Homeराशिफलमकर राशिफल 16 सितंबर 2022

मकर राशिफल 16 सितंबर 2022

***|| जय श्री राधे ||***
🌺🙏 महर्षि पाराशर पंचांग 🙏🌺
🙏🌺🙏 अथ पंचांगम् 🙏🌺🙏
****ll जय श्री राधे ll****
🌺🌺🙏🙏🌺🌺🙏🙏🌺🌺

दिनाँक:-16/09/2022, शुक्रवार
षष्ठी, कृष्ण पक्ष,
आश्विन
“””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

💮🚩 दैनिक राशिफल 🚩💮

देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके।
नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।।
विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे।
जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत ।।

मकर

नवीन वस्त्राभूषण की प्राप्ति पर व्यय होगा। व्यापार लाभदायक रहेगा। कोई बड़ा कार्य होने से प्रसन्नता रहेगी। दूसरों के काम में दखल न दें। मित्रों के साथ समय मनोरंजक व्यतीत होगा। भेंट व उपहार की प्राप्ति होगी। जल्दबाजी न करें। उन्नति के मार्ग प्रशस्त होंगे। यात्रा मनोरंजक रहेगी।

तिथि————- षष्ठी 12:18:53 तक
पक्ष———————— कृष्ण
नक्षत्र——— कृत्तिका 09:54:17
योग————– वज्र 29:48:19
करण———– वणिज 12:18:53
करण——- विष्टि भद्र 25:12:25
वार———————– शुक्रवार
माह———————– आश्विन
चन्द्र राशि——————- वृषभ
सूर्य राशि——————– सिंह
ऋतु—————————वर्षा
सायन———————– शरद
आयन—————– दक्षिणायण
संवत्सर——————- शुभकृत
संवत्सर (उत्तर)——————— नल
विक्रम संवत—————- 2079
गुजराती संवत————– 2078
शक संवत—————— 1944

वृन्दावन
सूर्योदय————— 06:05:55
सूर्यास्त—————–18:21:49
दिन काल————- 12:15:54
रात्री काल————- 11:44:32
चंद्रास्त—————- 11:40:38
चंद्रोदय—————- 22:16:16

लग्न—- सिंह 28°58′ , 148°58′

सूर्य नक्षत्र———- उत्तरा फाल्गुनी
चन्द्र नक्षत्र—————- कृत्तिका
नक्षत्र पाया——————- लोहा

🚩💮🚩 पद, चरण 🚩💮🚩

ए—-कृत्तिका 09:54:17

ओ—- रोहिणी 16:27:48

वा—- रोहिणी 23:03:22

वी—- रोहिणी 29:40:50

💮🚩💮 ग्रह गोचर 💮🚩💮

ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद
==========================
सूर्य=सिंह 28:12 उ o फ़ाo , 1 टे
चन्द्र =वृषभ 08 °23, कृतिका, 4 ए
बुध =कन्या 12 ° 07′ हस्त ‘ 1 पू
शुक्र=सिंह 19°05, पू o फ़ा o ‘ 2 टा
मंगल=वृषभ 19°30 ‘ रोहिणी’ 3 वी
गुरु=मीन 11°30 ‘ उ o भा o, 3 झ
शनि=मकर 25°33 ‘ धनिष्ठा ‘ 1 गा
राहू=(व) मेष 21°50’ भरणी , 3 ले
केतु=(व) तुला 21°50 विशाखा , 1 ती

राहू काल 10:42 – 12:14 अशुभ
यम घंटा 15:18 – 16:50 अशुभ
गुली काल 07:38 – 09:10 अशुभ
अभिजित 11:49 – 12:38 शुभ
दूर मुहूर्त 08:33 – 09:22 अशुभ
दूर मुहूर्त 12:38 – 13:27 अशुभ
वर्ज्यम 27:28* – 29:14* अशुभ

💮चोघडिया, दिन
चर 06:06 – 07:38 शुभ
लाभ 07:38 – 09:10 शुभ
अमृत 09:10 – 10:42 शुभ
काल 10:42 – 12:14 अशुभ
शुभ 12:14 – 13:46 शुभ
रोग 13:46 – 15:18 अशुभ
उद्वेग 15:18 – 16:50 अशुभ
चर 16:50 – 18:22 शुभ

🚩चोघडिया, रात
रोग 18:22 – 19:50 अशुभ
काल 19:50 – 21:18 अशुभ
लाभ 21:18 – 22:46 शुभ
उद्वेग 22:46 – 24:14* अशुभ
शुभ 24:14* – 25:42* शुभ
अमृत 25:42* – 27:10* शुभ
चर 27:10* – 28:38* शुभ
रोग 28:38* – 30:06* अशुभ

💮होरा, दिन
शुक्र 06:06 – 07:07
बुध 07:07 – 08:09
चन्द्र 08:09 – 09:10
शनि 09:10 – 10:11
बृहस्पति 10:11 – 11:13
मंगल 11:13 – 12:14
सूर्य 12:14 – 13:15
शुक्र 13:15 – 14:17
बुध 14:17 – 15:18
चन्द्र 15:18 – 16:19
शनि 16:19 – 17:21
बृहस्पति 17:21 – 18:22

