HomeराशिफलSagittarius Horoscope 04 April 2022 धनु राशिफल 04 अप्रैल 2022

Sagittarius Horoscope 04 April 2022 धनु राशिफल 04 अप्रैल 2022

***|| जय श्री राधे ||***

*** महर्षि पाराशर पंचांग ***
*** अथ पंचांगम् ***
****ll जय श्री राधे ll****
*** *** *** *** *** 

दिनाँक:- 4/04/2022, सोमवर
तृतीया, शुक्ल पक्ष
चैत्र
*** *** *** *** *** *** *** (समाप्ति काल)

*** दैनिक राशिफल *** 

देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके।
नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।।
विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे।
जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत ।।

धनु

Sagittarius Horoscope 04 April 2022: आज का दिन आपके लिए सावधानी पूर्वक कार्य करने के लिए रहेगा। अज्ञात भय व चिंता रहेंगे। यात्रा सफल रहेगी। नेत्र पीड़ा हो सकती है। लेन-देन में सावधानी रखें। बगैर मांगे किसी को सलाह न दें। बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे। व्यावसायिक यात्रा मनोनुकूल रहेगी। धनार्जन होगा। जोखिम उठाने का साहस कर पाएंगे। आपको अपने कार्यक्षेत्र में पिछले अनुभवों का लाभ मिलेगा, जिसके कारण आप अपनी काफी समस्याओं को हल कर पाएंगे, लेकिन आपकी दूसरों से आगे निकलने की इच्छा आपसे कुछ गलत काम करवा सकती है, जिसने आपको सावधान रहना होगा और अपने परिवार के वरिष्ठ सदस्यों से वाद विवाद में पड़ने से बचना होगा। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। विद्यार्थी यदि किसी परीक्षा की तैयारी में लगे हैं, तो उन्हें उसमें सफलता हासिल होगी। जीवनसाथी के साथ आप कुछ समय अकेले में व्यतीत करेंगे, जिसमें आप अपने मन की कुछ समस्याओं को भी साझा करेंगे।

 

तिथि———– तृतीया 13:54:29 तक
पक्ष———————— शुक्ल
नक्षत्र———- भरणी 14:27:14
योग——– विश्कुम्भ 07:40:44
करण————– गर 13:54:29
करण———- वणिज 26:45:43
वार———————- सोमवार
माह————————–चैत्र
चन्द्र राशि——— मेष 21:00:17
चन्द्र राशि—————– वृषभ
सूर्य राशि——————- मीन
रितु————————- वसंत
आयन—————— उत्तरायण
संवत्सर————————नल
संवत्सर (उत्तर) ——————-राक्षस
विक्रम संवत————— 2079
विक्रम संवत (कर्तक)——— 2078
शाका संवत—————–1944

वृन्दावन
सूर्योदय————— 06:07:53
सूर्यास्त—————- 18:36:51
दिन काल————- 12:28:57
रात्री काल————- 11:29:56
चंद्रोदय—————- 07:54:30
चंद्रास्त—————- 21:37:10

लग्न—-मीन 20°4′ , 350°4′

सूर्य नक्षत्र—————— रेवती
चन्द्र नक्षत्र—————— भरणी
नक्षत्र पाया—————— स्वर्ण

*** पद, चरण ***

ले—- भरणी 07:56:12

लो—- भरणी 14:27:14

अ—- कृत्तिका 21:00:17

ई—- कृत्तिका 27:35:16

??? ग्रह गोचर ???

ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद
*** *** *** *** *** *** *** *** ***

सूर्य=मीन 20:12 ‘उ o भा o , 2 दो
चन्द्र =मेष 22°23, भरणी , 3 ले
बुध = मीन 21 ° 07’ रेवती ‘ 2 दो
शुक्र=मकर 04°05, धनिष्ठा ‘ 4 गे
मंगल=मकर 27°30 ‘ धनिष्ठा’ 2 गी
गुरु=कुम्भ 27°30 ‘ पू o भा o, 3 दा
शनि=मकर 27°33 ‘ धनिष्ठा ‘ 2 गी
राहू=(व)वृषभ 00°20’ कृतिका , 2 ई
केतु=(व)वृश्चिक 00°20 विशाखा , 4 तो

*** मुहूर्त प्रकरण ***

राहू काल 07:42 – 09:15 अशुभ
यम घंटा 10:49 – 12:22 अशुभ
गुली काल 13:56 – 15:30। अशुभ
अभिजित 11:57 -12:47 शुभ
दूर मुहूर्त 12:47 – 13:37 अशुभ
दूर मुहूर्त 15:17 – 16:07 अशुभ

चोघडिया, दिन
अमृत 06:08 – 07:42 शुभ
काल 07:42 – 09:15 अशुभ
शुभ 09:15 – 10:49 शुभ
रोग 10:49 – 12:22 अशुभ
उद्वेग 12:22 – 13:56 अशुभ
चर 13:56 – 15:30 शुभ
लाभ 15:30 – 17:03 शुभ
अमृत 17:03 – 18:37 शुभ

