Be careful on social media: सोशल मीडिया के एडमिन रहें सावधान

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अंबाला। तकनीक का स्वरूप जैसे जैसे बदल रहा है, चुनाव का स्वरूप भी बदल रहा है। पिछले पांच छह साल में भारत में इंटरनेट की सुलभता ने यहां चुनाव कैंपेन का मोड भी बदल दिया है। साल 2019 में हो रहे चुनाव में कैंपेन का पूरा फोकस सोशल पर ही है। ऐसे में यहां तमाम ऐसी सूचनाओं का अंबार है जिन्हें जज कर पाना कठिन है। अब चुनाव आयोग ने भी सोशल मीडिया से निपटने के लिए एक अलग तरह की प्लानिंग की है। आने वाले दिनों में सबसे अधिक दिक्कत किसी ग्रुप के एडमिन को होने वाली है। ऐसे में एडमिन को सावधान रहने की जरूरत है।
चुनावी महासमर के साथ सोशल मीडिया पर भी समर्थकों के बीच जंग छिड़ चुकी है। इस जंग पर आयोग ने अपनी तीसरी नजर गड़ा दी है। अब उन लोगों की खैर नहीं जो किसी खास दल को जिताने, धर्म, भाषा संबंधी भड़काऊ भाषण जैसी पोस्ट डालकर चुनाव प्रभावित करने की कोशिश करते हैं। ऐसी पोस्ट पर फेसबुक और व्हाट्स ग्रुप के एडमिन और ट्वीटर यूजर के खिलाफ आचार संहिता के उल्लंघन का मुकदमा दर्ज किया जाएगा। निर्वाचन आयोग की एक सेल भी इस पर निगाह बनाए हुए है। इसके साथ ही आदर्श आचार संहिता का पालन कराने वाली टीम भी निगरानी कर रही है। ऐसी पोस्ट वायरल होने पर ग्रुप, पेज एडमिन, अकाउंट होल्डर के खिलाफ आचार संहिता के उल्लंघन का मुकदमा दर्ज किया जाएगा।

-2014 चुनाव में बढ़ा उपयोग
2014 लोस चुनाव में सोशल मीडिया फेसबुक, व्हॉटसएप, ट्वीटर पर जबरदस्त प्रचार-प्रसार किया गया। 2019 के लोकसभा चुनाव में भी करीब 91 करोड़ वोटरों में 75-80 करोड़ वोटरों का सोशल मीडिया पर अकाउंट होने का अनुमान है। इसी के मद्देनजर सभी राजनीतिक दल सोशल मीडिया पर प्रचार-प्रसार में जुट गए हैं। बाकायदा आईटी सेल बनाकर सोशल मीडिया पर प्रचार किया जा रहा है। इस प्रचार के दौरान दल एक दूसरे पर कीचड़ उछालने, चुनाव जीतने का दावा, उम्मीदवार को जीता हुआ दशार्ना, धर्म भाषा संबंधी भड़काऊ पोस्ट भी इधर से उधर वायरल हो रही हैं। ताकि वोटों का ध्रुवीकरण हो सके। लेकिन निर्वाचन आयोग की सख्ती के बाद अब ऐसा करना आसान नहीं होगा।
एक नजर
व्हाट्स एप पर करीब 200 मिलियन यूजर हैं।
फेसबुक पर 300 मिलियन यूजर फेसबुक हैं।
ट्वीटर पर 34.4 मिलियन यूजर मौजूद हैं।

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