HomeराशिफलScorpio Horoscope 10 March 2022 वृश्चिक राशिफल 10 मार्च 2022

Scorpio Horoscope 10 March 2022 वृश्चिक राशिफल 10 मार्च 2022

Scorpio Horoscope 10 March 2022 वृश्चिक राशिफल 10 मार्च 2022

***|| जय श्री राधे ||***
*** महर्षि पाराशर पंचांग ***
***अथ पंचांगम् ***
****ll जय श्री राधे ll****
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दिनाँक-: 10/03/2022,गुरुवार
अष्टमी, शुक्ल पक्ष
फाल्गुन
***************************(समाप्ति काल)

***दैनिक राशिफल ***

देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके।
नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।।
विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे।
जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत ।।

वृश्चिक

Scorpio Horoscope 10 March 2022: फालतू खर्च होगा। विवाद को बढ़ावा न दें। आज आपकी आर्थिक योजना को बढ़ावा मिलेगा लेकिन आपके विरोधी सक्रिय रहेंगे. स्वास्थ्य का ध्यान रखें। ईर्ष्यालु व्यक्तियों से सावधान रहें। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। किसी बड़ी समस्या से सामना हो सकता है। कारोबार ठीक चलेगा। आय में निश्चितता रहेगी। चिंता तथा तनाव रहेंगे।

आज किसी असहाय की मदद करने से खुशी मिलेगी। पेशेवर मोर्चे पर प्रयास सफल होने की संभावना है। नौकरी के बड़े अवसर आपका इंतजार कर रहे हैं।(Scorpio Horoscope 10 March 2022) इसके बारे में ध्यान से सोचें और जब आप पूरी तरह से संतुष्ट हों तो अपने करियर की दिशा बदलें। आज का दिन अपने विरोधियों को आमंत्रित करने और अपने बुनियादी ढांचे का निर्माण करने का है और अपनी ताकत दिखाने के लिए यह एक आदर्श दिन है। इससे आपके कट्टर विरोधी बोली से पहले ही हार जाएंगे या आप किसी ऐसे प्रोजेक्ट पर हस्ताक्षर कर पाएंगे जो आपके व्यवसाय को और आगे ले जाएगा।

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तिथि——– अष्टमी 29:33:37 तक
पक्ष———————– शुक्ल
नक्षत्र——- रोहिणी 11:28:54
योग———– प्रीति 26:12:05
करण——विष्टि भद्र 16:14:20
करण———- बव 29:33:37
वार——————– गुरूवार
माह——————- फाल्गुन
चन्द्र राशि —– वृषभ 25:01:44
चन्द्र राशि ——————–मिथुन
सूर्य राशि——————-कुम्भ
रितु———————- शिशिर
सायन———————वसन्त
आयन—————- उत्तरायण
संवत्सर——————– प्लव
संवत्सर (उत्तर) ————-आनंद
विक्रम संवत————- 2078
विक्रम संवत (कर्तक)——2078
शाका संवत————– 1943

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वृन्दावन
सूर्योदय————- 06:35:42
सूर्यास्त————– 18:23:36
दिन काल———– 11:47:53
रात्री काल———– 12:11:01
चंद्रोदय————– 11:16:11
चंद्रास्त————– 25:39:20

लग्न—-कुम्भ 25°16′ , 325°16′

सूर्य नक्षत्र——— पूर्वाभाद्रपदा
चन्द्र नक्षत्र————— रोहिणी
नक्षत्र पाया—————–लोहा

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***पद, चरण ***

वु—- मृगशिरा 11:28:54

वे—- मृगशिरा18:15:14

वो—- मृगशिरा 25:01:44

??? ग्रह गोचर ???

ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद
==========================
सूर्य=कुम्भ 25:12 ‘पू o भा o , 2 सो
चन्द्र =वृषभ 20°23, रोहिणी , 4 वु
बुध = कुम्भ 04 ° 07 ‘ धनिष्ठा ‘ 4 गे
शुक्र=मकर 09°05, उ oषा o ‘ 4 जी
मंगल=मकर 05°30 ‘ उ o षा o ‘ 4 जी
गुरु=कुम्भ 20°30 ‘ पू o भा o, 1 से
शनि=मकर 24°33 ‘ धनिष्ठा ‘ 1 गा
राहू=(व)वृषभ 01°50’ कृतिका , 2 ई
केतु=(व)वृश्चिक 01°50 विशाखा , 4 तो

***मुहूर्त प्रकरण ***

राहू काल 13:58 – 15:27 अशुभ
यम घंटा 06:36 – 08:04 अशुभ
गुली काल 09:33 – 11:01 अशुभ
अभिजित 12:06 -12:53 शुभ
दूर मुहूर्त 10:32 – 11:19 अशुभ
दूर मुहूर्त 15:15 – 16:02 अशुभ

***चोघडिया, दिन***
शुभ 06:36 – 08:04 शुभ
रोग 08:04 – 09:33 अशुभ
उद्वेग 09:33 – 11:01 अशुभ
चर 11:01 – 12:30 शुभ
लाभ 12:30 – 13:58 शुभ
अमृत 13:58 – 15:27 शुभ
काल 15:27 – 16:55 अशुभ
शुभ 16:55 – 18:24 शुभ

***चोघडिया, रात***
अमृत 18:24 – 19:55 शुभ
चर 19:55 – 21:26 शुभ
रोग 21:26 – 22:58 अशुभ
काल 22:58 – 24:29* अशुभ
लाभ 24:29* – 26:00* शुभ
उद्वेग 26:00* – 27:32* अशुभ
शुभ 27:32* – 29:03* शुभ
अमृत 29:03* – 30:35* शुभ