चोघडिया, रात
चर 18:37 – 20:03 शुभ
रोग 20:03 – 21:29 अशुभ
काल 21:29 – 22:56 अशुभ
लाभ 22:56 – 24:22* शुभ
उद्वेग 24:22* – 25:48* अशुभ
शुभ 25:48* – 27:14* शुभ
अमृत 27:14* – 28:41* शुभ
चर 28:41* – 30:07* शुभ

होरा, दिन
चन्द्र 06:08 – 07:10
शनि 07:10 – 08:13
बृहस्पति 08:13 – 09:15
मंगल 09:15 – 10:18
सूर्य 10:18 – 11:20
शुक्र 11:20 – 12:22
बुध 12:22 – 13:25
चन्द्र 13:25 – 14:27
शनि 14:27 – 15:30
बृहस्पति 15:30 – 16:32
मंगल 16:32 – 17:34
सूर्य 17:34 – 18:37

होरा, रात
शुक्र 18:37 – 19:34
बुध 19:34 – 20:32
चन्द्र 20:32 – 21:29
शनि 21:29 – 22:27
बृहस्पति 22:27 – 23:24
मंगल 23:24 – 24:22
सूर्य 24:22* – 25:19
शुक्र 25:19* – 26:17
बुध 26:17* – 27:14
चन्द्र 27:14* – 28:12
शनि 28:12* – 29:09
बृहस्पति 29:09* – 30:07

***  उदयलग्न प्रवेशकाल *** 

मीन > 05:14 से 06:44 तक
मेष > 06:44 से 09:28 तक
वृषभ > 09:28 से 11:08 तक
मिथुन > 11:08 से 12:28 तक
कर्क > 12:28 से 14:48 तक
सिंह > 14:48 से 15:53 तक
कन्या > 15:53 से 07:05 तक
तुला > 07:05 से 09:32 तक
वृश्चिक > 09:32 से 00:44 तक
धनु > 00:44 से 01:48 तक
मकर > 01:48 से 03:34 तक
कुम्भ > 03:34 से 05:14 तक

विभिन्न शहरों का रेखांतर (समय)संस्कार

(लगभग-वास्तविक समय के समीप)
दिल्ली +10मिनट——— जोधपुर -6 मिनट
जयपुर +5 मिनट—— अहमदाबाद-8 मिनट
कोटा +5 मिनट———— मुंबई-7 मिनट
लखनऊ +25 मिनट——–बीकानेर-5 मिनट
कोलकाता +54—–जैसलमेर -15 मिनट

नोट– दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।
प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥
अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।
लाभ में व्यापार करें ।
रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।
काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।
अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।

दिशा शूल ज्ञान————-पूर्व
परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो घी अथवा काजू खाके यात्रा कर सकते है l
इस मंत्र का उच्चारण करें-:
शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l
भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll

अग्नि वास ज्ञान -:
यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,
चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।
दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,
नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।। महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्
नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।

3 + 2 + 1 = 6 ÷ 4 = 2 शेष
आकाश लोक पर अग्नि वास हवन के लिए अशुभ कारक है l

ग्रह मुख आहुति ज्ञान

सूर्य नक्षत्र से अगले 3 नक्षत्र गणना के आधार पर क्रमानुसार सूर्य , बुध , शुक्र , शनि , चन्द्र , मंगल , गुरु , राहु केतु आहुति जानें । शुभ ग्रह की आहुति हवनादि कृत्य शुभपद होता है

सूर्य ग्रह मुखहुति

शिव वास एवं फल -:

3 + 3 + 5 = 11 ÷ 7 = 2 शेष

गौरि सन्निधौ = शुभ कारक

भद्रा वास एवं फल -:

स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।
मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।

रात्रि 26:40 प्रारम्भ

स्वर्ग लोक = शुभ कारक

विशेष जानकारी 

* नवरात्रि तृतीय दिवस चंद्रघंटा पूजन

*मनोरथ तृतीया

*सौभाग्य शयन व्रत

* गणगौर पूजन

*मत्स्य जयन्ति

*मेवाड़ उत्सव 3 दिन (उदयपुर)

*** शुभ विचार *** 

नाऽत्यन्तं सरलैर्भाव्यं गत्वा पश्य वन्स्थलीम् ।
छिद्यन्ते सरलास्तत्र कुब्जस्तिष्ठन्ति पादपाः ।।
।। चा o नी o।।

एक राजा की शक्ति उसकी शक्तिशाली भुजाओ में है. एक ब्राह्मण की शक्ति उसके स्वरुप ज्ञान में है. एक स्त्री की शक्ति उसकी सुन्दरता, तारुण्य और मीठे वचनों में है.

*** सुभाषितानि ***

गीता -: गुणत्रयविभागयोग अo-14

सर्वद्वारेषु देहेऽस्मिन्प्रकाश उपजायते ।,
ज्ञानं यदा तदा विद्याद्विवृद्धं सत्त्वमित्युत ॥,

जिस समय इस देह में तथा अन्तःकरण और इन्द्रियों में चेतनता और विवेक शक्ति उत्पन्न होती है, उस समय ऐसा जानना चाहिए कि सत्त्वगुण बढ़ा है॥,11॥,

*** आपका दिन मंगलमय हो***
*** *** *** *** *** *** *** 
आचार्य नीरज पाराशर (वृन्दावन)
(व्याकरण,ज्योतिष,एवं पुराणाचार्य)

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