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विभाजन की विभीषिका स्मृति दिवस 2022: क्या फिर से भारत का विभाजन नहीं हो सकता, देश के पास इस बात को नकारने का कोई ठोस कारण है?

Dr. Mahendra Thakur
Dr. Mahender Thakur

डॉ. महेंद्र ठाकुर

विभाजन की विभीषिका स्मृति दिवस 2022: क्या फिर से भारत का विभाजन नहीं हो सकता देश के पास इस बात को नकारने का कोई ठोस कारण है?

देश ने हर्षोल्लास के साथ ‘आज़ादी का अमृत महोत्सव’ और ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के साथ स्वतंत्रता दिवस मनाया। इससे पहले 14 अगस्त 2022, को ‘विभाजन की विभीषका स्मृति दिवस’ और कुछ लोगों ने ‘अखंड भारत दिवस’ भी मनाया। 14 अगस्त 2022 की सुबह हिंदी समाचार पत्र ‘अमर उजाला’ के ऑनलाइन संस्करण में एक समाचार पढ़ा, जिसका शीर्षक था पाकिस्तानी झंडा फहराने वाला एक आरोपी जेल भेजा गया, पुलिस महिला की तलाश में यह समाचार लगभग हर समाचार पत्र में छपा था। ये भी सत्य है कि देश ‘आज़ादी का अमृत महोत्सव’ मना रहा है, देश के प्रधानमंत्री के आह्वान पर ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत घर घर तिरंगा फहराया जा रहा है और सोशल मीडिया पर केवल और केवल तिरंगा छाया हुआ है। ऐसे में पाकिस्तानी झंडा फहराने की घटना होना, भले ही उत्तरप्रदेश की किसी छोटी गली में ही क्यों न हो, सोचने पर विवश करती है।

वर्ष 2021 में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 अगस्त को ‘विभाजन की विभीषका स्मृति दिवस’ के रूप में मनाने का आह्वान किया था। 14 अगस्त 1947 को पंथ (धर्म) के आधार पर भारत के टुकड़े किये गए थे। देश का यह विभाजन हिन्दुओं की मांग नहीं थी, बल्कि इस्लामवादियों की मांग थी। और यह विभाजन चुपचाप शांतिपूर्ण ढंग से नहीं हुआ था। भारत विभाजन के समय इस्लामवादियों के कुकृत्यों के किस्से हम आये दिन सुनते रहते हैं।

15 अगस्त 1947 से पहले 15 दिन देश में क्या हुआ था यह सटीक जानकारी लेने के लिए सुप्रसिद्ध लेखक प्रशांत पोल की पुस्तक ‘वे पंद्रह दिन’ जरूर पढ़ना चाहिए। ये वो दिन हैं जब देश को स्वतंत्रता दिलाने की बात करने वाली कांग्रेस के नेता पहले ही अपना बोरिया बिस्तर बांधकर दिल्ली भाग गए थे। विभाजन की विभीषका के समय केवल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उसके स्वयंसेवक अंतिम क्षण तक डटे रहे थे। कांग्रेसी चाहे जितना मर्जी मुँह चला लें, लेकिन ये सत्य है कि भारत विभाजन के समय केवल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मैदान में डटा हुआ था। प्रमाण के लिए ए. एन. बाली ली की पुस्तक नाउ इट कैन बी टोल्डपढ़नी चाहिए।

भारत का विभाजन मुस्लिम लीग और जिन्ना की कट्टरपंथी सोच और उद्देश्य का परिणाम था। जिसके आगे कांग्रेस, गाँधी, नेहरू सभी ने घुटने टेके थे। भारत विभाजन की विभीषिका पर बहुत कुछ लिखा और बोला गया है और लिखा तथा बोला जा सकता है। मेरा यह आलेख भविष्य में फिर से ‘दूसरा विभाजन की विभीषिका स्मृति दिवस’ न मनाना पड़े इस और संकेत करने पर आधारित है।

जो पाकिस्तानी झंडा उत्तरप्रदेश के कुशीनगर में फहराया गया है, वह किस बात का संकेत है? 14 अगस्त 1947 का भारत विभाजन एक मोहम्मद अली जिन्ना और मुस्लिम लीग के कारण हुआ था। लेकिन क्या आज के भारत में इस बात को नकारा जा सकता है कि आज हजारों जिन्ना इस देश में पैदा हो चुके हैं? क्या इस बात को नकारा जा सकता है कि सैंकड़ों मुस्लिम लीग इस देश में पनप चुके हैं? क्या देश ने कट्टर इस्लामिक गिरोह पीएफआई का विजन 2047 का दस्तावेज़ कुछ समय पहले नहीं देखा है?

