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मेष राशिफल 01 जुलाई 2022

***|| जय श्री राधे ||***

*** महर्षि पाराशर पंचांग ***
*** अथ पंचांगम् ***
****ll जय श्री राधे ll****
********************

दिनाँक:-01/07/2022, शुक्रवार
द्वितीया, शुक्ल पक्ष,
आषाढ
“”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

** दैनिक राशिफल **

देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके।
नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।।
विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे।
जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत ।।

मेष 

आज का दिन आपके लिए कुछ उलझनों भरा रहेगा। कार्यक्षेत्र में आप किसी नए प्रोजेक्ट के मिलने से प्रसन्न रहेंगे, लेकिन आप दोस्तों के साथ खाली समय व्यतीत करने में ना पड़े। किसी अपरिचित की बातों में न आएं। धनहानि हो सकती है। थोड़े प्रयास से ही काम सफल रहेंगे। मित्रों की सहायता करने का अवसर प्राप्त होगा। सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। लाभ के अवसर प्राप्त होंगे। किसी प्रबुद्ध व्यक्ति का मार्गदर्शन प्राप्त होगा। नौकरी में उच्चाधिकारी प्रसन्न रहेंगे। मन में उलझनों के कारण आपकी निर्णय लेने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है। आपके भाई व बहन में से किसी के स्वास्थ्य में गिरावट आ सकती है। आपको कुछ पुरानी चल रही समस्याओं से निजात मिलेगी और आपका रुका हुआ धन भी आपको प्राप्त हो सकता है। सांसारिक सुख के साधनों में वृद्धि होगी। जीवनसाथी का आपको भरपूर सहयोग मिलेगा। लोगों की छोटी-छोटी बातों को नजरअंदाज करना होगा और अपने में ही मस्त मगन होकर अपने कार्य की ओर ध्यान लगाना बेहतर रहेगा।

तिथि———- द्वितीया 13:08:48 तक
पक्ष———————— शुक्ल
नक्षत्र————- पुष्य 27:54:52
योग———–व्याघात 10:44:38
करण———– कौलव 13:08:48
करण———– तैतुल 26:14:29
वार———————– शुक्रवार
माह———————— आषाढ
चन्द्र राशि——————- कर्क
सूर्य राशि—————— मिथुन
ऋतु————————- ग्रीष्म
सायन———————— वर्षा
आयन—————— उत्तरायण
सायन—————- दक्षिणायण
संवत्सर———————- नल
संवत्सर (उत्तर)—————– राक्षस
विक्रम संवत————— 2079
विक्रम संवत (कर्तक)———- 2078
शक संवत—————— 1944

वृन्दावन
सूर्योदय————— 05:28:37
सूर्यास्त—————- 19:17:26
दिन काल————- 13:48:49
रात्री काल———— 10:11:32
चंद्रोदय—————- 07:02:15
चंद्रास्त—————- 21:17:26

लग्न—- मिथुन 15°0′ , 75°0′

सूर्य नक्षत्र—————— आर्द्रा
चन्द्र नक्षत्र——————- पुष्य
नक्षत्र पाया——————- रजत

*** पद, चरण ***

हु—-पुष्य 07:49:17

हे—- पुष्य 14:31:56

हो—- पुष्य 21:13:49

ड—- पुष्य 27:54:52

*** ग्रह गोचर ***

ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद
==========================
सूर्य=मिथुन 15:12 आर्द्रा , 3 ड
चन्द्र = मिथुन 05°23, पुष्य, 1 वो
बुध =वृषभ 28 ° 07′ मृगशिरा ‘ 1 वे
शुक्र=वृषभ 15°05, रोहिणी ‘ 2 वा
मंगल=मेष 02°30 ‘ अश्विनी ‘ 1 चू
गुरु=मीन 13°30 ‘ उ o भा o, 3 झ
शनि=कुम्भ 00°33 ‘ उ o भा o ‘ 3 गु
राहू=(व) मेष 25°50’ भरणी , 4 लो
केतु=(व) तुला 25°50 विशाखा , 2 तू

*** मुहूर्त प्रकरण ***

राहू काल 10:39 – 12:23 अशुभ
यम घंटा 15:50 – 17:34 अशुभ
गुली काल 07:12 – 08:56 अशुभ
अभिजित 11:55 – 12:51 शुभ
दूर मुहूर्त 08:14 – 09:10 अशुभ
दूर मुहूर्त 12:51 – 13:46 अशुभ

*** गंड मूल 27:55* – अहोरात्र अशुभ

*** चोघडिया, दिन
चर 05:29 – 07:12 शुभ
लाभ 07:12 – 08:56 शुभ
अमृत 08:56 – 10:39 शुभ
काल 10:39 – 12:23 अशुभ
शुभ 12:23 – 14:07 शुभ
रोग 14:07 – 15:50 अशुभ
उद्वेग 15:50 – 17:34 अशुभ
चर 17:34 – 19:17 शुभ

*** चोघडिया, रात
रोग 19:17 – 20:34 अशुभ
काल 20:34 – 21:50 अशुभ
लाभ 21:50 – 23:07 शुभ
उद्वेग 23:07 – 24:23* अशुभ
शुभ 24:23* – 25:40* शुभ
अमृत 25:40* – 26:56* शुभ
चर 26:56* – 28:13* शुभ
रोग 28:13* – 29:29* अशुभ

