेते हो? जवाब मिला की जैसे एक कीड़ा एक दुर्गन्ध युक्त जगह पर रहता है.

🚩💮🚩 सुभाषितानि 🚩💮🚩

गीता -: मोक्षसान्यांसयोग अo-18

इदं ते नातपस्काय नाभक्ताय कदाचन ।,
न चाशुश्रूषवे वाच्यं न च मां योऽभ्यसूयति ॥,

तुझे यह गीत रूप रहस्यमय उपदेश किसी भी काल में न तो तपरहित मनुष्य से कहना चाहिए, न भक्ति-(वेद, शास्त्र और परमेश्वर तथा महात्मा और गुरुजनों में श्रद्धा, प्रेम और पूज्य भाव का नाम ‘भक्ति’ है।,)-रहित से और न बिना सुनने की इच्छा वाले से ही कहना चाहिए तथा जो मुझमें दोषदृष्टि रखता है, उससे तो कभी भी नहीं कहना चाहिए॥,67॥,

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