Homeराशिफलवृश्चिक राशिफल 10 सितंबर 2022

वृश्चिक राशिफल 10 सितंबर 2022

***|| जय श्री राधे ||***
🌺🙏 महर्षि पाराशर पंचांग 🙏🌺
🙏🌺🙏 अथ पंचांगम् 🙏🌺🙏
****ll जय श्री राधे ll****
🌺🌺🙏🙏🌺🌺🙏🙏🌺🌺

दिनाँक:- 10/09/2022, शनिवार
पूर्णिमा, शुक्ल पक्ष,
भाद्रपद
“””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

💮🚩 दैनिक राशिफल 🚩💮

देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके।
नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।।
विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे।
जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत ।।

वृश्चिक
प्रयास सफल रहेंगे। किसी बड़े कार्य की समस्याएं दूर होंगी। मित्रों का सहयोग कर पाएंगे। कर्ज में कमी होगी। संतुष्टि रहेगी। सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। व्यापार मनोनुकूल चलेगा। अपना प्रभाव बढ़ा पाएंगे। नौकरी में अनुकूलता रहेगी। निवेश शुभ रहेगा। जोखिम व जमानत के कार्य न करें।

तिथि———- पूर्णिमा 15:28:03 तक
पक्ष———————— शुक्ल
नक्षत्र——– शतभिषा 09:35:52
योग————- धृति 14:53:29
करण————– बव 15:28:03
करण———– बालव 26:17:26
वार———————– शनिवार
माह———————- भाद्रपद
चन्द्र राशि—– कुम्भ 26:21:58
चन्द्र राशि—————— मीन
सूर्य राशि——————- सिंह
ऋतु————————– वर्षा
सायन———————– शरद
आयन—————- दक्षिणायण
संवत्सर——————- शुभकृत
संवत्सर (उत्तर)——————– नल
विक्रम संवत—————- 2079
गुजराती संवत————– 2078
शक संवत—————— 1944

वृन्दावन
सूर्योदय————— 06:03:13
सूर्यास्त—————- 18:28:46
दिन काल————- 12:25:33
रात्री काल———— 11:34:53
चंद्रास्त—————- 06:22:25
चंद्रोदय—————- 18:46:15

लग्न—- सिंह 23°8′ , 143°8′

सूर्य नक्षत्र———— पूर्वा फाल्गुनी
चन्द्र नक्षत्र—————- शतभिषा
नक्षत्र पाया——————– ताम्र

🚩💮🚩 पद, चरण 🚩💮🚩

सू—- शतभिषा 09:35:52

से—- पूर्वा भाद्रपदा 15:09:36

सो—- पूर्वा भाद्रपदा 20:44:55

दा—- पूर्वा भाद्रपदा 26:21:58

💮🚩💮 ग्रह गोचर 💮🚩💮

ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद
==========================
सूर्य=सिंह 23:12 पू o फ़ाo , 3 टी
चन्द्र =कुम्भ 17 °23, शतभिषा , 4 सू
बुध =कन्या 14 ° 07′ हस्त ‘ 2 ष
शुक्र=सिंह 11°05, मघा ‘ 4 मे
मंगल=वृषभ 17°30 ‘ रोहिणी’ 3 वी
गुरु=मीन 11°30 ‘ उ o भा o, 3 झ
शनि=मकर 26°33 ‘ धनिष्ठा ‘ 1 गा
राहू=(व) मेष 22°05’ भरणी , 3 ले
केतु=(व) तुला 22°05 विशाखा , 1 ती

🚩💮🚩 मुहूर्त प्रकरण 🚩💮🚩

राहू काल 09:10 – 10:43 अशुभ
यम घंटा 13:49 – 15:22 अशुभ
गुली काल 06:03 – 07:36 अशुभ
अभिजित 11:51 – 12:41 शुभ
दूर मुहूर्त 07:43 – 08:32 अशुभ
वर्ज्यम 15:32 – 17:01 अशुभ

🚩पंचक अहोरात्र अशुभ

💮चोघडिया, दिन
काल 06:03 – 07:36 अशुभ
शुभ 07:36 – 09:10 शुभ
रोग 09:10 – 10:43 अशुभ
उद्वेग 10:43 – 12:16 अशुभ
चर 12:16 – 13:49 शुभ
लाभ 13:49 – 15:22 शुभ
अमृत 15:22 – 16:56 शुभ
काल 16:56 – 18:29 अशुभ

🚩चोघडिया, रात
लाभ 18:29 – 19:56 शुभ
उद्वेग 19:56 – 21:23 अशुभ
शुभ 21:23 – 22:49 शुभ
अमृत 22:49 – 24:16* शुभ
चर 24:16* – 25:43* शुभ
रोग 25:43* – 27:10* अशुभ
काल 27:10* – 28:37* अशुभ
लाभ 28:37* – 30:04* शुभ