*** होरा, दिन
शुक्र 05:29 – 06:38
बुध 06:38 – 07:47
चन्द्र 07:47 – 08:56
शनि 08:56 – 10:05
बृहस्पति 10:05 – 11:14
मंगल 11:14 – 12:23
सूर्य 12:23 – 13:32
शुक्र 13:32 – 14:41
बुध 14:41 – 15:50
चन्द्र 15:50 – 16:59
शनि 16:59 – 18:08
बृहस्पति 18:08 – 19:17

*** होरा, रात
मंगल 19:17 – 20:08
सूर्य 20:08 – 20:59
शुक्र 20:59 – 21:50
बुध 21:50 – 22:41
चन्द्र 22:41 – 23:32
शनि 23:32 – 24:23
बृहस्पति 24:23* – 25:14
मंगल 25:14* – 26:05
सूर्य 26:05* – 26:56
शुक्र 26:56* – 27:47
बुध 27:47* – 28:38
चन्द्र 28:38* – 29:29

*** उदयलग्न प्रवेशकाल ***

मिथुन > 04:40 से 05:56 तक
कर्क > 05:56 से 08:20 तक
सिंह > 08:20 से 10:24 तक
कन्या > 10:24 से 12:40 तक
तुला > 12:40 से 14:55 तक
वृश्चिक > 14:55 से 17:10 तक
धनु > 17:10 से 19:20 तक
मकर > 19:20 से 21:02 तक
कुम्भ > 21:02 से 22:36 तक
मीन > 22:36 से 23:02 तक
मेष > 23:02 से 01:46 तक
वृषभ > 01:46 से 04:40 तक

*** विभिन्न शहरों का रेखांतर (समय)संस्कार

(लगभग-वास्तविक समय के समीप)
दिल्ली +10मिनट——— जोधपुर -6 मिनट
जयपुर +5 मिनट—— अहमदाबाद-8 मिनट
कोटा +5 मिनट———— मुंबई-7 मिनट
लखनऊ +25 मिनट——–बीकानेर-5 मिनट
कोलकाता +54—–जैसलमेर -15 मिनट

नोट— दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।
प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥
अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।
लाभ में व्यापार करें ।
रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।
काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।
अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।

*** दिशा शूल ज्ञान————-पश्चिम
परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो घी अथवा काजू खाके यात्रा कर सकते है l
इस मंत्र का उच्चारण करें-:
शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l
भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll

*** अग्नि वास ज्ञान -:
यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,
चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।
दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,
नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।। महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्
नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।

2 + 6 + 1 = 9 ÷ 4 = 1 शेष
पाताल लोक पर अग्नि वास हवन के लिए अशुभ कारक है l

*** ग्रह मुख आहुति ज्ञान ***

सूर्य नक्षत्र से अगले 3 नक्षत्र गणना के आधार पर क्रमानुसार सूर्य , बुध , शुक्र , शनि , चन्द्र , मंगल , गुरु , राहु केतु आहुति जानें । शुभ ग्रह की आहुति हवनादि कृत्य शुभपद होता है

सूर्य ग्रह मुखहुति

*** शिव वास एवं फल -:

2 + 2 + 5 = 9 ÷ 7 = 2 शेष

गौरि सन्निधौ = शुभ कारक

*** भद्रा वास एवं फल -:

स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।
मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।

*** विशेष जानकारी ***

*श्री जगन्नाथ महाप्रभु रथ यात्रा (पूरी) उड़ीसा

*श्री वल्लभाचार्य पुण्य तिथि

*डाक्टर्स/सी ए दिवस

*रजर्षि टंडन निधन दिवस

*** शुभ विचार ***

एदतर्थं कुलोनानां नृपाः कुर्वन्ति संग्रहम् ।
आदिमध्यावसानेषु न स्यजन्ति च ते नृपम् ।।
।। चा o नी o।।

राजा लोग अपने आस पास अच्छे कुल के लोगो को इसलिए रखते है क्योंकि ऐसे लोग ना आरम्भ मे, ना बीच मे और ना ही अंत मे साथ छोड़कर जाते है।

*** सुभाषितानि ***

गीता -: मोक्षसान्यांसयोग अo-18

यज्ञदानतपःकर्म न त्याज्यं कार्यमेव तत्‌ ।,
यज्ञो दानं तपश्चैव पावनानि मनीषिणाम्‌ ॥,

यज्ञ, दान और तपरूप कर्म त्याग करने के योग्य नहीं है, बल्कि वह तो अवश्य कर्तव्य है, क्योंकि यज्ञ, दान और तप -ये तीनों ही कर्म बुद्धिमान पुरुषों को (वह मनुष्य बुद्धिमान है, जो फल और आसक्ति को त्याग कर केवल भगवदर्थ कर्म करता है।,) पवित्र करने वाले हैं॥,5॥,

*आपका दिन मंगलमय हो*
********************
आचार्य नीरज पाराशर (वृन्दावन)
(व्याकरण,ज्योतिष,एवं पुराणाचार्य)

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