🚩होरा, रात
मंगल 18:22 – 19:21
सूर्य 19:21 – 20:19
शुक्र 20:19 – 21:18
बुध 21:18 – 22:17
चन्द्र 22:17 – 23:15
शनि 23:15 – 24:14
बृहस्पति 24:14* – 25:13
मंगल 25:13* – 26:12
सूर्य 26:12* – 27:10
शुक्र 27:10* – 28:09
बुध 28:09* – 29:08
चन्द्र 29:08* – 30:06

🚩💮 उदयलग्न प्रवेशकाल 💮🚩

सिंह > 03:06 से 05:16 तक
कन्या > 05:16 से 07:30 तक
तुला > 07:30 से 09:36 तक
वृश्चिक > 09:36 से 11:52 तक
धनु > 11:52 से 14:18 तक
मकर > 14:18 से 16:00 तक
कुम्भ > 16:00 से 17:28 तक
मीन > 17:28 से 18:02 तक
मेष > 18:02 से 19:34 तक
वृषभ > 19:34 से 22:22 तक
कर्क > 01:22 से 02:52 तक

🚩विभिन्न शहरों का रेखांतर (समय)संस्कार

(लगभग-वास्तविक समय के समीप)
दिल्ली +10मिनट——— जोधपुर -6 मिनट
जयपुर +5 मिनट—— अहमदाबाद-8 मिनट
कोटा +5 मिनट———— मुंबई-7 मिनट
लखनऊ +25 मिनट——–बीकानेर-5 मिनट
कोलकाता +54—–जैसलमेर -15 मिनट

नोट– दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।
प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥
अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।
लाभ में व्यापार करें ।
रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।
काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।
अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।

💮दिशा शूल ज्ञान————-पश्चिम
परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो घी अथवा काजू खाके यात्रा कर सकते है l
इस मंत्र का उच्चारण करें-:
शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l
भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll

🚩 अग्नि वास ज्ञान -:
यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,
चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।
दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,
नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।। महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्
नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।

15 + 6 + 6 + 1 = 28 ÷ 4 = 0 शेष
मृत्यु लोक पर अग्नि वास हवन के लिए शुभ कारक है l

🚩💮 ग्रह मुख आहुति ज्ञान 💮🚩

सूर्य नक्षत्र से अगले 3 नक्षत्र गणना के आधार पर क्रमानुसार सूर्य , बुध , शुक्र , शनि , चन्द्र , मंगल , गुरु , राहु केतु आहुति जानें । शुभ ग्रह की आहुति हवनादि कृत्य शुभपद होता है

मंगल ग्रह मुखहुति

💮 शिव वास एवं फल -:

21 + 21 + 5 = 47 ÷ 7 = 5 शेष

ज्ञानवेलायां = कष्ट कारक

🚩भद्रा वास एवं फल -:

स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।
मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।

दोपहर 12:11 से रात्रि 2516

स्वर्ग लोक = शुभ कारक

💮🚩 विशेष जानकारी 🚩💮

* षष्ठी श्राद्ध

* गुरु अमरदास पुण्य तिथि

💮🚩💮 शुभ विचार 💮🚩💮

न वेत्ति तो यस्य गुण प्रकर्ष
स तं सदा निन्दति नाऽत्र चित्रम् ।
यथा किरती करिकुम्भलब्धां
मुक्तां परित्यज्य बिभर्ति गुञ्जाम् ।।
।। चा o नी o।।

इसमें कोई आश्चर्य नहीं की व्यक्ति उन बातो के प्रति अनुदगार कहता है जिसका उसे कोई ज्ञान नहीं. उसी प्रकार जैसे एक जंगली शिकारी की पत्नी हाथी के सर का मणि फेककर गूंजे की माला धारण करती है.

🚩💮🚩 सुभाषितानि 🚩💮🚩

गीता -: क्षेत्र-क्षेत्रज्ञविज्ञानयोग अo-13

अमानित्वमदम्भित्वमहिंसा क्षान्तिरार्जवम्‌ ।,
आचार्योपासनं शौचं स्थैर्यमात्मविनिग्रहः ॥,

श्रेष्ठता के अभिमान का अभाव, दम्भाचरण का अभाव, किसी भी प्राणी को किसी प्रकार भी न सताना, क्षमाभाव, मन-वाणी आदि की सरलता, श्रद्धा-भक्ति सहित गुरु की सेवा, बाहर-भीतर की शुद्धि (सत्यतापूर्वक शुद्ध व्यवहार से द्रव्य की और उसके अन्न से आहार की तथा यथायोग्य बर्ताव से आचरणों की और जल-मृत्तिकादि से शरीर की शुद्धि को बाहर की शुद्धि कहते हैं तथा राग, द्वेष और कपट आदि विकारों का नाश होकर अन्तःकरण का स्वच्छ हो जाना भीतर की शुद्धि कही जाती है।,) अन्तःकरण की स्थिरता और मन-इन्द्रियों सहित शरीर का निग्रह॥,7॥,

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