Homeराशिफलवृश्चिक राशिफल 4 अक्टूबर 2022

वृश्चिक राशिफल 4 अक्टूबर 2022

***|| जय श्री राधे ||***
🌺🙏 महर्षि पाराशर पंचांग 🙏🌺
🙏🌺🙏 अथ पंचांगम् 🙏🌺🙏
****ll जय श्री राधे ll****
🌺🌺🙏🙏🌺🌺🙏🙏🌺🌺

दिनाँक:-04/10/2022, मंगलवार
नवमी, शुक्ल पक्ष,
आश्विन
“”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

💮🚩 दैनिक राशिफल 🚩💮

देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके।
नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।।
विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे।
जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत ।।

वृश्चिक

आराम का समय मिलेगा। आशंका-कुशंका रहेगी। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। नई योजना बनेगी। कार्यप्रणाली में सुधार होगा। कारोबारी नए अनुबंध हो सकते हैं, प्रयास करें। आय में वृद्धि होगी। सामाजिक कार्य करने की प्रेरणा मिलेगी। घर-बाहर पूछ-परख रहेगी। रोजगार में वृद्धि होगी। प्रमाद न करें।

तिथि———– नवमी 14:20:23 तक
पक्ष————————- शुक्ल
नक्षत्र——-उत्तराषाढा 22:50:04
योग———- अतिगंड 11:21:35
करण———– कौलव 14:20:23
करण———– तैतुल 25:10:21
वार———————- मंगलवार
माह———————– आश्विन
चन्द्र राशि——————- मकर
सूर्य राशि——————– कन्या
रितु————————- शरद
आयन—————– दक्षिणायण
संवत्सर——————- शुभकृत
संवत्सर (उत्तर) ———————-नल
विक्रम संवत—————- 2079
गुजराती संवत————– 2078
शक संवत—————— 1944

वृन्दावन
सूर्योदय————— 06:14:22
सूर्यास्त————— 18:01:05
दिन काल————- 11:46:42
रात्री काल————- 12:13:47
चंद्रोदय————— 14:34:15
चंद्रास्त—————- 25:08:59

लग्न—- कन्या 16°37′ , 166°37′

सूर्य नक्षत्र——————– हस्त
चन्द्र नक्षत्र————– उत्तराषाढा
नक्षत्र पाया——————– ताम्र

🚩💮🚩 पद, चरण 🚩💮🚩

भो—- उत्तराषाढा 11:37:32

जा—- उत्तराषाढा 17:13:55

जी—- उत्तराषाढा 22:50:04

खी—- श्रवण 28:26:06

💮🚩💮 ग्रह गोचर 💮🚩💮

ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद
==========================
सूर्य=कन्या 16 :49 हस्त , 2 ष
चन्द्र =कन्या 16 °23, हस्त , 1 भू
बुध =कन्या 00 ° 34′ उ o फाo ‘2 टो
शुक्र=कन्या 11°05, हस्त ‘ 1 पू
मंगल=वृषभ 26°30 ‘ मृगशिरा’ 1 वे
गुरु=मीन 08°30 ‘ उ o भा o, 2 थ
शनि=मकर 24°43 ‘ धनिष्ठा ‘ 1 गा
राहू=(व) मेष 20°40’ भरणी , 3 ले
केतु=(व) तुला 20°40 विशाखा , 1 ती

राहू काल 15:04 – 16:33 अशुभ
यम घंटा 09:11 – 10:39 अशुभ
गुली काल 12:08 – 13:36 अशुभ
अभिजित 11:44 – 12:31 शुभ
दूर मुहूर्त 08:36 – 09:23 अशुभ
दूर मुहूर्त 22:54 – 23:42 अशुभ
वर्ज्यम 07:53 – 09:23 अशुभ

💮चोघडिया, दिन
रोग 06:14 – 07:43 अशुभ
उद्वेग 07:43 – 09:11 अशुभ
चर 09:11 – 10:39 शुभ
लाभ 10:39 – 12:08 शुभ
अमृत 12:08 – 13:36 शुभ
काल 13:36 – 15:04 अशुभ
शुभ 15:04 – 16:33 शुभ
रोग 16:33 – 18:01 अशुभ

🚩चोघडिया, रात
काल 18:01 – 19:33 अशुभ
लाभ 19:33 – 21:05 शुभ
उद्वेग 21:05 – 22:36 अशुभ
शुभ 22:36 – 24:08* शुभ
अमृत 24:08* – 25:40* शुभ
चर 25:40* – 27:11* शुभ
रोग 27:11* – 28:43* अशुभ
काल 28:43* – 30:15* अशुभ

