नई दिल्ली।राजस्थान के पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट अपने बिछाए जाल में खुद ही फंस गए हैं।मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने उनका राजस्थान का नीतीश कुमार बनने का सपना तोड़ दिया ।सूत्रों के अनुसार प्रदेश भाजपा भी इस षडयन्त्र के कामयाब न होने से खुश है।हालांकि सचिन को पर्दें के पीछे से बीजेपी का ही साथ मिल रहा है।सूत्रों का कहना है उनकी मदद से ही सचिन ने विधायकों को होटलो में ठहराया हुआ है।और गुरुवार को कोर्ट में जाने की रणनीति बनाने में भी वहीं से मदद मिली।पूर्व कांग्रेसी नेता नटवर सिंह के मामले को ध्यान में रख सचिन पायलट रणनीति के तहत खुद न तो कांग्रेस के खिलाफ और न ही गहलोत सरकार के खिलाफ बोल रहे हैं।कांग्रेस न छोड़ने वाला बयान भी  रणनीति का हिस्सा  है।जिससे कि पार्टी उनकी विधानसभा की सदस्य्ता को निरस्त करने में कामयाब न हो पाए।कांग्रेस न छोड़ने की बात कर मीडिया के माध्य्म से वह पूरी सहानुभूति बटोरने में सफल भी हो रहे हैं।मीडिया भी उनके मन मुताबिक बयान सूत्रों से जारी कर मदद कर रहा है।गत बुधवार को राहुल गांधी का एक बयान सूत्रों से जारी कराया गया जिसमें कहा गया कि राहुल ने मुख्यमंत्री को सचिन के प्रति नरम रुख अपनाने ओर उनकी वापसी की बात की।किसी को नही पता यह बयान कहां से आया।पिछले तीन दिन में मीडिया ने ही सोनिया,राहुल और प्रियंका को लेकर ऐसे बयान जारी किये जिसमे यही सन्देश दिया गया तीनो नेता सचिन के प्रति नरम रुख अपनाए हुये है।पार्टी के कई नेताओं ने भी सहानुभति उपजाने में कोई कमी नही रखी।गहलोत को कमजोर करने का प्रयास किया गया।
   जबकि मुख्यमंत्री गहलोत पहले दिन से कह रहे हैं कि उनकी सरकार को बीजेपी खरीद फरोख्त कर गिराने का षडयंत्र कर रही थी।उसमें हमारे नेता शामिल थे।कल गहलोत ने सीधे सचिन पायलट पर बीजेपी के साथ षडयन्त्र कर सरकार गिराने का आरोप लगाया।20 -20 करोड़ तक के ऑफर ओर सबूत होने तक की बात की।उसके बाद भी सहानुभूति बटोरने की कोशिश की गई।एक बार के लिये यह माहौल बनाया गया कि सचिन वापसी कर सकता है गहलोत नरम रुख अपनाए।मतलब सचिन के प्रति मीडिया सहानुभूति बनाने में लगा था।पर आज जिस तरह सचिन गुट कोर्ट में पहुचा साबित हो गया कि बीजेपी पीछे से सहयोग कर रही है।सचिन हर हाल में सरकार को बनाये रखने के पक्ष में नही है।उन्होंने आज कोर्ट में पहुँच अपने गुट के विधायकों की वेचेनी को शांत करने की कोशिश की।कहा जा रहा है कि अधिकांश विधायक विधायकी जाने की डर से बेचैन हैं और वापसी का रास्ता तलाश रहे हैं।क्योंकि जो योजना बनी थी वह फेल हो गई।किसी प्रकार की मदद कहीं से मिलने के आसार नही लग रहे हैं।
  सूत्रों के अनुसार योजना बहुत दिलचस्प थी ।दो फार्मूलों पर काम हुआ था।पहला फार्मूला था कि 30 से 32 विधायक मप्र की तर्ज पर बहला फुसलाकर लाये जाएंगे।उन्हें कुछ न बताया जाए।फिर सरकार गिरने के बाद बीजेपी सरकार बनायेगी।अधिकांश को महत्वपूर्ण मंत्रालय दिए जायँगे।उप चुनाव होने पर सब को जितवाया जायेगा।सचिन को केंद्र में टॉप 5 मंत्रालय में से एक मंत्रालय दिया जाता।यह सब राज्यसभा चुनाव से पहले होना था।जिससे बीजेपी राज्यसभा की दूसरी सीट भी जीत जाती।लेकिन जब तक मामले को अंजाम दिया जाता मुख्यमंत्री गहलोत ने मामले का पटाक्षेप कर दिया।सारी योजना धरी रह गई।आलाकमान को मामले की सबूतों के साथ जानकारी दी गई।रणनीति बनाई गई चुनाव तक शांत रहा जाए।सूत्रों का कहना है राहुल गांधी ने सचिन पायलट को बुला हिदायत दी और प्रदेश अध्य्क्ष पद छोड़ने को कहा।सोनिया गांधी ने नए प्रदेश अध्य्क्ष के लिये नाम को हरी झंडी भी दे दी थी।लेकिन राज्यसभा का चुनाव समाप्त होने के बाद जब प्रदेश अध्य्क्ष पद छोड़ने को कहा गया।सचिन नही माने।फिर टकराव शुरू हो गया।गहलोत ओर सजग हो गए।उन्हें पहले ही जनकारी मिल गई थी कि कई विधायको ने बीजेपी में जाने से मना कर दिया ।उन्होंने अपनी तरफ से नजर रखनी शरू कर दी।लेकिन फिर भी सरकार गिराने की कोशिश जारी रखी गई।  सचिन की तरफ से नई योजना बनी इस बार 32 से भी ज्यादा विधायको को तोड़ा जायेगा।नया रीजनल दल बना बिहार की तर्ज पर बीजेपी गठबंधन करेगी।सचिन मुख्यमंत्री बनते।लेकिन आपरेशन से पूर्व  एसओजी ने अपना काम कर दिया।तोड़फोड़ लगे लोगो के खिलाफ मुकदमे दर्ज हो गए।आनन फानन में उतने विधायक गुरुग्राम नही पहुंचे जितने की उम्मीद थी।यही मामला गड़बड़ा गया।बीजेपी भी पीछे हट गई।बीजेपी को यही भरोसा दिया गया है कि सदन में सरकार बहुमत साबित नही कर पायेगी।लेकिन मुख्यमंत्री गहलोत ने अपनी राजनीतिक सूझबूझ से बहुमत से ज्यादा विधायको को अपने पक्ष में कर सचिन खेमे में हलचल मचा दी।सदन में बहुमत साबित होने से पहले ही बागी विधायकों पर सदस्यता बचाने का संकट आ गया।जानकारों की माने तो जिन जिन विधायको ने बयान दिए या जारी किए वह उनकी सदस्य्ता समाप्त करने के लिये पर्याप्त सबूत है।क्योंकि नटवर सिंह ने भी कांग्रेस के सांसद रहते वोल्कर मामले के समय पार्टी के खिलाफ बयान दिए।जिन्हें आधार बना कांग्रेस ने सभापति से उनकी सदस्य्ता समाप्त करने का आग्रह किया था।सभापति जब तक एक्शन लेते उन्होंने खुद इस्तीफा दे दिया था।पर उन तथ्यों को माना गया था।रहा सवाल सचिन का तो सूत्रों का कहना बीते सात माह में सरकार ने पर्याप्त सबूत एकत्रित किये हैं जिनको आधार बना उनकी सदस्य्ता समाप्त हो सकती है।