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मिथुन राशिफल 01 अगस्त 2022

***|| जय श्री राधे ||***

** महर्षि पाराशर पंचांग **
*** अथ पंचांगम् ***
****ll जय श्री राधे ll****
*******************

दिनाँक:- 01/08/2022, सोमवार
चतुर्थी, शुक्ल पक्ष,
श्रावण
“”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

*** दैनिक राशिफल ***

देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके।
नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।।
विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे।
जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत ।।

मिथुन 

आज का दिन आपके लिए लाभ दिलाने वाला रहेगा। आप अपने अनुभव से किसी नए व्यवसाय को शुरू कर सकते हैं,जिसे आपको छोटा या बड़ा सोचकर नहीं करना है। शत्रुओं का पराभव होगा। व्यवसाय ठीक चलेगा। आय में निश्चितता रहेगी। दु:खद समाचार मिल सकता है। व्यर्थ भागदौड़ रहेगी। काम पर ध्यान नहीं दे पाएंगे। बेवजह किसी व्यक्ति से कहासुनी हो सकती है। प्रयास अधिक करना पड़ेंगे। दूसरों के बहकावे में न आएं। फालतू बातों पर ध्यान न दें। लाभ में वृद्धि होगी। आपकी वाकपटुता से आप लोगों का दिल जीतने में कामयाब रहेंगे। रात्रि का समय आप अपने मित्रों व परिजनों के साथ में व्यतीत करेंगे। परिवार में किसी पिकनिक अथवा पार्टी का आयोजन होगा। पिताजी से चल रही अनबन आपको मिलजुल कर समाप्त करना होगा,नहीं तो वह अपनी जिद से टस से मस नहीं होंगे। जीवनसाथी का सहयोग व सानिध्य मिलने से आपके काफी सारी समस्याएं हल होंगी।

तिथि———– चतुर्थी 29:12:44 तक
पक्ष———————— शुक्ल
नक्षत्र—- पूर्वा फाल्गुनी 16:05:16
योग———— परिघ 19:02:05
करण———– वणिज 16:48:18
करण——- विष्टि भद्र 29:12:44
वार———————- सोमवार
माह———————– श्रावण
चन्द्र राशि——- सिंह 22:28:15
चन्द्र राशि——————– कन्या
सूर्य राशि——————- कर्क
रितु————————– वर्षा
आयन—————– दक्षिणायण
संवत्सर—————— शुभकृत
संवत्सर (उत्तर)——————– नल
विक्रम संवत—————- 2079
विक्रम संवत (कर्तक)———–2078
शक संवत—————— 1944

वृन्दावन
सूर्योदय————— 05:43:35
सूर्यास्त—————- 19:07:10
दिन काल————- 13:23:35
रात्री काल————- 10:36:56
चंद्रोदय————— 08:39:55
चंद्रास्त—————- 21:34:46

लग्न—- कर्क 14°36′ , 104°36′

सूर्य नक्षत्र——————– पुष्य
चन्द्र नक्षत्र———– पूर्वा फाल्गुनी
नक्षत्र पाया——————- रजत

**** पद, चरण ****

टी—- पूर्वा फाल्गुनी 09:40:47

टू—- पूर्वा फाल्गुनी 16:05:16

टे—- उत्तरा फाल्गुनी 22:28:15

टो—- उत्तरा फाल्गुनी 28:49:41

**** ग्रह गोचर ****

ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद
==========================
सूर्य=कर्क 14:12 पुष्य , 4 ड़
चन्द्र = सिंह 21 °23,पूo फ़ाo , 3 टी
बुध =सिंह 00 ° 07′ मघा ‘ 1 मा
शुक्र=मिथुन 22°05, पुनर्वसु ‘ 1 के
मंगल=मेष 23°30 ‘ भरणी ‘ 3 ले
गुरु=मीन 14°30 ‘ उ o भा o, 4 ञ
शनि=कुम्भ 29°33 ‘ धनिष्ठा ‘ 2 गी
राहू=(व) मेष 24°15’ भरणी , 4 लो
केतु=(व) तुला 24°15 विशाखा , 2 तू

**** मुहूर्त प्रकरण ****

राहू काल 07:24 – 09:04 अशुभ
यम घंटा 10:45 – 12:25 अशुभ
गुली काल 14:06 – 15:46 अशुभ
अभिजित 11:59 – 12:52 शुभ
दूर मुहूर्त 12:52 – 13:46 अशुभ
दूर मुहूर्त 15:33 – 16:26 अशुभ

**** चोघडिया, दिन
अमृत 05:44 – 07:24 शुभ
काल 07:24 – 09:04 अशुभ
शुभ 09:04 – 10:45 शुभ
रोग 10:45 – 12:25 अशुभ
उद्वेग 12:25 – 14:06 अशुभ
चर 14:06 – 15:46 शुभ
लाभ 15:46 – 17:27 शुभ
अमृत 17:27 – 19:07 शुभ

**** चोघडिया, रात
चर 19:07 – 20:27 शुभ
रोग 20:27 – 21:46 अशुभ
काल 21:46 – 23:06 अशुभ
लाभ 23:06 – 24:26* शुभ
उद्वेग 24:26* – 25:45* अशुभ
शुभ 25:45* – 27:05* शुभ
अमृत 27:05* – 28:25* शुभ
चर 28:25* – 29:44* शुभ

**** होरा, दिन
चन्द्र 05:44 – 06:51
शनि 06:51 – 07:58
बृहस्पति 07:58 – 09:04
मंगल 09:04 – 10:11
सूर्य 10:11 – 11:18
शुक्र 11:18 – 12:25
बुध 12:25 – 13:32
चन्द्र 13:32 – 14:39
शनि 14:39 – 15:46
बृहस्पति 15:46 – 16:53
मंगल 16:53 – 18:00
सूर्य 18:00 – 19:07

