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शादी की हर रस्‍म में बढ़ता थीम का चलन

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वर्तमान में शादी हो या पार्टी, हर तरह के आयोजनों में थीम और कलर का प्रचलन बढ़ता जा रहा है। जिसमें शादी के कार्ड से लेकर शादी में प्रयोग होने वाले हर तरह की चीज पर थीम का असर दिखता है। जहां एक ओर महंगी से महंगी मिठाई, फल और मेवों के डिब्बे दिखाई देते है वहीं ऐसे कार्ड भी दिखाई देते हैं जो ऊपर से कार्ड होते हैं, अंदर कई-कई परतों में खाने-पीने का सामान रखा रहता है। वहीं दूसरी ओर शादी में आने वाले लोगों को तरह-तरह के महंगे गिफ्ट भी दिये जाते हैं ।

इस तरह की शादियों की बात करें तो, इनमें एक शादी दक्षिण में थी जिस पर लगभग पांच सौ करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। दूसरी महाराष्ट्र में हुई, इसमें भी इतना पैसा खर्च हुआ कि हिसाब मुश्किल है। इस विवाह में तीस हजार मेहमान आए थे। शादी की सुरक्षा आकाश में मंडराते ड्रोन्स से की गई थी। ये दोनों शादियां भी एक तरह से थीम वेडिंग थीं। मेहमानों के आने-जाने और उन्हें महंगे तोहफे देने पर भारी रकम खर्च की गई।

ज्‍यादातर इस तरह की शादियों का चलन सबसे पहले बालीवुड ने लोकप्रिय किया, जिसे आम लोगों ने अपना लिया। शादी माने धूम धड़ाका ही नहीं, इतना खर्च जो कल्पना से परे हो। अकसर थीम वेडिंग बहुत महंगी होती हैं। यहां पैसे की चिंता नहीं होती। पैसे चाहे जितने खर्च हों, काम वह होना चाहिए जो सोचा गया। कई बार एक विवाह उत्सव सात-सात दिन तक चलता है। पुरखे बताते थे कि पुराने जमाने में बारातें तीन दिन तक वधू पक्ष के यहां ठहरती थीं। और पच फेनी यानि पांच व्यंजनों की दावत बहुत अच्छी मानी जाती थी। फिर एक समय ऐसा आया कि विवाह की रस्में कुछ ही घंटों में निपटने लगीं। बारात से लेकर विदाई तक सब कुछ जल्दी-जल्दी हो जाता था और भोर तक बारात दुल्हन समेत विदा हो जाती थी। लेकिन अब दोबारा ऐसा वक्त आ गया है जहां समाज के धनाढ्य लोग लड़के-लड़की की शादी के उत्सव कई-कई दिन तक आयोजित करते हैं। सभी रस्में एक से एक बड़े होटल में की जाती हैं। हर रस्म का भी कोई न कोई थीम और कलर होता है। कहीं भारतीय संगीत, तो कहीं पूरी तरह पश्चिमी नाच-गाने का इंतजाम।

वहीं यह भी देखा गया है कि इन शादियों में सजावट के फूल तक भी विदेशों से मंगाए जाते हैं। इसके अलावा व्यंजनों का तो कहना ही क्या। एक-एक शादी में परोसे जाने वाले व्यंजनों की संख्या सैकड़ों तक, इतनी चीजें कि देखकर ही पेट भर जाए। इसी तरह सैकड़ों किस्म के पेय, उम्दा किस्म की शराब और दिए जाने वाले गिफ्ट महंगे मोबाइल, गहनों, कारों, कपड़ों से लेकर ऐसे उपहार कि कोई गिनती ही नहीं। हवाई यात्रा की टिकटों से लेकर लग्जरी कारों और लग्जरी बसों की सुविधाएं भी। बारातें भी कभी रथों में आती हैं तो कभी हेलिकाप्टर से। दुल्हनें भी तरह-तरह से विदा होती हैं। अपनी शादी के अवसर पर अभिनेत्री रवीना टंडन सौ साल पुरानी पालकी में बैठकर विदा हुई थीं। इन सारे आयोजनों के लिए बड़ी-बड़ी इवेंट मैनेजमेंट कम्पनियां हरदम तैयार रहती हैं, वे भी करोड़ों वसूलती हैं।

पहले लोग पड़ोसी या अपने आसपास की नकल करते थे कि फलां ने अपने यहां वह बैंड मंगाया था हम भी वही मंगाएंगे। फलां ने अपनी लड़की को दस तोले सोना दिया था मैं बारह दूं। लेकिन अब सब पड़ोसियों के साथ-साथ टीवी पर और अखबारों में लाइफ स्टाइल्स सप्लीमेंट्स देखकर और बड़े लोगों के यहां होने वाली शादियों के बारे में पढ़कर, उसी तरह की शादी करना चाहते हैं। इस स्पर्धा के कारण अाम आदमी के लिए बेटी की शादी कितनी आफत की तरह आती है। समाजसेवी संगठन इन बातों पर चिंता प्रकट करते रहते हैं। लड़कियों को जन्म से पहले ही मार देने का कारण शादी के भारी-भरकम खर्चों से जोड़ा जाता है। मगर जिसके पास पैसे हैं, वह इस बारे में शायद ही कभी सोचता है।

एक तरफ समाज में बड़ी संख्या में शादियां टूट रही हैं । यहां तक कि बहुत बार हनीमून से लौटकर ही लोग तलाक के बारे में सोचने लगते हैं। लड़कियां कहती हैं कि जिस ड्रीम मैन के बारे में सोचा था, जिससे शादी हुई यह तो बिल्कुल भी वैसा नहीं। लड़के भी यही सोचते हैं और शादी टूटने की नौबत दो-चार महीने में ही आ जाती है। तलाक के मामलों का निपटान करने के लिए एक परिवार अदालत की जगह अब चार-चार लगानी पड़ रही हैं। दहेज का विरोध समाज में होता है, मगर जमीनी स्तर पर क्यों नहीं उतरता, आश्चर्य होता है। जितना विरोध बढ़ा उतना ही दिखावा बढ़ा है। बड़ी संख्या में शहर दर शहर होने वाले ब्राइडल मेले शादी के समय को मुनाफा कमाने के रूप में देखते हैं। ये भी थीम वेडिंग्स के भारी समर्थक माने जाते हैं।

अक्‍कसर देखा जा रहा है कि शादियों में खाना इतना ज्यादा खराब होता है जिससे लाखों गरीबों का पेट भरा जा सकता है। पहले शादियों में सिर्फ खाना परोसा जाता था। अब तो चाट-पकौड़ी से लेकर स्नैक्स और विभिन्न देशों के खाने कहीं थाई, कहीं चाइनीज, कहीं इटैलियन तो कहीं मुगलई। इस बर्बादी को रोकने के लिए बहुत से एनजीओ शादी के आयोजकों से अनुरोध करते हैं कि बचा हुआ खाना फेंका न जाए, उन्हें दे दिया जाए जिससे कि गरीब लोगों का पेट भरा जा सके। शादियों का मंहगे होने का मुख्‍य कारण है कि इवेंट मैनेजमेंट और थीम वेडिंग के लिए कंपनियों को बुलाया जाने लगा है, जिससे शादियां महंगी होती जा रही हैं।

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