Homeराशिफलकर्क राशिफल 17 जुलाई 2022

कर्क राशिफल 17 जुलाई 2022

***|| जय श्री राधे ||***

** महर्षि पाराशर पंचांग **
*** अथ पंचांगम् ***
****ll जय श्री राधे ll****
*******************

दिनाँक:-17/07/2022, रविवार
चतुर्थी, कृष्ण पक्ष,
श्रावण
“”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

*** दैनिक राशिफल ***

देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके।
नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।।
विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे।
जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत ।।

कर्क 

आज का दिन आपके लिए मिश्रित रूप से फलदायक रहने वाला है। विवाद को बढ़ावा न दें। कानूनी अड़चन से सामना हो सकता है। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। बुरी खबर मिल सकती है, धैर्य रखें। दौड़धूप से स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। आय बनी रहेगी। व्यापार-व्यवसाय लाभदायक रहेगा। नौकरी में कार्यभार रहेगा। जोखिम न लें। मौसम के बदलाव के कारण आपको कुछ स्वास्थ्य समस्या हो सकती हैं, लेकिन कार्यक्षेत्र में आपकी किसी प्रभावशाली व्यक्ति से मुलाकात होगी। आपको वरिष्ठ अधिकारियों से बहसबाजी में पड़ने से बचना होगा। आपको अपने किसी मित्र के लिए कुछ रुपयों का इंतजाम भी करना पड़ सकता है। संतान द्वारा आपको कोई प्रसन्नता दायक समाचार सुनने को मिल सकता है, लेकिन विदेश में व्यापार कर रहे लोगों को कोई डील बहुत सोच समझकर फाइनल करनी होगी। घर से बाहर नौकरी में कार्यरत लोगों को अपने परिवार के सदस्यों की याद सता सकती है।

तिथि———– चतुर्थी 10:48:53 तक
पक्ष————————- कृष्ण
नक्षत्र——– शतभिषा 13:23:50
योग———- सौभाग्य 17:47:17
करण———– बालव 10:48:53
करण———– कौलव 21:45:49
वार———————— रविवार
माह———————— श्रावण
चन्द्र राशि——————- कुम्भ
सूर्य राशि——————– कर्क
रितु————————– वर्षा
आयन—————– दक्षिणायण
संवत्सर——————- शुभकृत
संवत्सर (उत्तर)——————— नल
विक्रम संवत—————- 2079
विक्रम संवत (कर्तक)———- 2078
शक संवत—————— 1944

वृन्दावन
सूर्योदय————— 05:35:43
सूर्यास्त—————- 19:14:48
दिन काल————- 13:39:05
रात्री काल————- 10:21:24
चंद्रास्त—————- 09:14:45
चंद्रोदय—————- 22:22:45

लग्न—- कर्क 0°16′ , 90°16′

सूर्य नक्षत्र—————– पुनर्वसु
चन्द्र नक्षत्र—————- शतभिषा
नक्षत्र पाया——————– ताम्र

**** पद, चरण ****

सी—- शतभिषा 07:46:21

सू—- शतभिषा 13:23:50

से—- पूर्वा भाद्रपदा 19:04:05

सो—- पूर्वभाद्रपदा 24:47:13

**** ग्रह गोचर ****

ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद
==========================
सूर्य=मिथुन 00:12 पुनर्वसु , 4 ही
चन्द्र = कुम्भ 15°23, शतभिषा , 3 सी
बुध =कर्क। 00 ° 07′ पुनर्वसु ‘ 4 ही
शुक्र=मिथुन 04°05, मृगशिरा ‘ 4 की
मंगल=मेष 13°30 ‘ भरणी ‘ 1 ली
गुरु=मीन 14°30 ‘ उ o भा o, 4 ञ
शनि=कुम्भ 29°33 ‘ धनिष्ठा ‘ 2 गी
राहू=(व) मेष 25°00’ भरणी , 4 लो
केतु=(व) तुला 25°00 विशाखा , 2 तू

**** मुहूर्त प्रकरण ****

राहू काल 17:32 – 19:15 अशुभ
यम घंटा 12:25 – 14:08 अशुभ
गुली काल 15:50 – 17:32 अशुभ
अभिजित 11:58 – 12:53 शुभ
दूर मुहूर्त 17:26 – 18:20 अशुभ

**** पंचक अहोरात्र अशुभ

**** चोघडिया, दिन
उद्वेग 05:36 – 07:18 अशुभ
चर 07:18 – 09:00 शुभ
लाभ 09:00 – 10:43 शुभ
अमृत 10:43 – 12:25 शुभ
काल 12:25 – 14:08 अशुभ
शुभ 14:08 – 15:50 शुभ
रोग 15:50 – 17:32 अशुभ
उद्वेग 17:32 – 19:15 अशुभ

