Homeराशिफलसिंह राशिफल 10 अगस्त 2022

सिंह राशिफल 10 अगस्त 2022

***|| जय श्री राधे ||***

** महर्षि पाराशर पंचांग **
*** अथ पंचांगम् ***
****ll जय श्री राधे ll****
*******************

दिनाँक:- 10/08/2022, बुधवार
त्रयोदशी, शुक्ल पक्ष,
श्रावण
“”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

*** दैनिक राशिफल ***

देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके।
नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।।
विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे।
जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत ।।

सिंह 

आज के दिन जो जातक किसी नई नौकरी की तलाश कर रहे हैं,उनके लिए उत्तम रहेगा,क्योंकि उन्हें पुरानी के साथ-साथ कोई नया ऑफर मिल सकता है। अतिथियों का आगमन होगा। उत्साहवर्धक सूचना मिलेगी। प्रसन्नता रहेगी। स्वाभिमान रहेगा। प्रमाद न करें। बुद्धि चातुर्य से कठिन कार्य भी आसानी से बनेंगे। वैवाहिक अड़चनें समाप्त होंगी। आय-व्यय में असंतुलन की स्थिति बन सकती है। विरोधी परास्त होंगे। आपकी आर्थिक स्थिति पहले से मजबूत होगी। आपको ननिहाल पक्ष से भी धन लाभ मिलता दिख रहा है। किसी की बात को आपको दिल पर नहीं लगाना है,नहीं तो आप इसी में ही लगे रह जाएंगे। आप अपनी कार्य योजनाओं को अपनी इच्छानुसार पूरा करेंगे,जिनमें आप सफल भी अवश्य होंगे। विद्यार्थी आज अपनी शिक्षा में आ रही किसी समस्या को अपने गुरुजनों के सामने रख सकते हैं।

तिथि———-त्रयोदशी 14:14:57 तक
पक्ष————————- शुक्ल
नक्षत्र——– पूर्वाषाढा 09:38:32
योग————– प्रीति 19:33:50
करण———– तैतुल 14:14:57
करण————– गर 24:26:36
वार———————— बुधवार
माह———————— श्रावण
चन्द्र राशि——— धनु 14:57:13
चन्द्र राशि—————— मकर
सूर्य राशि——————- कर्क
रितु————————– वर्षा
आयन—————– दक्षिणायण
संवत्सर——————- शुभकृत
संवत्सर (उत्तर)——————— नल
विक्रम संवत—————- 2079
गुजराती संवत————– 2078
शक संवत—————– 1944

वृन्दावन
सूर्योदय————— 05:48:20
सूर्यास्त—————- 19:00:26
दिन काल————- 13:12:06
रात्री काल————- 10:48:24
चंद्रोदय—————- 17:57:04
चंद्रास्त—————- 28:31:54

लग्न—-कर्क 23°13′ , 113°13′

सूर्य नक्षत्र————— आश्लेषा
चन्द्र नक्षत्र—————- पूर्वाषाढा
नक्षत्र पाया——————– ताम्र

**** पद, चरण ****

ढा—- पूर्वाषाढा 09:38:32

भे—- उत्तराषाढा 14:57:13

भो—- उत्तराषाढा 20:15:30

जा—- उत्तराषाढा 25:33:34

**** ग्रह गोचर ****

ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद
==========================
सूर्य=कर्क 23:12 अश्लेषा , 2 डू
चन्द्र =धनु 24 °23, पू o षाo, 4 ढा
बुध =सिंह 15 ° 07′ पू o फा o ‘ 1 मो
शुक्र=कर्क 03°05, पुष्य ‘ 1 हु
मंगल=मेष 29°30 ‘ कृतिका ‘ 1 अ
गुरु=मीन 14°30 ‘ उ o भा o, 4 ञ
शनि=कुम्भ 29°33 ‘ धनिष्ठा ‘ 2 गी
राहू=(व) मेष 23°40’ भरणी , 4 लो
केतु=(व) तुला 23°40 विशाखा , 2 तू

**** मुहूर्त प्रकरण ****

राहू काल 12:24 – 14:03 अशुभ
यम घंटा 07:27 – 09:06 अशुभ
गुली काल 10:45 – 12:24 अशुभ
अभिजित 11:58 – 12:51 अशुभ
दूर मुहूर्त 11:58 – 12:51 अशुभ

****  गंड मूल अहोरात्र अशुभ

**** चोघडिया, दिन
लाभ 05:48 – 07:27 शुभ
अमृत 07:27 – 09:06 शुभ
काल 09:06 – 10:45 अशुभ
शुभ 10:45 – 12:24 शुभ
रोग 12:24 – 14:03 अशुभ
उद्वेग 14:03 – 15:42 अशुभ
चर 15:42 – 17:21 शुभ
लाभ 17:21 – 19:00 शुभ

**** चोघडिया, रात
उद्वेग 19:00 – 20:21 अशुभ
शुभ 20:21 – 21:43 शुभ
अमृत 21:43 – 23:04 शुभ
चर 23:04 – 24:25* शुभ
रोग 24:25* – 25:46* अशुभ
काल 25:46* – 27:07* अशुभ
लाभ 27:07* – 28:28* शुभ
उद्वेग 28:28* – 29:49* अशुभ