💮होरा, दिन
मंगल 06:14 – 07:13
सूर्य 07:13 – 08:12
शुक्र 08:12 – 09:11
बुध 09:11 – 10:10
चन्द्र 10:10 – 11:09
शनि 11:09 – 12:08
बृहस्पति 12:08 – 13:07
मंगल 13:07 – 14:06
सूर्य 14:06 – 15:04
शुक्र 15:04 – 16:03
बुध 16:03 – 17:02
चन्द्र 17:02 – 18:01

🚩होरा, रात
शनि 18:01 – 19:02
बृहस्पति 19:02 – 20:03
मंगल 20:03 – 21:05
सूर्य 21:05 – 22:06
शुक्र 22:06 – 23:07
बुध 23:07 – 24:08
चन्द्र 24:08* – 25:09
शनि 25:09* – 26:10
बृहस्पति 26:10* – 27:11
मंगल 27:11* – 28:13
सूर्य 28:13* – 29:14
शुक्र 29:14* – 30:15

🚩💮 उदयलग्न प्रवेशकाल 💮🚩

कन्या > 04:18 से 06:08 तक
तुला > 06:08 से 08:22 तक
वृश्चिक > 08:22 से 10:38 तक
धनु > 10:38 से 13:08 तक
मकर > 13:08 से 14:46 तक
कुम्भ > 14:46 से 16:14 तक
मीन > 16:14 से 16:48 तक
मेष > 16:48 से 18:22 तक
वृषभ > 18:22 से 21:08 तक
कर्क > 21:08 से 01:38 तक
सिंह > 01:38 से 04:00 तक

🚩विभिन्न शहरों का रेखांतर (समय)संस्कार

(लगभग-वास्तविक समय के समीप)
दिल्ली +10मिनट——— जोधपुर -6 मिनट
जयपुर +5 मिनट—— अहमदाबाद-8 मिनट
कोटा +5 मिनट———— मुंबई-7 मिनट
लखनऊ +25 मिनट——–बीकानेर-5 मिनट
कोलकाता +54—–जैसलमेर -15 मिनट

नोट– दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।
प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥
अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।
लाभ में व्यापार करें ।
रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।
काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।
अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।

💮दिशा शूल ज्ञान————-उत्तर
परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो घी अथवा गुड़ खाके यात्रा कर सकते है l
इस मंत्र का उच्चारण करें-:
शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l
भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll

🚩 अग्नि वास ज्ञान -:
यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,
चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।
दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,
नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।। महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्
नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।

9 + 3 + 1 = 13 ÷ 4 = 1 शेष
पाताल लोक पर अग्नि वास हवन के लिए अशुभ कारक है l

🚩💮 ग्रह मुख आहुति ज्ञान 💮🚩

सूर्य नक्षत्र से अगले 3 नक्षत्र गणना के आधार पर क्रमानुसार सूर्य , बुध , शुक्र , शनि , चन्द्र , मंगल , गुरु , राहु केतु आहुति जानें । शुभ ग्रह की आहुति हवनादि कृत्य शुभपद होता है

शुक्र ग्रह मुखहुति

💮 शिव वास एवं फल -:

9 + 9 + 5 = 23 ÷ 7 = 2 शेष

गौरि सन्निधौ = शुभ कारक

🚩भद्रा वास एवं फल -:

स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।
मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।

💮🚩 विशेष जानकारी 🚩💮

* नवरात्रि नवम दिवस सिद्धधात्री पूजन

* महानवमी (नवरात्रि समाप्त)

*बौद्धावतार

*शमी पूजन (शास्त्र पूजन)

* श्रीहरि: जयंती

💮🚩💮 शुभ विचार 💮🚩💮

माता शत्रुः पिता वैरी येन बालो न पाठितः ।
न शोभते सभामध्ये हंसमध्ये वको यथा ।।
।। चा o नी o।।

जो माता व् पिता अपने बच्चों को शिक्षा नहीं देते है वो तो बच्चों के शत्रु के सामान हैं। क्योंकि वे विद्याहीन बालक विद्वानों की सभा में वैसे ही तिरस्कृत किये जाते हैं जैसे हंसो की सभा मे बगुले।

🚩💮🚩 सुभाषितानि 🚩💮🚩

गीता -: क्षेत्र-क्षेत्रज्ञविज्ञानयोग अo-13

समं सर्वेषु भूतेषु तिष्ठन्तं परमेश्वरम्‌ ।,
विनश्यत्स्वविनश्यन्तं यः पश्यति स पश्यति ॥,

जो पुरुष नष्ट होते हुए सब चराचर भूतों में परमेश्वर को नाशरहित और समभाव से स्थित देखता है वही यथार्थ देखता है॥,27॥,

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