**** चोघडिया, रात
शुभ 19:15 – 20:32 शुभ
अमृत 20:32 – 21:50 शुभ
चर 21:50 – 23:08 शुभ
रोग 23:08 – 24:26* अशुभ
काल 24:26* – 25:43* अशुभ
लाभ 25:43* – 27:01* शुभ
उद्वेग 27:01* – 28:19* अशुभ
शुभ 28:19* – 29:36* शुभ

**** होरा, दिन
सूर्य 05:36 – 06:44
शुक्र 06:44 – 07:52
बुध 07:52 – 09:00
चन्द्र 09:00 – 10:09
शनि 10:09 – 11:17
बृहस्पति 11:17 – 12:25
मंगल 12:25 – 13:34
सूर्य 13:34 – 14:42
शुक्र 14:42 – 15:50
बुध 15:50 – 16:58
चन्द्र 16:58 – 18:07
शनि 18:07 – 19:15

**** होरा, रात
बृहस्पति 19:15 – 20:07
मंगल 20:07 – 20:58
सूर्य 20:58 – 21:50
शुक्र 21:50 – 22:42
बुध 22:42 – 23:34
चन्द्र 23:34 – 24:26
शनि 24:26* – 25:17
बृहस्पति 25:17* – 26:09
मंगल 26:09* – 27:01
सूर्य 27:01* – 27:53
शुक्र 27:53* – 28:44
बुध 28:44* – 29:36

**** उदयलग्न प्रवेशकाल ****

मिथुन > 02:33 से 04:40 तक
कर्क > 04:40 से 07:18 तक
सिंह > 07:18 से 09:24 तक
कन्या > 09:24 से 11:34 तक
तुला > 11:34 से 13:49 तक
वृश्चिक > 13:49 से 16:02 तक
धनु > 16:02 से 18:18 तक
मकर > 18:18 से 20:02 तक
कुम्भ > 20:02 से 21:36 तक
मीन > 21:36 से 22:08 तक
मेष > 22:08 से 00:42 तक
वृषभ > 00:42 से 02:33 तक

**** विभिन्न शहरों का रेखांतर (समय)संस्कार

(लगभग-वास्तविक समय के समीप)
दिल्ली +10मिनट——— जोधपुर -6 मिनट
जयपुर +5 मिनट—— अहमदाबाद-8 मिनट
कोटा +5 मिनट———— मुंबई-7 मिनट
लखनऊ +25 मिनट——–बीकानेर-5 मिनट
कोलकाता +54—–जैसलमेर -15 मिनट

नोट– दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।
प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥
अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।
लाभ में व्यापार करें ।
रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।
काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।
अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।

**** दिशा शूल ज्ञान————-पश्चिम
परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो घी अथवा चिरौजी खाके यात्रा कर सकते है l
इस मंत्र का उच्चारण करें-:
शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l
भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll

**** अग्नि वास ज्ञान -:
यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,
चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।
दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,
नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।। महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्
नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।

15 + 4 + 1 + 1 = 21 ÷ 4 = 1 शेष
पाताल लोक पर अग्नि वास हवन के लिए अशुभ कारक है l

**** ग्रह मुख आहुति ज्ञान ****

सूर्य नक्षत्र से अगले 3 नक्षत्र गणना के आधार पर क्रमानुसार सूर्य , बुध , शुक्र , शनि , चन्द्र , मंगल , गुरु , राहु केतु आहुति जानें । शुभ ग्रह की आहुति हवनादि कृत्य शुभपद होता है

मंगल ग्रह मुखहुति 13:25 तक
उपरान्त गुरु

**** शिव वास एवं फल -:

19 + 19 + 5 = 43 ÷ 7 = 1 शेष

कैलाश वास = शुभ कारक

**** भद्रा वास एवं फल -:

स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।
मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।

**** विशेष जानकारी ****

* पंचक अहोरात्र

**** शुभ विचार ****

दर्शनाध्यानसंस्पर्शैर्मत्सी कूर्मी च पक्षिणी ।
शिशुपालयते नित्यं तथा सज्जनसड्गतिः ।।
।। चा o नी o।।

जैसे मछली दृष्टी से, कछुआ ध्यान देकर और पंछी स्पर्श करके अपने बच्चो को पालते है, वैसे ही संतजन पुरुषों की संगती मनुष्य का पालन पोषण करती है.

**** सुभाषितानि ****

गीता -: मोक्षसान्यांसयोग अo-18

पृथक्त्वेन तु यज्ज्ञानं नानाभावान्पृथग्विधान्‌ ।,
वेत्ति सर्वेषु भूतेषु तज्ज्ञानं विद्धि राजसम्‌ ॥,

किन्तु जो ज्ञान अर्थात जिस ज्ञान के द्वारा मनुष्य सम्पूर्ण भूतों में भिन्न-भिन्न प्रकार के नाना भावों को अलग-अलग जानता है, उस ज्ञान को तू राजस जान॥,21॥,

****आपका दिन मंगलमय हो ****
***********************
आचार्य नीरज पाराशर (वृन्दावन)
(व्याकरण,ज्योतिष,एवं पुराणाचार्य)

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