Homeराशिफलमिथुन राशिफल 02 जुलाई 2022

मिथुन राशिफल 02 जुलाई 2022

***|| जय श्री राधे ||***

*** महर्षि पाराशर पंचांग ***
*** अथ पंचांगम् ***
****ll जय श्री राधे ll****
********************

दिनाँक:-02/07/2022, शनिवार
तृतीया, शुक्ल पक्ष,
आषाढ
“”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

** दैनिक राशिफल **

देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके।
नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।।
विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे।
जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत ।।

मिथुन

आज का दिन आपके लिए खर्चा भरा रहेगा। आपको व्यर्थ के कार्यों में समय बर्बाद करने से अच्छा है कि आप अपने कामों की ओर ध्यान लगाएं। पुराना रोग उभर सकता है। किसी बड़ी समस्या से सामना हो सकता है। लेन-देन में विशेष सावधानी रखें। वाणी में हल्के शब्दों के प्रयोग से बचें। दु:खद समाचार मिल सकता है। किसी व्यक्ति से बेवजह विवाद हो सकता है। व्यर्थ भागदौड़ होगी। कार्य में विलंब होगा। चिंता तथा तनाव रहेंगे। आय में निश्चितता रहेगी। कार्यक्षेत्र में व्यवसाय में आज कुछ नहीं योजनाओं को लंच करेंगे, जिनमें आप सारा दिन व्यस्त रहेंगे और पिताजी द्वारा आपको कोई कार्य सौपा जायेगा, जिसे आप समय पर पूरा नहीं कर पाएंगे वह बाद मे आपके लिए परेशानी का कारण बनेंगा। आप कोई जमीन जायदाद से संबंधित सौदा करें, तो उसमें वैधानिक पहलुओं को स्वाधीनता से जाचं लें।

तिथि———– तृतीया 15:16:25 तक
पक्ष————————- शुक्ल
नक्षत्र——– आश्लेषा 30:28:58
योग———— हर्शण 11:30:54
करण————– गर 15:16:25
करण——— वणिज 28:13:55
वार———————– शनिवार
माह———————— आषाढ
चन्द्र राशि——————– कर्क
सूर्य राशि—————— मिथुन
रितु————————– ग्रीष्म
सायन————————- वर्षा
आयन———————– ग्रीष्म
सायन—————– दक्षिणायण
संवत्सर———————– नल
संवत्सर (उत्तर)—————– राक्षस
विक्रम संवत—————- 2079
विक्रम संवत (कर्तक)———- 2078
शक संवत—————– 1944

वृन्दावन
सूर्योदय————— 05:28:59
सूर्यास्त—————- 19:17:27
दिन काल————- 13:48:27
रात्री काल————- 10:11:55
चंद्रोदय—————- 07:57:56
चंद्रास्त—————- 21:55:26

लग्न—-मिथुन 15°58′ , 75°58′

सूर्य नक्षत्र—————— आर्द्रा
चन्द्र नक्षत्र—————- आश्लेषा
नक्षत्र पाया——————- रजत

*** पद, चरण ***

डी—- आश्लेषा 10:34:59

डू—- आश्लेषा 17:14:07

डे—- आश्लेषा 23:52:08

*** ग्रह गोचर ***

ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद
==========================
सूर्य=मिथुन 15:12 आर्द्रा , 3 ड
चन्द्र = कर्क 17°23, अश्लेषा, 1 डी
बुध =वृषभ 29 ° 07′ मृगशिरा ‘ 2 वो
शुक्र=वृषभ 16°05, रोहिणी ‘ 2 वा
मंगल=मेष 03°30 ‘ अश्विनी ‘ 2 चे
गुरु=मीन 13°30 ‘ उ o भा o, 4 ञ
शनि=कुम्भ 00°33 ‘ उ o भा o ‘ 3 गु
राहू=(व) मेष 25°40’ भरणी , 4 लो
केतु=(व) तुला 25°40 विशाखा , 2 तू

*** मुहूर्त प्रकरण ***

राहू काल 08:56 – 10:40 अशुभ
यम घंटा 14:07 – 15:50 अशुभ
गुली काल 05:29 – 07:13 अशुभ
अभिजित 11:56 – 12:51 शुभ
दूर मुहूर्त 07:19 – 08:15 अशुभ

*** गंड मूल अहोरात्र अशुभ

*** चोघडिया, दिन
काल 05:29 – 07:13 अशुभ
शुभ 07:13 – 08:56 शुभ
रोग 08:56 – 10:40 अशुभ
उद्वेग 10:40 – 12:23 अशुभ
चर 12:23 – 14:07 शुभ
लाभ 14:07 – 15:50 शुभ
अमृत 15:50 – 17:34 शुभ
काल 17:34 – 19:17 अशुभ

*** चोघडिया, रात
लाभ 19:17 – 20:34 शुभ
उद्वेग 20:34 – 21:50 अशुभ
शुभ 21:50 – 23:07 शुभ
अमृत 23:07 – 24:23* शुभ
चर 24:23* – 25:40* शुभ
रोग 25:40* – 26:56* अशुभ
काल 26:56* – 28:13* अशुभ
लाभ 28:13* – 29:29* शुभ

