Homeराशिफलकर्क राशिफल 19 अगस्त 2022

कर्क राशिफल 19 अगस्त 2022

***|| जय श्री राधे ||***
🌺🙏 महर्षि पाराशर पंचांग 🙏🌺
🙏🌺🙏 अथ पंचांगम् 🙏🌺🙏
****ll जय श्री राधे ll****
🌺🌺🙏🙏🌺🌺🙏🙏🌺🌺

दिनाँक:-19/08/2022, शुक्रवार
अष्टमी, कृष्ण पक्ष,
भाद्रपद
“”””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

💮🚩 दैनिक राशिफल 🚩💮

देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके।
नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।।
विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे।
जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत ।।

🦀कर्क

आज का दिन आप रचनात्मक कार्यों में व्यतीत करेंगे। प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी। राजकीय काम बनेंगे। व्यवसाय ठीक चलेगा। चिंता रहेगी। जोखिम न उठाएं। संतान से मदद मिलेगी। आर्थिक स्थिति में प्रगति की संभावना है। अचानक धन की प्राप्ति के योग हैं। क्रोध एवं उत्तेजना पर संयम रखें। आपके किसी प्रॉपर्टी से संबंधित कार्य में आपका कोई मित्र विघ्न डाल सकता है,जिसके कारण आप परेशान रहेंगे। संतान इधर-उधर के कामों में ध्यान लगाएगी,लेकिन पढ़ाई से उनका ध्यान हटेगा। विदेशों से व्यापार कर रहे लोगों को कोई शुभ सूचना सुनने को मिल सकती है। आपका अपने आस-पड़ोस में कोई वाद-विवाद पनप सकता है,जो आपकी प्रसन्नता का कारण बनेगा। नौकरी कर रहे लोग किसी नए काम में भी हाथ आजमा सकते हैं।

 

तिथि———– अष्टमी 22:58:50 तक
पक्ष————————- कृष्ण
नक्षत्र——— कृत्तिका 25:52:06
योग ध्रुव————– 20:57:29
करण———- बालव 10:04:59
करण———– कौलव 22:58:50
वार———————– शुक्रवार
माह———————– भाद्रपद
चन्द्र राशि—— मेष 06:05:21
चन्द्र राशि—————— वृषभ
सूर्य राशि——————- सिंह
रितु————————– वर्षा
आयन——————दक्षिणायण
संवत्सर—————— शुभकृत
संवत्सर (उत्तर)——————- नल
विक्रम संवत—————- 2079
गुजराती संवत————- 2078
शक संवत—————— 1944

वृन्दावन
सूर्योदय————— 05:52:54
सूर्यास्त—————- 18:52:22
दिन काल————- 12:59:28
रात्री काल————- 11:01:01
चंद्रास्त—————- 12:54:21
चंद्रोदय—————- 23:40:48

लग्न—- सिंह 1°52′ , 121°52′

सूर्य नक्षत्र——————-मघा
चन्द्र नक्षत्र—————- कृत्तिका
नक्षत्र पाया—————— लोहा

🚩💮🚩 पद, चरण 🚩💮🚩

अ—- कृत्तिका 06:05:21

ई—- कृत्तिका 12:38:50

उ—- कृत्तिका 19:14:29

ए—- कृत्तिका 25:52:06

💮🚩💮 ग्रह गोचर 💮🚩💮

ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद
==========================
सूर्य=कर्क 01:12 मघा , 1 मा
चन्द्र =मेष 29 °23, कृतिका , 1 अ
बुध =सिंह 27 ° 07′ उ o फा o ‘ 1 टे
शुक्र=कर्क 14°05, पुष्य ‘ 4 टू
मंगल=वृषभ 05°30 ‘ कृतिका ‘ 3 उ
गुरु=मीन 13°30 ‘ उ o भा o, 4 ञ
शनि=कुम्भ 29°33 ‘ धनिष्ठा ‘ 2 गी
राहू=(व) मेष 23°10’ भरणी , 4 लो
केतु=(व) तुला 23°10 विशाखा , 2 तू

🚩💮🚩 मुहूर्त प्रकरण 🚩💮🚩

राहू काल 10:45 – 12:23 अशुभ
यम घंटा 15:38 – 17:15 अशुभ
गुली काल 07:30 – 09:08 अशुभ
अभिजित 11:57 – 12:49 शुभ
दूर मुहूर्त 08:29 – 09:21 अशुभ
दूर मुहूर्त 12:49 – 13:41 अशुभ
वर्ज्यम 12:39 – 14:24 अशुभ

💮चोघडिया, दिन
चर 05:53 – 07:30 शुभ
लाभ 07:30 – 09:08 शुभ
अमृत 09:08 – 10:45 शुभ
काल 10:45 – 12:23 अशुभ
शुभ 12:23 – 14:00 शुभ
रोग 14:00 – 15:38 अशुभ
उद्वेग 15:38 – 17:15 अशुभ
चर 17:15 – 18:52 शुभ

🚩चोघडिया, रात
रोग 18:52 – 20:15 अशुभ
काल 20:15 – 21:38 अशुभ
लाभ 21:38 – 23:00 शुभ
उद्वेग 23:00 – 24:23* अशुभ
शुभ 24:23* – 25:46* शुभ
अमृत 25:46* – 27:08* शुभ
चर 27:08* – 28:31* शुभ
रोग 28:31* – 29:53* अशुभ