***होरा, दिन***
बृहस्पति 06:36 – 07:35
मंगल 07:35 – 08:34
सूर्य 08:34 – 09:33
शुक्र 09:33 – 10:32
बुध 10:32 – 11:31
चन्द्र 11:31 – 12:30
शनि 12:30 – 13:29
बृहस्पति 13:29 – 14:28
मंगल 14:28 – 15:27
सूर्य 15:27 – 16:26
शुक्र 16:26 – 17:25
बुध 17:25 – 18:24

***होरा, रात***
चन्द्र 18:24 – 19:25
शनि 19:25 – 20:25
बृहस्पति 20:25 – 21:26
मंगल 21:26 – 22:27
सूर्य 22:27 – 23:28
शुक्र 23:28 – 24:29
बुध 24:29* – 25:30
चन्द्र 25:30* – 26:31
शनि 26:31* – 27:32
बृहस्पति 27:32* – 28:33
मंगल 28:33* – 29:34
सूर्य 29:34* – 30:35

***उदयलग्न प्रवेशकाल ***

कुम्भ > 05:28 से 06:54 तक
मीन > 06:54 से 08:25 तक
मेष > 08:25 से 11:08 तक
वृषभ > 11:08 से 12:49 तक
मिथुन > 12:49 से 14:13 तक
कर्क > 14:13 से 16:37 तक
सिंह > 16:37 से 17:39 तक
कन्या > 17:39 से 08:53 तक
तुला > 08:533 से 11:20 तक
वृश्चिक > 11:20 से 02:32 तक
धनु > 02:32 से 03:36 तक
मकर > 03:40 से 05:28 तक

***विभिन्न शहरों का रेखांतर (समय)संस्कार***

(लगभग-वास्तविक समय के समीप)
दिल्ली +10मिनट——— जोधपुर -6 मिनट
जयपुर +5 मिनट—— अहमदाबाद-8 मिनट
कोटा +5 मिनट———— मुंबई-7 मिनट
लखनऊ +25 मिनट——–बीकानेर-5 मिनट
कोलकाता +54—–जैसलमेर -15 मिनट

नोट– दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।
प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥
अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।
लाभ में व्यापार करें ।
रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।
काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।
अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।

***दिशा शूल ज्ञान————-दक्षिण***
परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो घी अथवा केशर खाके यात्रा कर सकते है l
इस मंत्र का उच्चारण करें-:
शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l
भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll

*** अग्नि वास ज्ञान ***
यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,
चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।
दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,
नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।। महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्
नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।

8 + 5 + 1 = 14 ÷ 4 = 2 शेष
आकाश लोक पर अग्नि वास हवन के लिए अशुभ कारक है l

***ग्रह मुख आहुति ज्ञान ***

सूर्य नक्षत्र से अगले 3 नक्षत्र गणना के आधार पर क्रमानुसार सूर्य , बुध , शुक्र , शनि , चन्द्र , मंगल , गुरु , राहु केतु आहुति जानें । शुभ ग्रह की आहुति हवनादि कृत्य शुभपद होता है

***शुक्र ग्रह मुखहुति***

*** शिव वास एवं फल ***

8 + 8 + 5 = 21 ÷ 7 = 0 शेष

शमशान वास = मृत्यु कारक

***भद्रा वास एवं फल ***

स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।
मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।

दोपहर 16:14 तक समाप्त

स्वर्ग लोक = शुभ कारक

***विशेष जानकारी ***

* होलाष्टक प्रारम्भ

* श्रीजी मन्दिर लड्डू की होली

* दादू दयाल जयन्ती

***शुभ विचार ***

किं तया क्रियते धेन्वा या न दोग्ध्री न गर्भिणी ।
कोऽर्थः पुत्रेण जातेन यो न विद्वान्न भक्तिमान् ।।
।।चा o नी o।।

वह गाय किस काम की जो ना तो दूध देती है ना तो बच्चे को जन्म देती है. उसी प्रकार उस बच्चे का जन्म किस काम का जो ना ही विद्वान हुआ ना ही भगवान् का भक्त हुआ.

***सुभाषितानि ***

गीता -: क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग अo-13

ध्यानेनात्मनि पश्यन्ति केचिदात्मानमात्मना ।,
अन्ये साङ्‍ख्येन योगेन कर्मयोगेन चापरे ॥,

उस परमात्मा को कितने ही मनुष्य तो शुद्ध हुई सूक्ष्म बुद्धि से ध्यान (जिसका वर्णन गीता अध्याय 6 में श्लोक 11 से 32 तक विस्तारपूर्वक किया है) द्वारा हृदय में देखते हैं, अन्य कितने ही ज्ञानयोग (जिसका वर्णन गीता अध्याय 2 में श्लोक 11 से 30 तक विस्तारपूर्वक किया है) द्वारा और दूसरे कितने ही कर्मयोग (जिसका वर्णन गीता अध्याय 2 में श्लोक 40 से अध्याय समाप्तिपर्यन्त विस्तारपूर्वक किया है) द्वारा देखते हैं अर्थात प्राप्त करते हैं॥,24॥,

***आपका दिन मंगलमय हो***

************************
आचार्य नीरज पाराशर (वृन्दावन)
(व्याकरण,ज्योतिष,एवं पुराणाचार्य)

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