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सर्वे: नींद में खलल, मासिक धर्म में ऐंठन और गंदे शौचालय हैं सबसे बड़ी चिंता

आज समाज डिजिटल, अंबाला:
भारत के जानेमाने नारी हाइजीन ब्रांड ऐेवरटीन ने अपने सालाना मेंस्ट्रूअल हाईजीन सर्वे 2022 में सामने आए तथ्यों को जारी किया। सर्वे 28 मई को मनाए जाने वाले वैश्विक मासिकधर्म स्वच्छता दिवस से पहले हर साल किया जाता है। ऐवरटीन मेंस्ट्रूअल हाईजीन डे 2022 के सहयोगियों में से एक है। इस आयोजन को यूनिसेफ, यूएनएफपीए, विश्व बैंक, फ्रांस के यूरोप और विदेश मामलों के मंत्रालय, जर्मन एजेंसी फॉर इंटरनेशनल कोआॅपरेशन, बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन ने समर्थन दिया है।

6000 महिलाओं ने लिया सर्वे में भाग

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7वें वार्षिक ऐवरटीन मेंस्ट्रूअल हाईजीन सर्वे में दिल्ली, मुंबई, बंग्लूरु, हैदराबाद, चेन्नई, पटना, अहमदाबाद, वड़ोदरा, सूरत, भोपाल, इंदौर, गुवाहाटी, जयपुर, अमृतसर, लुधियाना व कोलकाता समेत देश के 35 से अधिक शहरों की लगभग 6000 महिलाओं ने भाग लिया, जिनकी उम्र 18 से 35 वर्ष के बीच है। आधे से ज्यादा महिलाओं (53.2 प्रतिशत) ने बताया कि अपने पीरियड्स के पहले दो दिनों में वे ठीक से सो नहीं पाती हैं। 67.5 प्रतिशत महिलाओं को अब भी रात में नींद के दौरान दाग पड़ने की चिंता रहती है। 57.3 प्रतिशत महिलाओं ने माहवारी में मध्यम से लेकर तीव्र ऐंठन तक का अनुभव किया है, जबकि 37.2 प्रतिशत को पीरियड्स में हल्का या कभी-कभी दर्द होता है। 62.2 प्रतिशत महिलाओं ने बताया की उन्होंने किसी सार्वजनिक स्थल जैसे दफ्तर, मॉल या सिनेमा हॉल के टॉयलेट में सैनिटरी पैड कभी नहीं या शायद ही कभी बदला है।

पब्लिक टायलेट में पैड बदलना असहज

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74.6 प्रतिशत महिलाओं ने बताया कि अगर कभी पब्लिक टॉयलेट में उन्हें सैनिटरी पैड बदलना पड़े तो वे बहुत असहज अनुभव करती हैं। 88.3 प्रतिशत महिलाओं का मानना है की गंदे टॉयलेट यूटीआई का स्त्रोत हो सकते हैं। इस सर्वे से कुछ विचलित करने और चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं जो माहवारी शुरू होने की उम्र और पीरियड्स की अवधि के बारे में हैं। अधिकांश महिलाओं (79.3 प्रतिशत) ने बताया की 12 वर्ष या उससे अधिक की उम्र में उनको पहला पीरियड हुुआ था। 63.1 प्रतिशत ने बताया की वे ऐसी लड़कियों को जानती हैं जिन्हें हाल ही में मासिक धर्म शुरू हुआ है जिनमें से 37.5 प्रतिशत लड़कियों की आयु 11 वर्ष या इससे कम है। वास्तव में इस सर्वे में सामने आया है की लड़कियों को 8 वर्ष (3.2 प्रतिशत) और 9 वर्ष (4.8 प्रतिशत) की नाजुक उम्र में भी पहला मासिक धर्म हो रहा है।