💮होरा, दिन
शनि 06:03 – 07:05
बृहस्पति 07:05 – 08:07
मंगल 08:07 – 09:10
सूर्य 09:10 – 10:12
शुक्र 10:12 – 11:14
बुध 11:14 – 12:16
चन्द्र 12:16 – 13:18
शनि 13:18 – 14:20
बृहस्पति 14:20 – 15:22
मंगल 15:22 – 16:25
सूर्य 16:25 – 17:27
शुक्र 17:27 – 18:29

🚩होरा, रात
बुध 18:29 – 19:27
चन्द्र 19:27 – 20:25
शनि 20:25 – 21:23
बृहस्पति 21:23 – 22:20
मंगल 22:20 – 23:18
सूर्य 23:18 – 24:16
शुक्र 24:16* – 25:14
बुध 25:14* – 26:12
चन्द्र 26:12* – 27:10
शनि 27:10* – 28:08
बृहस्पति 28:08* – 29:06
मंगल 29:06* – 30:04

🚩💮 उदयलग्न प्रवेशकाल 💮🚩

सिंह > 04:24 से 05:40 तक
कन्या > 05:40 से 07:54 तक
तुला > 07:54 से 10:00 तक
वृश्चिक > 10:00 से 12:16 तक
धनु > 12:16 से 14:42 तक
मकर > 14:42 से 16:24 तक
कुम्भ > 16:24 से 17:50 तक
मीन > 17:50 से 18:26 तक
मेष > 18:26 से 19:58 तक
वृषभ > 19:58 से 22:46 तक
मिथुन > 22:46 से 01:10 तक
कर्क > 01:10 से 03:16 तक

🚩विभिन्न शहरों का रेखांतर (समय)संस्कार

(लगभग-वास्तविक समय के समीप)
दिल्ली +10मिनट——— जोधपुर -6 मिनट
जयपुर +5 मिनट—— अहमदाबाद-8 मिनट
कोटा +5 मिनट———— मुंबई-7 मिनट
लखनऊ +25 मिनट——–बीकानेर-5 मिनट
कोलकाता +54—–जैसलमेर -15 मिनट

नोट– दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।
प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥
अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।
लाभ में व्यापार करें ।
रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।
काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।
अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।

💮दिशा शूल ज्ञान————-पूर्व
परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो लौंग अथवा कालीमिर्च खाके यात्रा कर सकते है l
इस मंत्र का उच्चारण करें-:
शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l
भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll

🚩 अग्नि वास ज्ञान -:
यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,
चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।
दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,
नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।। महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्
नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।

15 + 7 + 1 = 23 ÷ 4 = 3शेष
मृत्यु लोक पर अग्नि वास हवन के लिए शुभ कारक है l

🚩💮 ग्रह मुख आहुति ज्ञान 💮🚩

सूर्य नक्षत्र से अगले 3 नक्षत्र गणना के आधार पर क्रमानुसार सूर्य , बुध , शुक्र , शनि , चन्द्र , मंगल , गुरु , राहु केतु आहुति जानें । शुभ ग्रह की आहुति हवनादि कृत्य शुभपद होता है

चन्द्र ग्रह मुखहुति

💮 शिव वास एवं फल -:

15 + 15 + 5 = 35 ÷ 7 = 0 शेष

शमशान वास = मृत्यु कारक

🚩भद्रा वास एवं फल -:

स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।
मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।

💮🚩 विशेष जानकारी 🚩💮

* महालयारम्भ

* पूर्णिमा श्राद्ध

* महेश्वर पूजन

* पंडित गोविन्दबल्लभ पंत जयंती

💮🚩💮 शुभ विचार 💮🚩💮

आत्मवर्गं परित्यज्य परवर्गं समाश्रयेत् ।
स्वयमेव लयं याति यथा राज्यमधर्मतः ।।
।। चा o नी o।।

जो अपने समाज को छोड़कर दुसरे समाज को जा मिलता है, वह उसी राजा की तरह नष्ट हो जाता है जो अधर्म के मार्ग पर चलता है.

🚩💮🚩 सुभाषितानि 🚩💮🚩

गीता -: क्षेत्र-क्षेत्रज्ञविज्ञानयोग अo-13

इदं शरीरं कौन्तेय क्षेत्रमित्यभिधीयते।,
एतद्यो वेत्ति तं प्राहुः क्षेत्रज्ञ इति तद्विदः॥,

श्री भगवान बोले- हे अर्जुन! यह शरीर ‘क्षेत्र’ (जैसे खेत में बोए हुए बीजों का उनके अनुरूप फल समय पर प्रकट होता है, वैसे ही इसमें बोए हुए कर्मों के संस्कार रूप बीजों का फल समय पर प्रकट होता है, इसलिए इसका नाम ‘क्षेत्र’ ऐसा कहा है) इस नाम से कहा जाता है और इसको जो जानता है, उसको ‘क्षेत्रज्ञ’ इस नाम से उनके तत्व को जानने वाले ज्ञानीजन कहते हैं॥,1॥,

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