इतिहास पर दृष्टि डालेंगे तो पता चलेगा सन 1923 में कांग्रेस के काकीनाडा अधिवेशन में गांधी की उपस्थिति में मुस्लिमों के नेता मोहम्मद अली जिन्ना ने ‘वन्दे मातरम’ गायन का विरोध किया था। अब प्रश्न उठता है क्या आज वन्दे मातरम गीत का विरोध मुस्लिम नेताओं और लोगों द्वारा नहीं किया जाता? वैसे तो भारत विभाजन के बीज बहुत पहले ही रोपित किये गए थे। फिर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की नींव रखने वाले सर सैयद अहमद खान के विचार कौन भूल सकता है? उन सबके के लिए भारत विभाजन कराने वाला जिन्ना ही सब कुछ था। ऐसे में बहुत से प्रश्न खड़े हो सकते हैं:

  • क्या ये सच नहीं है कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में आज भी जिन्ना की तस्वीर टंगी हुई है?
  • क्या देश इस बात को नकार सकता है कि पकिस्तान यदि गलती से भारत को खेलों में पराजित कर दे तो भारत देश में पटाखे नहीं फोड़े जाते?
  • क्या पाकिस्तान का झंडा भारत में फहराना और पाकिस्तान के लिए ख़ुशी मनाना भारत विभाजन कराने वाली मुस्लिम लीग की सोच नहीं है?
  • क्या देश इस बात को नकार सकता है कि वर्ष भर देश में जो आतंकवादी पकड़े जाते हैं उनका संबंध किसी न किसी रूप से पाकिस्तान या आईएसआईएस अथवा लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद जैसे इस्लामिक आतंकवादी संगठनों से नहीं होता है?
  • आखिर दुनिया भर में आतंक मचाने वाले इन आतंकवादी संगठनों का उद्देश्य क्या है ? क्या ये बात भारत के लोगों को बताने की आवश्यकता है?
  • आखिर इस पाकिस्तान प्रेम को क्या समझा जाए?
  • ऐसे में क्या फिर से भारत का विभाजन नहीं हो सकता इस बात को नकारने का देश के पास कोई कारण है?
  • क्या टुकड़े टुकड़े गैंग और ताली बजाकर आज़ादी लेने वाली गैंग इस देश में फल फूल रही है इस बात को देश नकार सकता है?
  • क्या इस बात को देश नकार सकता है कि इस देश में आज हजारों जिन्ना पैदा ही चुके हैं?
  • क्या इस देश का बुद्धिजीवी इस बात पर विचार करेगा कि ऐसा माहौल सन 1930 में नही बना था?
  • क्या देश इस बात को नकार सकता है कि जहाँ भी हिन्दू जनसंख्या कम हुई है उन अधिकांश क्षेत्रों को संवेदनशील‘ (सेंसिटिव) कहा जाता है?
  • क्या देश इस बात को नकार सकता है कि हिन्दू बहुल क्षेत्रों में जहाँ कुछ पुलिस वाले बिना किसी बबाल के चुनाव और अन्य कार्यक्रम सफल करा देते हैं, वहीं हिन्दू अल्प क्षेत्रों में बड़ी संख्या में फ़ोर्स लगानी पड़ती है?
  • क्या देश इस बात को नकार सकता है कि शुक्रवार का दिन कई जगहों पर ‘पत्थरबाजी दिवस’ बन चुका है? और पत्थर किस पर बरसाये जाते हैं? किसके घर, व्यवसाय लूटे जाते हैं? वो मंदिर किसके है जिनमें तोड़ फोड़ की जाती है?

ऐसे अनेक विकराल प्रश्न आज देश के सामने खड़े हैं जिनका उत्तर बिजली की गति से ढूँढना होगा। नहीं तो भारत में ऐसे भी क्षेत्र है जहाँ पुलिस और प्रशासन भी जाने की हिम्मत नहीं करता और इस बात को भी देश नकार नहीं सकता।

हर घर तिरंगा अभियान के तहत जहाँ हर तरफ तिरंगा फहराया जा रहा है वहीं ‘अशोक चक्र’ की जगह इस्लामिक चिन्ह लगे तिरंगे के वीडियो अभी हाल ही में वायरल हुए हैं। क्या इस तरह की घटनाओं को एक नए भारत विभाजन की तैयारी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए?

