सुशांत से 24 मई को दिशा ने किया था व्हाट्सअप चैट

ज़िन्दगी और मौत के बीच 2 घण्टे तक तड़फती रही दिशा
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3 अस्पताल घूमने के बाद दिशा को शताब्दी हॉस्पिटल में एडमिशन मिला
अभिषेक शर्मा
मुंबई । सुशांत सिंह राजपूत मौत का मामला जिस तरीक़े से तूल पकड़ा है ठीक उसी तरीक़े से दिशा सालियन की मौत पर बड़े बड़े सवाल खड़े होने लगे हैं। चौतरफ़ा अब मुंबई पुलिस पर हमला होने लगा है की ठीक तरीक़े से जाँच नहीं किया पुलिस ने। क्योंकि ऐसा बड़ा आरोप लगता जा रहा है की दिशा और सुशांत की मौत में कुछ तो कनेक्शन है। इस बीच हमारे हाथ लगे हैं दिशा सालियन की मौत को लेकर कई अहम सबूत।
  जिस ऐम्ब्युलन्स वाले को बुलाया गया था की वह दिशा को तड़पती हालत में हॉस्पिटल के जाने के लिए लेकिन उसके आने के पहले ही लोगों ने कार में दिशा को हॉस्पिटल के लिए लेकर निकल पड़े। और दिशा को तो लोग कार से तो ले गए ताकि उसका जल्दी ट्रीटमेंट शुरू हो और उसे बचाया जा सके लेकिन पुलिस केस के चलते दो हॉस्पिटल ने अड्मिट करने से मना कर दिया आख़िरकार दिशा को शताब्दी हॉस्पिटल लाया लेकिन तब तक काफ़ी देर हो चुकी थी और दिशा की मौत हो गयी।
फिर भगवती हॉस्पिटल में दिशा का पीएम हुआ। भगवती अस्पताल के रजिस्टर की कॉपी आज समाज के पास मौजूद। शताब्दी से भगवती अस्पताल लायी गयी थी बॉडी 11 जून को हुआ था पोस्ट मोर्टेम। 11 जून साढे 4 बजे ही लाया गया था पोस्ट मोर्टेम के लिए। रजिस्टर के पन्नो ने खोला पुलिस का राज।
 दिशा केस का सुशांत से कनेक्शन भी आया सामने। 24 मई को दिशा और सुशांत के बीच व्हाट्सअप चैट पर हुई थी लंबी बात हुई थी। सूत्रों के मुताबिक़ दिशा सुशांत के बेहद क़रीब थी।
 24 मई को सुशांत और दिशा के व्हाट्सअप चैट में भी निजी और व्यवसायिक तौर पर काफी चर्चा हुई। सूत्रों ने ये भी बताया की दोनो ने अपने भविष्य के प्रोजेक्ट पर और निजी ज़िन्दगी पर भी चर्चा की।
 जिस अम्बुलेब्स ड्राइवर को घायल दिशा को ले जाने के लिए बुलाया गया था उंसके मॉलिक पंकज ने हमें बताया कि 8 जून की रात को उन्हें मालाड इस्थित जनकल्याण नगर के गैलेक्सी अपार्टमेंट्स से कॉल आया कि कोई लड़की नीचे गिर गयी है जिसके बाद वो 10 से 15 मिनट के बाद वहां पहुचे लेकिन पहुचने के बाद पता चला कि जख्मी लड़की को एक कार में ले जाया गया है।
इसके बाद वो लोग अगला कॉल अटेंड करने शताब्दी अस्पताल गए थे। जिस दिशा को वो कार से अस्पताल नही ले जा पाए थे वही दिशा को कुछ समय बाद ही उसके दोस्त कार में लेकर पहुचे। उसी समय डॉक्टर ने दिशा के दोस्तो से दिशा को चेक करने के बाद बताया कि इसकी मौत हो गयी है।
 इतनी देर बाद अस्पताल क्यों लाये तब पता चला कि दिशा को कार में ही लेकर उसके दोस्त पहले मलाड के एवर शाइन नगर अस्पताल गए थे लेकिन हॉस्पिटल ने एडमिशन नही लिया जिसके बाद वो तुंगा हॉस्पिटल गए वहां भी पुलिस केस का हवाला देकर एडमिशन नही दिया गया। फिर उसके बाद वो मजबूरन कांदीवली के शताब्दी अस्पताल में ले गए लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और दिशा की मौत हो चुकी थी।
 जब अस्पताल पहुँचने के बाद दिशा को कार से निकालकर स्ट्रेचर पर रखा गया तो उस वक़्त पंकज ने खुद दिशा की हालत देखी थी पंकज ने बताया कि दिशा का सिर मुह हाथ पैर बुरी तरह फ्रैक्चर हो गया था उसका दाहिना हाथ शायद गिरने की वजह से झूल गया था और पैर भी उस वक़्त स्ट्रेचर पर जब दिशा को देखा उसने वो लाल रंग के एक टॉप में नजर आयी थी जबकि कमर के नीचे कपड़ा डाला हुआ था लेकिन उसने लेगिंग पहनी हुई थी जो कि साफ दिख रहा था। अम्बुलेब्स ड्राइवर और मॉलिक ने जो बताया उससे एक बात साफ है कि दिशा की बॉडी को खुद पुलिस ने लगभग 2 घण्टे बाद देखा।
8 जून को उसे डॉक्टर ने एडमिट करते ही मृत घोषित कर दिया था। 9 जून की सुबह उसका स्वॉब कोरोना टेस्टिंग के लिए भेजा गया लेकिन उसके बावजूद पोस्ट मोर्टेम 11 जून को क्यों हुआ उस पर पुलिस चुप्पी साधे है।