**** होरा, दिन
बुध 05:48 – 06:54
चन्द्र 06:54 – 08:00
शनि 08:00 – 09:06
बृहस्पति 09:06 – 10:12
मंगल 10:12 – 11:18
सूर्य 11:18 – 12:24
शुक्र 12:24 – 13:30
बुध 13:30 – 14:36
चन्द्र 14:36 – 15:42
शनि 15:42 – 16:48
बृहस्पति 16:48 – 17:54
मंगल 17:54 – 19:00

**** होरा, रात
सूर्य 19:00 – 19:54
शुक्र 19:54 – 20:49
बुध 20:49 – 21:43
चन्द्र 21:43 – 22:37
शनि 22:37 – 23:31
बृहस्पति 23:31 – 24:25
मंगल 24:25* – 25:19
सूर्य 25:19* – 26:13
शुक्र 26:13* – 27:07
बुध 27:07* – 28:01
चन्द्र 28:01* – 28:55
शनि 28:55* – 29:49

**** उदयलग्न प्रवेशकाल ****

कर्क > 03:18 से 05:30 तक
सिंह > 05:30 से 07:40 तक
कन्या > 07:40 से 09:50 तक
तुला > 09:50 से 12:04 तक
वृश्चिक > 12:04 से 14:20 तक
धनु > 14:24 से 16:40 तक
मकर > 16:40 से 18:24 तक
कुम्भ > 18:24 से 19:56 तक
मीन > 19:56 से 20:30 तक
मेष > 20:30 से 11:02 तक
वृषभ > 11:02 से 00:54 तक
मिथुन > 00:54 से 03:18 तक

**** विभिन्न शहरों का रेखांतर (समय)संस्कार

(लगभग-वास्तविक समय के समीप)
दिल्ली +10मिनट——— जोधपुर -6 मिनट
जयपुर +5 मिनट—— अहमदाबाद-8 मिनट
कोटा +5 मिनट———— मुंबई-7 मिनट
लखनऊ +25 मिनट——–बीकानेर-5 मिनट
कोलकाता +54—–जैसलमेर -15 मिनट

नोट– दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।
प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥
अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।
लाभ में व्यापार करें ।
रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।
काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।
अमृत में सभी शुभ कार्य करें।

**** दिशा शूल ज्ञान————-उत्तर
परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो पान अथवा पिस्ता खाके यात्रा कर सकते है l
इस मंत्र का उच्चारण करें-:
शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l
भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll

**** अग्नि वास ज्ञान -:

यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,
चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।
दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,
नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।। महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्
नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।

13 + 4 + 1 = 18 ÷ 4 = 2 शेष
आकाश लोक पर अग्नि वास हवन के लिए अशुभ कारक है l

**** ग्रह मुख आहुति ज्ञान ****

सूर्य नक्षत्र से अगले 3 नक्षत्र गणना के आधार पर क्रमानुसार सूर्य , बुध , शुक्र , शनि , चन्द्र , मंगल , गुरु , राहु केतु आहुति जानें । शुभ ग्रह की आहुति हवनादि कृत्य शुभपद होता है

शनि ग्रह मुखहुति

**** शिव वास एवं फल -:

13 + 13 + 5 = 31 ÷ 7 = 3 शेष

वृषभा रूढ़ = शुभ कारक

****  भद्रा वास एवं फल -:

स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।
मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।

**** विशेष जानकारी ****

* आखेटक त्रयोदशी

* शिव पवित्रारोपण

*सूण मांडणा

**** शुभ विचार ****

भस्मना शुध्यते कांस्यं ताम्रमम्लेन शुध्यति ।
रजसा शुध्यते नारि नदी वेगेन शुध्यति ।।
।। चा o नी o।।

राख से घिसने पर पीतल चमकता है . ताम्बा इमली से साफ़ होता है. औरते प्रदर से शुद्ध होती है. नदी बहती रहे तो साफ़ रहती है.

**** सुभाषितानि ****

गीता -: मोक्षसान्यांसयोग अo-18

यतः प्रवृत्तिर्भूतानां येन सर्वमिदं ततम्‌।,
स्वकर्मणा तमभ्यर्च्य सिद्धिं विन्दति मानवः॥,

जिस परमेश्वर से संपूर्ण प्राणियों की उत्पत्ति हुई है और जिससे यह समस्त जगत्‌ व्याप्त है (जैसे बर्फ जल से व्याप्त है, वैसे ही संपूर्ण संसार सच्चिदानंदघन परमात्मा से व्याप्त है), उस परमेश्वर की अपने स्वाभाविक कर्मों द्वारा पूजा करके (जैसे पतिव्रता स्त्री पति को सर्वस्व समझकर पति का चिंतन करती हुई पति के आज्ञानुसार पति के ही लिए मन, वाणी, शरीर से कर्म करती है, वैसे ही परमेश्वर को ही सर्वस्व समझकर परमेश्वर का चिंतन करते हुए परमेश्वर की आज्ञा के अनुसार मन, वाणी और शरीर से परमेश्वर के ही लिए स्वाभाविक कर्तव्य कर्म का आचरण करना ‘कर्म द्वारा परमेश्वर को पूजना’ है) मनुष्य परमसिद्धि को प्राप्त हो जाता है॥,46॥,

****आपका दिन मंगलमय हो ****
***********************
आचार्य नीरज पाराशर (वृन्दावन)
(व्याकरण,ज्योतिष,एवं पुराणाचार्य)

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