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राहत के शेर पढ़ने की शैली की सैकड़ों शायर करते थे नकल

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इंदौर।  मशहूर शायर राहत इंदौरी ने कभी भी फिल्मी दुनिया में जमने और बसने के लिए जद्दोजहद नहीं की। राहत इंदौरी ने कभी भी फिल्मी दुनिया  मुशायरे के बाद अगर उनको किसी से सबसे ज्यादा लगाव था तो वो है उनका अपना शहर इंदौर। महेश भट्ट की ‘सर’ उनकी पहली फिल्म थी। ‘मुन्नाभाई एमबीबीएस’ जैसी फिल्म में हिट गाने लिखने वाले राहत इंदौरी को फिल्मी दुनिया कभी भी पूरी तरह से इस्तेमाल ही नहीं कर पाई। उनकी कुछ शुरुआती फिल्मों पर नाकामी का ठप्पा लगा था। अपने लिए लिखकर मुशायरे में अपने लिए शेर पढ़ना किसी भी शायर के लिए ज्यादा तसल्ली देने वाला होता है। फिर राहत ने तो मुशायरे में शेर पढ़ने की अपनी एक शैली विकसित की थी, जिसकी नकल जाने-अनजाने सैकड़ों शायर करते हैं। जब वो डूबकर अपने शेर पढ़ते थे तो हजारों लोगों का मजमा दीवाना-सा हो उठता था। जिन लोगों ने ये सब अपनी आंखों से देखा है, वो तो यही कहेंगे कि राहत की असल जगह फिल्मी संगीतकार का दरबार नहीं मुशायरे का मंच था। मगर अफसोस कि कोरोना काल में एक और सितारा इस दुनिया को छोड़कर चला गया है। बता दें कि राहत इंदौरी ने खुद ट्वीट कर अपने कोरोना से संक्रमित होने की जानकारी दी थी।

मुफलिसी में गुजरा राहत साहब का बचपन
राहत साहब के वालिद रिफअत उल्लाह 1942 में सोनकछ देवास जिले से इंदौर आए थे। राहत साहब का बचपन का नाम कामिल था। बाद में इनका नाम बदलकर राहत उल्लाह कर दिया गया। वालिद ने इंदौर आने के बाद आॅटो चलाया। मिल में काम किया, लेकिन उन दिनों आर्थिक मंदी का दौर चल रहा था। 1939 से 1945 तक दूसरे विश्वयुद्ध का भारत पर भी असर पड़ा। मिलें बंद हो गईं या वहां छंटनी करनी पड़ी। राहत साहब के वालिद की नौकरी भी चली गई। हालात इतने खराब हो गए कि राहत साहब के परिवार को बेघर होना पड़ गया था।

शायरी ही नहीं फिल्मों में भी गीत लिखे
राहत इंदौरी साहब ने बरकतुल्लाह यूनिवर्सिटी से उर्दू में एमए किया था। भोज यूनिवर्सिटी ने उन्हें उर्दू साहित्य में पीएचडी से नवाजा था। राहत ने मुन्ना भाई एमबीबीएस, मीनाक्षी, खुद्दार, नाराज, मर्डर, मिशन कश्मीर, करीब, बेगम जान, घातक, इश्क, जानम, सर, आशियां और मैं तेरा आशिक जैसी फिल्मों में गीत भी लिखे।

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