**** होरा, रात
शुक्र 19:07 – 20:00
बुध 20:00 – 20:53
चन्द्र 20:53 – 21:46
शनि 21:46 – 22:39
बृहस्पति 22:39 – 23:33
मंगल 23:33 – 24:26
सूर्य 24:26* – 25:19
शुक्र 25:19* – 26:12
बुध 26:12* – 27:05
चन्द्र 27:05* – 27:58
शनि 27:58* – 28:51
बृहस्पति 28:51* – 29:44

**** उदयलग्न प्रवेशकाल ****

कर्क > 03:50 से 06:06 तक
सिंह > 06:06 से 08:16 तक
कन्या > 08:16 से 10:26 तक
तुला > 10:26 से 12:41 तक
वृश्चिक > 12:41 से 14:56 तक
धनु > 14:56 से 17:16 तक
मकर > 17:16 से 19:00 तक
कुम्भ > 19:00 से 20:32 तक
मीन > 20:32 से 21:06 तक
मेष > 21:06 से 11:38 तक
वृषभ > 11:38 से 01:30 तक
मिथुन > 01:30 से 03:50 तक

**** विभिन्न शहरों का रेखांतर (समय)संस्कार

(लगभग-वास्तविक समय के समीप)
दिल्ली +10मिनट——— जोधपुर -6 मिनट
जयपुर +5 मिनट—— अहमदाबाद-8 मिनट
कोटा +5 मिनट———— मुंबई-7 मिनट
लखनऊ +25 मिनट——–बीकानेर-5 मिनट
कोलकाता +54—–जैसलमेर -15 मिनट

नोट— दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।
प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥
अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।
लाभ में व्यापार करें ।
रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।
काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।
अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।

**** दिशा शूल ज्ञान————-पूर्व
परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो घी अथवा काजू खाके यात्रा कर सकते है l
इस मंत्र का उच्चारण करें-:
शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l
भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll

**** अग्नि वास ज्ञान -:
यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,
चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।
दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,
नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।। महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्
नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।

4 + 2 + 1 = 7 ÷ 4 = 3 शेष
मृत्यु लोक पर अग्नि वास हवन के लिए शुभ कारक है l

**** ग्रह मुख आहुति ज्ञान ****

सूर्य नक्षत्र से अगले 3 नक्षत्र गणना के आधार पर क्रमानुसार सूर्य , बुध , शुक्र , शनि , चन्द्र , मंगल , गुरु , राहु केतु आहुति जानें । शुभ ग्रह की आहुति हवनादि कृत्य शुभपद होता है

बुध ग्रह मुखहुति

**** शिव वास एवं फल -:

4 + 4 + 5 = 13 ÷ 7 = 6 शेष

क्रीड़ायां = शोक , दुःख कारक

****  भद्रा वास एवं फल -:

स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।
मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।

सांय 16:46 से रात्रि 29:13 तक

मृत्यु लोक = सर्वकार्य विनाशिनी

**** विशेष जानकारी ****

* विनायक चतुर्थी

* दुर्वा गणपति व्रत

* रोटक व्रतारंभ

* महर्षि टंडन जयंती

**** शुभ विचार ****

गुरुरग्निर्द्वि जातीनां वर्णानां ब्राह्मणो गुरुः ।
पतिरेव गुरुः स्त्रीणां सर्वस्याभ्यागतो गुरुः ।।
।। चा o नी o।।

ब्राह्मणों को अग्नि की पूजा करनी चाहिए . दुसरे लोगों को ब्राह्मण की पूजा करनी चाहिए . पत्नी को पति की पूजा करनी चाहिए तथा दोपहर के भोजन के लिए जो अतिथि आये उसकी सभी को पूजा करनी चाहिए .

**** सुभाषितानि ****

गीता -: मोक्षसान्यांसयोग अo-18

सुखं त्विदानीं त्रिविधं श्रृणु मे भरतर्षभ।,
अभ्यासाद्रमते यत्र दुःखान्तं च निगच्छति॥,
यत्तदग्रे विषमिव परिणामेऽमृतोपमम्‌।,
तत्सुखं सात्त्विकं प्रोक्तमात्मबुद्धिप्रसादजम्‌॥,

हे भरतश्रेष्ठ! अब तीन प्रकार के सुख को भी तू मुझसे सुन।, जिस सुख में साधक मनुष्य भजन, ध्यान और सेवादि के अभ्यास से रमण करता है और जिससे दुःखों के अंत को प्राप्त हो जाता है, जो ऐसा सुख है, वह आरंभकाल में यद्यपि विष के तुल्य प्रतीत (जैसे खेल में आसक्ति वाले बालक को विद्या का अभ्यास मूढ़ता के कारण प्रथम विष के तुल्य भासता है वैसे ही विषयों में आसक्ति वाले पुरुष को भगवद्भजन, ध्यान, सेवा आदि साधनाओं का अभ्यास मर्म न जानने के कारण प्रथम ‘विष के तुल्य प्रतीत होता’ है) होता है, परन्तु परिणाम में अमृत के तुल्य है, इसलिए वह परमात्मविषयक बुद्धि के प्रसाद से उत्पन्न होने वाला सुख सात्त्विक कहा गया है॥,36-37॥,

****आपका दिन मंगलमय हो ****
***********************
आचार्य नीरज पाराशर (वृन्दावन)
(व्याकरण,ज्योतिष,एवं पुराणाचार्य)

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