*** होरा, दिन
शनि 05:29 – 06:38
बृहस्पति 06:38 – 07:47
मंगल 07:47 – 08:56
सूर्य 08:56 – 10:05
शुक्र 10:05 – 11:14
बुध 11:14 – 12:23
चन्द्र 12:23 – 13:32
शनि 13:32 – 14:41
बृहस्पति 14:41 – 15:50
मंगल 15:50 – 16:59
सूर्य 16:59 – 18:08
शुक्र 18:08 – 19:17

*** होरा, रात
बुध 19:17 – 20:08
चन्द्र 20:08 – 20:59
शनि 20:59 – 21:50
बृहस्पति 21:50 – 22:41
मंगल 22:41 – 23:32
सूर्य 23:32 – 24:23
शुक्र 24:23* – 25:14
बुध 25:14* – 26:05
चन्द्र 26:05* – 26:56
शनि 26:56* – 27:47
बृहस्पति 27:47* – 28:38
मंगल 28:38* – 29:29

*** उदयलग्न प्रवेशकाल ***

मिथुन > 04:36 से 05:52 तक
कर्क > 05:52 से 08:16 तक
सिंह > 08:16 से 10:20 तक
कन्या > 10:20 से 12:36 तक
तुला > 12:36 से 14:51 तक
वृश्चिक > 14:51 से 17:06 तक
धनु > 17:06 से 19:16 तक
मकर > 19:16 से 20:58 तक
कुम्भ > 20:58 से 22:32 तक
मीन > 22:32 से 23:02 तक
मेष > 23:02 से 01:42 तक
वृषभ > 01:42 से 04:36 तक

*** विभिन्न शहरों का रेखांतर (समय)संस्कार

(लगभग-वास्तविक समय के समीप)
दिल्ली +10मिनट——— जोधपुर -6 मिनट
जयपुर +5 मिनट—— अहमदाबाद-8 मिनट
कोटा +5 मिनट———— मुंबई-7 मिनट
लखनऊ +25 मिनट——–बीकानेर-5 मिनट
कोलकाता +54—–जैसलमेर -15 मिनट

नोट– दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।
प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥
अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।
लाभ में व्यापार करें ।
रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।
काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।
अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।

*** दिशा शूल ज्ञान————-पूर्व
परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो लौंग अथवा कालीमिर्च खाके यात्रा कर सकते है l
इस मंत्र का उच्चारण करें-:
शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l
भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll

*** अग्नि वास ज्ञान -:
यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,
चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।
दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,
नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।। महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्
नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।

3 + 7 + 1 = 11 ÷ 4 = 3 शेष
मृत्यु लोक पर अग्नि वास हवन के लिए शुभ कारक है l

*** ग्रह मुख आहुति ज्ञान ***

सूर्य नक्षत्र से अगले 3 नक्षत्र गणना के आधार पर क्रमानुसार सूर्य , बुध , शुक्र , शनि , चन्द्र , मंगल , गुरु , राहु केतु आहुति जानें । शुभ ग्रह की आहुति हवनादि कृत्य शुभपद होता है

बुध ग्रह मुखहुति

*** शिव वास एवं फल -:

3 + 3 + 5 = 11 ÷ 7 = 4 शेष

सभायां = संताप कारक

*** भद्रा वास एवं फल -:

स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।
मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।

रात्रि 28:11 से प्रारम्भ

मृत्यु लोक = सर्वकार्य विनाशीनी

*** विशेष जानकारी ***

* बुध मिथुने

*गुप्त नवरात्रि तृतीय दिवस चंद्रघंटा पूजन

*** शुभ विचार ***

प्रलये भिन्नमर्यादा भवन्ति किल सागराः ।
सागरा भेदमिच्छान्ति प्रलयेऽपि न साधवः ।।
।। चा o नी o।।

जब प्रलय का समय आता है तो समुद्र भी अपनी मयारदा छोड़कर किनारों को छोड़ अथवा तोड़ जाते है, लेकिन सज्जन पुरुष प्रलय के सामान भयंकर आपत्ति अवं विपत्ति में भी आपनी मर्यादा नहीं बदलते.

*** सुभाषितानि ***

गीता -: मोक्षसान्यांसयोग अo-18

एतान्यपि तु कर्माणि सङ्‍गं त्यक्त्वा फलानि च ।,
कर्तव्यानीति में पार्थ निश्चितं मतमुत्तमम्‌ ॥,

इसलिए हे पार्थ! इन यज्ञ, दान और तपरूप कर्मों को तथा और भी सम्पूर्ण कर्तव्यकर्मों को आसक्ति और फलों का त्याग करके अवश्य करना चाहिए, यह मेरा निश्चय किया हुआ उत्तम मत है॥,6॥,

*आपका दिन मंगलमय हो*
********************
आचार्य नीरज पाराशर (वृन्दावन)
(व्याकरण,ज्योतिष,एवं पुराणाचार्य)

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