💮होरा, दिन
शुक्र 05:53 – 06:58
बुध 06:58 – 08:03
चन्द्र 08:03 – 09:08
शनि 09:08 – 10:13
बृहस्पति 10:13 – 11:18
मंगल 11:18 – 12:23
सूर्य 12:23 – 13:28
शुक्र 13:28 – 14:33
बुध 14:33 – 15:38
चन्द्र 15:38 – 16:42
शनि 16:42 – 17:47
बृहस्पति 17:47 – 18:52

🚩होरा, रात
मंगल 18:52 – 19:47
सूर्य 19:47 – 20:43
शुक्र 20:43 – 21:38
बुध 21:38 – 22:33
चन्द्र 22:33 – 23:28
शनि 23:28 – 24:23
बृहस्पति 24:23* – 25:18
मंगल 25:18* – 26:13
सूर्य 26:13* – 27:08
शुक्र 27:08* – 28:03
बुध 28:03* – 28:58
चन्द्र 28:58* – 29:53

🚩💮 उदयलग्न प्रवेशकाल 💮🚩

सिंह > 05:56 से 07:02 तक
कन्या > 07:02 से 09:12 तक
तुला > 09:12 से 11:26 तक
वृश्चिक > 11:26 से 13:42 तक
धनु > 13:42 से 16:12 तक
मकर > 16:12 से 17:46 तक
कुम्भ > 17:46 से 19:18 तक
मीन > 19:18 से 19:52 तक
मेष > 19:52 से 10:24 तक
वृषभ > 10:24 से 00:16 तक
मिथुन > 00:16 से 02:36 तक
कर्क > 02:36 से 05:40 तक

🚩विभिन्न शहरों का रेखांतर (समय)संस्कार

(लगभग-वास्तविक समय के समीप)
दिल्ली +10मिनट——— जोधपुर -6 मिनट
जयपुर +5 मिनट—— अहमदाबाद-8 मिनट
कोटा +5 मिनट———— मुंबई-7 मिनट
लखनऊ +25 मिनट——–बीकानेर-5 मिनट
कोलकाता +54—–जैसलमेर -15 मिनट

नोट– दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।
प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥
अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।
लाभ में व्यापार करें ।
रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।
काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।
अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।

💮दिशा शूल ज्ञान————-पश्चिम
परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो घी अथवा काजू खाके यात्रा कर सकते है l
इस मंत्र का उच्चारण करें-:
शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l
भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll

🚩 अग्नि वास ज्ञान -:
यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,
चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।
दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,
नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।। महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्
नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।

15 +8 + 6 + 1 = 30 ÷ 4 = 2 शेष
आकाश लोक पर अग्नि वास हवन के लिए अशुभ कारक है l

🚩💮 ग्रह मुख आहुति ज्ञान 💮🚩

सूर्य नक्षत्र से अगले 3 नक्षत्र गणना के आधार पर क्रमानुसार सूर्य , बुध , शुक्र , शनि , चन्द्र , मंगल , गुरु , राहु केतु आहुति जानें । शुभ ग्रह की आहुति हवनादि कृत्य शुभपद होता है

गुरु ग्रह मुखहुति

💮 शिव वास एवं फल -:

23 + 23 + 5 = 51 ÷ 7 = 2 शेष

गौरि सन्निधौ = शुभ कारक

🚩भद्रा वास एवं फल -:

स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।
मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।

💮🚩 विशेष जानकारी 🚩💮

* श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रत (वैष्णव) चंद्रोदय रात्रि 23:40

* कालष्टमी

*दुर्वाष्टमी

* दशाफल व्रत

*संत ज्ञानेश्वर जयंती

💮🚩💮 शुभ विचार 💮🚩💮

लुब्धमर्थेन गृहिणीयात् स्तब्धमञ्जलिकर्मणा ।
मूर्खं छन्दानुवृत्या च यथार्थत्वेन पण्डितम् ।।
।। चा o नी o।।

एक लालची आदमी को भेट वास्तु दे कर संतुष्ट करे. एक कठोर आदमी को हाथ जोड़कर संतुष्ट करे. एक मुर्ख को सम्मान देकर संतुष्ट करे. एक विद्वान् आदमी को सच बोलकर संतुष्ट करे.

🚩💮🚩 सुभाषितानि 🚩💮🚩

गीता -: मोक्षसान्यांसयोग अo-18

चेतसा सर्वकर्माणि मयि सन्न्यस्य मत्परः।,
बुद्धियोगमुपाश्रित्य मच्चित्तः सततं भव॥,

सब कर्मों को मन से मुझमें अर्पण करके (गीता अध्याय 9 श्लोक 27 में जिसकी विधि कही है) तथा समबुद्धि रूप योग को अवलंबन करके मेरे परायण और निरंतर मुझमें चित्तवाला हो॥,57॥,

 

🙏आपका दिन मंगलमय हो🙏
🌺🌺🌺🌺🙏🌺🌺🌺🌺
आचार्य नीरज पाराशर (वृन्दावन)

 

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