चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। पहले पूर्वी लद्दाख में सीनाजोरी की जिस पर अभी भी वार्ता चल रही है। विवाद और तनाव को कम करने का प्रयास हो रहा है। अब चीन की पीपल्स लिब्रेशन आॅर्मी की एक बटालियन को उत्तराखंड में लिपुलेख के पास तैनात किया है। मामले के जानकारों का कहना है कि इस स्थान पर चीनी सैनिकों की आवाजाही कुछ समय से दिख रही थी। बता दें कि पूर्वी लद्दाख में चीन और भारत के बीच में मई महीने में तनाव की शुरूआत हुई। यह तनाव 15 जून को हिंसक झड़प में तबदील हो गया। इस हिंसक झड़प में बीस भारतीय सैनिक शहीद हो गए। सूत्रों के अनुसार चीन के भी कई सैनिक इसमें हताहत हुए थे जिसका खुलासा चीन ने नहीं किया था। गौरतलब है कि चीन और भारत के बीच पिछले 45 साल में पहली बार दोनों देशों के सैनिकों में इस तरह खूनी झड़प हुई। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच बातचीत के बाद दोनों देश सैनिकों को पीछे हटाकर तनाव कम करने पर सहमत हुए। बता दें कि चीन की ओर से यह दावा किया गया कि एलएसी पर पीछे हटने की प्रक्रिया पूरी हो गई है। जबकि भारत नेइसका खंडन किया और कहा कि सैनिकों केपीछे हटने की प्रक्रिया की शुरूआत जरूर हुई है, लेकिन काम अभी पूरा नहीं हुआ है। लद्दाख मेंभारतीय सेना के अधिकारियों ने नोटिस किया कि चीन पिछले इलाकों में अपने सैनिकों की संख्या बढ़ा रहा है। वे इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के साथ ही एलएसी पर अन्य स्थानों पर भी अपनी मौजूदी बढ़ा रहे हैं। सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार ‘लिपुलेख पास, उत्तरी सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों मेंएलएसी पर चीनी सैनिकों की तैनाती है। दरअसल चीन के प्रभाव में इन दिनों नेपाल भारत के हिस्से लिपुलेख को अपना बता रहा है। लिपुलेख पास मानसरोवर यात्रा मार्ग पर है। भारत नेयहांअस्सी किलोमीटर की सड़क बनाई है। जिस पर नेपाल ने आपत्ति जताई है। लिपुलेख पास के जरिए एलएसी के आरपार रहने वाले भारत और चीन के आदिवासी जून-अक्टूबर के दौरान वस्तु व्यापार करते हैं।

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