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दिमागी कसरत से दूर हो सकता डिस्लेक्सिया

दिमाग को लगातार प्रशिक्षित करके पढ़ने, लिखने या बोलने से संबंधित विकार डिस्लेक्सिया से काफी कुछ बचा जा सकता है। एक अध्ययन में सामने आया है कि मस्तिष्क के उन हिस्सों का लगातार प्रशिक्षण बेहद जरूरी है, जो लिखने, पढ़ने या बोलने की क्रिया के लिए जिम्मेदार होते हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि बोलने में परेशानी अनुभव करने वाले डिस्लेक्सिया के मरीजों के लिए ध्वनि और मस्तिष्क के बीच तारतम्य बनाना बेहद जरूरी होता है।

स्पेन स्थित बास्क सेंटर ऑन कॉग्निशन, ब्रेन एंड लैंग्वेज (बीसीबीएल) के शोधकर्ताओं ने 72 से अधिक डिस्लेक्सिया पीड़ितों के आंकड़ों के अध्ययन के बाद यह निष्कर्ष निकाला है। प्रमुख शोधकर्ता निकोला मोलिनारो का कहना है कि भाषा को समझने और उसे बोलने के लिए मस्तिष्क को प्रशिक्षित करने वाले हिस्से का ध्वनि के साथ सामंजस्य होना बेहद जरूरी है।

शोध में पता चला है कि समकालीन होने पर मस्तिष्क के भाषा से संबंधित हिस्से अधिक संवेदनशील हो जाते हैं। उन्हें प्रतिक्रिया करने में समय नहीं लगता। इस हिस्से को ब्रोका कहते हैं और यह मस्तिष्क के सामने की ओर बायीं तरफ होता है।

उल्‍लेखनीय है कि डिस्लेक्सिया पढ़ने लिखने से जुड़ी एक एक ख़ास विकलांगता है जिसका असर पड़ने और भाषा को समझने और बरतने पर पड़ता है. डिस्लेक्सिया से पीड़ित बच्चों को पढ़ने, लिखने, स्पेलिंग लिखने या बोलने में कठिनाई होती है. ये कुछ कौशलों और योग्यताओं को प्रभावित कर सकती है. लेकिन बच्चे की बौद्धिकता के सामान्य स्तर से इसका कोई लेनादेना नहीं है.

इसकी गंभीरता हर बच्चे में अलग हो सकती है. कुछ बच्चों को पढ़ने और लिखने में कठिनाई आ सकती है, कुछ नये शब्द और अर्थ नहीं सीख पाते हैं, और कुछ ऐसे हैं जिन्हें व्याकरण या नई भाषा से समस्या आती है. भाषा को समझने में इस कठिनाई की वजह से, बच्चा पढ़ाईलिखाई में पिछड़ सकता है. डिस्लेक्सिया कई और किस्म की सीखने से जुड़ी विकलांगताओं, एडीएचडी. या ऑटिज़्म के साथ दिख सकती है.

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