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ममता की कोशिशों से कांग्रेस उत्साहित नहीं

-प्रशांत लगे हैं राहुल-प्रियंका के साथ जुड़ने के जुगाड़ में
अजीत मैंदोला
नई दिल्ली।पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की विपक्ष को एक करने की कोशिशों से गांधी परिवार बहुत उत्साहित नही बताया जाता है।सूत्रों की माने तो कांग्रेस विपक्ष को एक करने की कोशिशों को अपने खिलाफ मान रही है।बंगाल चुनाव के बाद ममता बनर्जी जिस तरह से अपने को केंद्र की राजनीति में आगे रखने की कोशिश कर रही है उससे कांग्रेस चिन्तित है।हालांकि ममता बनर्जी विपक्ष को एक करने की कोशिश 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले भी कर चुकी है।तब उन्हें कोई सफलता नही मिली थी। इस बार वह दल के नेताओं से सम्पर्क कर पहले मूड भांपने की कोशिश कर रही है।
इस काम मे प्रशांत किशोर उनकी मदद करते दिख रहे हैं।कांग्रेस की परेशानी यह है कि वह 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद से लगातार और कमजोर हुई है।यूपीए पर भी इसका असर पड़ा है।हालांकि साथ किसी ने नही छोड़ा ,लेकिन नए सहयोगी शिवसेना और पुराने घटक दल राकांपा के नेता नया  गठबंधन और नया नेता बनाने की बात कर कांग्रेस को असहज करते रहते हैं।इसी बात से कांग्रेस परेशान है। गांधी परिवार यूपीए का नेतृत्व किसी कीमत पर नही छोड़ने जा रहा है।लेकिन घटती ताकत ने गांधी परिवार के सामने बड़ी चुनोतियाँ खड़ी कर दी हैं।अभी तक अंतरिम अध्य्क्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी ही फैसले करते थे,लेकिन अब प्रियंका गांधी का भी सीधा दखल हो गया है।यूं कहा जा सकता है कि कांग्रेस के सभी फैसले अब गांधी परिवार ही बैठ कर करता है।
प्रियंका गांधी अभी तक अपना असर नही छोड़ पाई हैं।यूपी में कांग्रेस अपनी कमजोर स्थिति में ही है।पंजाब में प्रियंका द्वारा नवजोत सिंह सिद्दू को आगे करना कांग्रेसियों को रास नही आया।अब ऐसे कांग्रेसियों को प्रशांत किशोर की भी चिंता सताने लगी है।अभी तक अंसन्तुष्ठ ग्रुप 23 के नेता ही पार्टी के फैसलों से चिंतित थे,लेकिन प्रशांत किशोर के कांग्रेस में शामिल होने की खबरों ने राहुल के करीबी युवा नेताओं की टीम की नींद उड़ी हुई है।क्योंकि उनमें से कई नेता राहुल का राजनीतिक सलाहकार बनने की उम्मीद लगाए हुये हैं।ऐसे में प्रशांत किशोर को गांधी परिवार ने पार्टी में इंट्री दे दी तो वह फिर सब पर भारी पड़ेंगे।तीन पावर सेंटर के साथ चौथा पावर सेंटर प्रशांत किशोर का बनना तय है।
  हालांकि इन हालात प्रशांत किशोर का कांग्रेस में शामिल होना बहुत आसान नही है।क्योंकि पार्टी का बहुत बड़ा धड़ा जिसमे नए पुराने सभी कांग्रेसी शामिल हैं प्रशांत के खिलाफ हैं।2017 में भी वरिष्ठ नेता प्रशांत को यूपी के लिये सलाहकार बनाने से नाराज हुए थे। प्रियंका गांधी ही यूपी में प्रशांत किशोर को लाई थी।बंगाल में टीएमसी की जीत में अहम भूमिका निभाने वाले प्रशांत किशोर कांग्रेस में इंट्री की कोशिश के लिये पिछले साल से लगे हुये हैं।पंजाब में वह मुख्यमंत्री अमरेंद्र सिंह की मदद कर रहे हैं।पिछले दिनों राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से हुई मुलाकात के बाद प्रशांत किशोर सुर्खियों में आये।हालांकि उनकी इस मुलाकात को विपक्ष को एक करने की रणनीति से जोड़ा गया।लेकिन ममता बनर्जी के दिल्ली दौरे के बाद प्रशांत की कांग्रेस में शामिल होने की चर्चा फिर गर्मा गई।प्रशांत अपनी खबरे प्लांट कराने भी माहिर माने जाते हैं।उन्होंने अपनी चर्चा तब गर्माई जब ममता दिल्ली में थी। ममता बनर्जी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ विपक्ष को एक करने की जो कोशिश कर रही हैं उसके पीछे इस बार प्रशांत का ही दिमाग माना जा रहा है। ममता की तरफ से विपक्ष को एक करने की जो कोशिश की जा रही उसमें कांग्रेस कहीं ना कहीं अलग थलग पड़ती दिख रही है।ममता ने नेता के सवाल पर जो जवाब दिया उसका संकेत यही था कि कोई भी हो सकता है ।कोशिश यह है कि जो दल जिस प्रदेश में मजबूत है उसे सभी समर्थन दें।ममता बनर्जी का ऐसा करना खुद के लिये तो फायदे मंद है।लेकिन इसे कांग्रेस  स्वीकारेगी ही नही।क्योंकि उत्तर भारत मे ममता बनर्जी का कोई जनाधार नही है।ख़ास तोर पर हिंदी भाषी प्रदेशों में।उनके नाम पर विपक्ष को वोट भी नही मिलने वाला है।यही नही शिवसेना ओर राकांपा का भी उत्तर भारत में कोई जनाधार नही है।हिदी भाषी राज्यों में बीजेपी,कांग्रेस या क्षेत्रीय दलों का बोलबाला है।अगले साल यूपी,गुजरात,हिमाचल और उत्तराखण्ड समेत जिन सात राज्यो में चुनाव है उनमें ममता,शरद पंवार ओर उद्दव ठाकरे के नाम पर कोई वोट नही है।कांग्रेस हर जगह मुकाबले में है।ऐसे कांग्रेस ममता,शरद पंवार या उद्धव ठाकरे का नेतृत्व क्यों स्वीकारेगी।अब ऐसे में समझा जा रहा कि  प्रशांत किशोर विपक्ष को एक करने की रणनीति बना कांग्रेस पर अपने लिये दबाव बना रहे हैं।जानकार मान रहे हैं कि गांधी परिवार दबाव में आ कर प्रशांत को कांग्रेस में शामिल कर  सकता है।फिर प्रशांत राहुल प्रियंका को यह समझा सकते हैं कि कांग्रेस की अगुवाई में वह प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ विपक्ष का फ्रंट बना सकता हूँ।प्रियंका ने यूपी में गठबंधन की बात कर पहले ही हाथ खड़े कर दिए हैं।प्रशान्त की रणनीति को देख यही लग रहा है कि वह दोतरफा खेल रहे हैं ममता को  भरोसे में ले कांग्रेस से तार जोड़ने के जुगाड़ में लगे हैं।प्रशांत जानते हैं कि कांग्रेस के बिना मोदी के खिलाफ किसी भी गठबंधन का कोई मतलब नही है।समाप्त
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