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टोक्यो ओलिंपिक : सेमीफाइनल मुकाबले में भारतीय हाकी का टूटा गोल्ड का सपना, मेडल की उम्मीद अब भी बरकरार

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नई दिल्ली।  टोक्यो ओलिंपिक 2020 में मंगलवार को भारत और बेल्जियम के बीच खेले गए सेमीफाइनल मुकाबले में बेल्जियम ने भारत को 5-2 से हार दिया। अंतिम 11 मिनट के अंदर तीन गोल गंवाने के कारण हार गई और फाइनल की रेस से बाहर हो गई। इसी के साथ भारत का 41 साल बाद गोल्ड मेडल जीतने का सपना भी टूट गया। हालांकि भारत अब भी पदक की रेस से बाहर नहीं हुआ है। उनके पास अब भी ब्रॉन्ज मेडल जीतने का एक मौका है। अब वह आॅस्ट्रेलिया और जर्मनी के बीच होने वाले दूसरे सेमीफाइनल में पराजित होने वाली टीम से ब्रॉन्ज मेडल के लिये भिड़ेगी। दरअसल भारतीय टीम एक समय बढ़त पर थी लेकिन अंतिम 11 मिनट में तीन गोल गंवाने और अलेक्सांद्र हैंड्रिक्स (19वें, 49वें और 53वें मिनट) की हैट्रिक उस पर भारी पड़ गयी। विश्व चैंपियन बेल्जियम की तरफ से हैंड्रिक्स के अलावा लोइक फैनी लयपर्ट (दूसरे) और जॉन जॉन डोहमेन (60वें मिनट) ने भी गोल किये। भारत की तरफ से हरमनप्रीत सिंह ने सातवें और मनदीप सिंह ने आठवें मिनट में गोल किये थे। बेल्जियम रियो ओलंपिक का रजत पदक विजेता है और उसने इस तरह से लगातार दूसरी बार ओलंपिक फाइनल में जगह बनायी है जहां उसका सामना आस्ट्रेलिया और जर्मनी के बीच दूसरे सेमीफाइनल के विजेता से होगा।

भारत ने आखिरी बार मास्को ओलंपिक 1980 में फाइनल में जगह बनायी थी और तब टीम ने अपने आठ स्वर्ण पदकों में से आखिरी स्वर्ण पदक जीता था। सेमीफाइनल में हार के लिये भारतीय टीम ही दोषी रही क्योंकि बेल्जियम ने चार गोल पेनल्टी कार्नर पर किये। विश्व चैंपियन टीम ने भारतीय रक्षापंक्ति पर लगातार दबाव बनाये रखा और 14 पेनल्टी कार्नर हासिल किये जिनमें से चार को उसने गोल में बदला। बेल्जियम की शुरू से ही रणनीति स्पष्ट थी कि भारतीय सर्कल में घुसकर पेनल्टी कार्नर हासिल करना है क्योंकि उसके पास हैंड्रिक्स और लयपर्ट के रूप में दो पेनल्टी कार्नर विशेषज्ञ हैं। उन्होंने अपनी इस रणनीति पर अच्छी तरह से अमल किया तथा हैंड्रिक्स और लयपर्ट ने भी उन्हें निराश नहीं किया। भारत ने भी पांच पेनल्टी कार्नर हासिल किये लेकिन इनमें से वह केवल एक पर ही गोल कर पाया। भारतीय टीम 49 वर्ष बाद ओलंपिक के सेमीफाइनल में पहुंची थी। उसके पास अब भी कांस्य पदक जीतने का मौका है जिसके लिये वह गुरुवार को आस्ट्रेलिया या जर्मनी से भिड़ेगी। भारत ने आखिरी बार मास्को ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीता था लेकिन वह म्यूनिख ओलंपिक 1972 के बाद पहली बार सेमीफाइनल में पहुंचा था। मास्को ओलंपिक में मैच राउंड रोबिन आधार पर खेले गये थे।

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