विभाजन की विभीषिका स्मृति दिवसमनाने का अर्थ जो मुझे समझ आता है वह यह है कि देश और खासकर हिन्दू समाज उस भयानक दृश्य को याद करे जो 14 अगस्त 1947 को घटित हुआ था। देश और हिन्दू समाज याद करे,”विभाजन की उस असहनीय पीड़ा को, देश और हिन्दू समाज याद करे उन लगभग डेढ करोड़ से ज्यादा भारतीयों को जिन्होंने इस पीड़ा को झेला था। देश और हिन्दू समाज याद करे उन लाखों हिन्दुओं को जो इस विभाजन के कारण असमय और अकारण मारे गए थे और जिनकी आत्मायें आज तक बिना श्राद्ध तर्पण के भटक रही हैं।  देश और हिन्दू समाज याद करें उन लाखों माता–बहनों को जिनकी गरिमा के साथ खिलवाड़ हुआ था। देश और हिन्दू समाज याद करे उन लाखों हिन्दुओं को जिनके घर – बार, आशियाने उजाड़ दिए गए थे, जिनको अपना सब छोड़कर भागना पड़ा था। 

क्या भारत देश और हिन्दू समाज इस बात को नकार सकता है कि विभाजन की विभीषिका के समय मारे गए उन अभागे हिन्दुओं की लाशों पर, हमारे माता- बहनों की करुण चीख पुकारों पर, उन अभागे हिन्दू शिशुओं की वीभत्स अकाल हत्याओं पर और उस समय के हमारे नेताओं की हठधर्मिता और तुष्टीकरण की राजनीतिक नपुंसकता पर हमारी स्वतंत्रता खड़ी हैं?

बिहार, झारखंड में शुक्रवार के दिन कई जगह स्कूलों में छुट्टी होना क्या भारत के संविंधान या न्याय व्यवस्था के अनुसार है या फिर इस्लामिक शरिया के अनुसार? इस प्रश्न का उत्तर कौन ढूंढेगा? और कौन देगा?

क्या देश इस बात को नकार सकता है कि आये दिन देश में हथियारों के बड़े बड़े जखीरे पकड़े जाते हैं और अधिकांश अपराधी इस्लामवादी होते हैं? आखिर इतने सारे हथियार क्यों इकट्ठे किये जा रहे हैं? स्वतंत्रता दिवस के अपने उदबोधन ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान के नारे में ‘जय अनुसंधान’ शब्द जोड़े, पर बंगाल में तो हर तीसरे दिन किसी न किसी के घर में बम फूटने के समाचार सुनने को मिलते हैं। आखिर इस बम फूटने के ‘अनुसंधान’ की और देश का ध्यान है कि नही?  क्या ये सब कहीं ‘पुराने जिन्ना’ के डायरेक्ट एक्शनके लिए ‘आधुनिक जिन्नाओं’ की तैयारी तो नहीं हैं?

देश के समक्ष बहुत सारी बाह्य चुनौतियां है लेकिन उतनी ही आंतरिक चुनौतियां भी है। क्या देश इस बात को नकार सकता है कि भारतीय सेना के पूर्व सेना अध्यक्ष ने कहा था कि भारत को ढाई मोर्चोंपर युद्ध लड़ना होगा? दो मोर्चे तो समझ आते हैं लेकिन ‘आधा मोर्चा’ कौन सा है? क्या देश इस बात को नकार सकता है कि देश में हिन्दुओं का जुलुस निकलने पर पत्थरबाजी होती है? क्या इस वर्ष हनुमान जयंती के दिन ऐसा नहीं हुआ है? अभी हाल ही में उत्तरप्रदेश में गौमाता को जहरीला चारा खिलाकर मारने वाला मुस्लिम समुदाय का व्यक्ति पकड़ा गया है। उसके दिए हुए जहरीले चारे से 60 से अधिक गायें मर गई। क्या देश इस बात से इनकार कर सकता है कि मुस्लिम बहुल इलाकों में हिन्दुओं के घरों पर लगे ‘यह घर बिकाऊ है’ ऐसे पोस्टर वायरल होते हैं? आखिर इस नफ़रत के पीछे क्या कारण है? ये देश और हिन्दू समाज को सोचना है।

’14 अगस्त अर्थात विभाजन की विभीषिका दिवस ऐसे विभाजनकारी प्रश्नों पर चिन्तन करने का दिवस है। भविष्य में भारत का विभाजन फिर से न हो यह संकल्प लेने और सतर्क रहकर एक भारत श्रेष्ठ भारतके लिए कैसे काम करना यह सोचने का दिवस है। और यह चिन्तन तब सम्भव होगा जब देश और हिन्दू समाज विभाजन के समय अकाल मारे गए निर्दोष हिन्दुओं की आत्मा की शांति के लिए सर्व पितृ अमावस्या के दिन श्राद्ध तर्पण करें और उन्हें श्रद्धांजलि दें।

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Dr. Mahender Thakur
डॉ. महेंद्र ठाकुर, हिमाचल प्रदेश आधारित फ्रीलांसर स्तंभकार हैं साथ ही कई बेस्टसेलर और सुप्रसिद्ध पुस्तकों के हिंदी अनुवादक भी हैं। इनका ट्विटर हैंडल @Mahender_Chem है।
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