ये सर्वे वो पांच दिन के वाक्यांश पर सवाल

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इस सर्वे के परिणामों ने वो पांच दिन के वाक्यांश पर भी सवाल खड़ा किया है क्योंकि एक तिहाई से भी कम (30.3 प्रतिशत) महिलाओें को 5 दिन की माहवारी होती है। 22.8 प्रतिशत महिलाएं ऐसी हैं जिन्हें तीन दिन या उससे कम दिनों के लिए पीरियड्स होते हैं जबकि 1.8 प्रतिशत महिलाओं की माहवारी हर महीने 8 या उससे ज्यादा दिनों तक चलती है। पैन हैल्थकेयर के सीईओ श्री चिराग पण कहते हैं, इस वर्ष का ऐवरटीन सर्वे स्पष्ट रूप से शोधकतार्ओं, उद्योग जगत और नीति निमार्ताओं के सामने वे पहलू रखता है जिनके लिए काम करना जरूरी है। माहवारी की असामान्यताओं के कारण व उनकी सीमा पर गहराई से अन्वेषण करने की आवश्यकता है, विशेषकर पहला पीरियड होने की आयु और मासिकधर्म की अवधि के बारे में। 2021 के ऐवरटीन सर्वे में 41 प्रतिशत महिलाओं ने कोविड काल में पीरियड्स के बीच अनियमित अंतर के बारे में बताया था, 28.8 प्रतिशत महिलाओें ने ज्यादा क्लॉटिंग की शिकायत की थी। हम चाहते हैं की सार्वजनिक टॉयलेट्स हेतु हाईजीन बेंचमार्क स्थापित करने व आडिट के लिए मैक्रो-इकॉनॉमिक नीतियों पर ज्यादा ध्यान दिया जाए ताकी महिलाएं संक्रमण के डर के बगै़र सैनिटरी पैड बदल सकें। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व ने भारत को ह्यखुले में शौच से मुक्तह्ण देश बनाने का मार्ग प्रशस्त किया है, तथा इस दिशा में स्वच्छ भारत अभियान को आगे बढ़ाया है और नैशनल अर्बन पॉलिसी फ्रेमवर्क को स्थापित किया है। उद्योग जगत के लिए यह जानने की काफी संभावनाएं हैं की बेहतर व अभिनव उत्पादों के जरिए पीरियड्स को कैसे बेहतर बनाया जाए।

38.9 फीसद महिलाओं को माहवारी में बाहर जाने से परहेज

इस सर्वे में सामने आई अन्य बातों में यह भी पाया गया की एक-तिहाई (69.7 प्रतिशत) महिलाओं ने पीरियड्स के दौरान मध्यम से भारी प्रवाह का अनुभव किया है तथा हर तीन घंटे में एक या ज्यादा पैड बदले हैं। 38.9 प्रतिशत महिलाएं अब भी माहवारी के दौरान बाहर जाने से परहेज करती हैं और जो बाहर जाती हैं उनकी सबसे बड़ी चिंताएं होती हैं- सैनिटरी पैड बदलना (32.2 प्रतिशत), माहवारी में ऐंठन (30 प्रतिशत) और दाग पड़ना (28.7 प्रतिशत); केवल 9 प्रतिशत महिलाओं ने माहवारी की गंध को चिंता का सबब बताया।

मासिक धर्म के प्रति बढ़ रही जागरूकता

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ऐवरटीन ब्रांड के उत्पाद बनाने वाली कंपनी वैट् एंड ड्राई पर्सनल केयर के सीईओ हरिओम त्यागी ने कहा कि साल दर साल हमारे सर्वे ने दिखाया कि मासिक धर्म के बारे में जागरूकता निरंतर बढ़ रही है और इसके बारे में वर्जनाएं टूट रही हैं। 2022 का ऐवरटीन मेंस्ट्रुअल हाईजीन सर्वे बहुत संभावनाशील खुलासे सामने लेकर आया है। 22.3 प्रतिशत महिलाएं नॉन-पीरियड दिनों में सफेद डिस्चार्ज से सुरक्षा के लिए पैंटी लाइनर इस्तेमाल कर रही हैं। यह बहुत खास तथ्य है क्योंकि इससे पता लगता है की भारतीय महिलाएं पुराने ढर्रे से बाहर आ रही हैं और संपूर्ण हाईजीन दृष्टिकोण को अपना रही हैं। एक देश के तौर पर अभी हमें बहुत लंबा फासला तय करना है। 23.5 प्रतिशत अनियमित माहवारी होने पर डॉक्टर और यहां तक की सहेलियों से भी सलाह नहीं करती हैं। 26.7 प्रतिशत महिलाएं सफेद डिस्चार्ज की रोकथाम के तरीके से अब भी अनजान हैं।

दुनिया में फैलाई जा रही जागरूकता

इसके माध्यम से दुनिया भर में जागरुकता फैलाई जाती है की मासिकधर्म की वजह से महिलाओं एवं औरतों को कितनी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है और फिर इन चुनौतियों के समाधानों पर प्रकाश डाला जाता है। आज, ऐवरटीन 35 से ज्यादा भिन्न इंटीमेट हाईजीन और वैलनेस उत्पाद पेश करता है जिनमें शामिल हैं- सैनिटरी पैड, मेंस्ट्रुअल कप, बिकिनी लाइन हेयर रिमूवर क्रीम, इंटीमेट वॉश, टॉयलेट सीट सैनिटाइजर, फर्टिलिटी व प्रेगनेंसी टैस्ट किट, फेमनिन सिरम आदि। अमेजन, फ्लिपकार्ट, नायका, पर्पल, स्नैपडील, पेटीएम आदि आॅनलाइन मार्केटप्लेसिस पर ऐवरटीन बैस्टसैलर है। इस ब्रांड के उत्पाद आॅस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, फ्रांस, हांगकांग, मलेशिया, ओमान, कतर, सउदी अरब, सिंगापुर, श्रीलंका, यूएस, यूके, वियतनाम तथा कई अफ्रीकी देशों जैसे घाना, कीनिया, नामीबिया, नाइजीरिया, दक्षिण अफ्रीका और यूगांडा में भी निर्यात किए जाते हैं।

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