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गहलोत ने जीता ध्वनि मत से विश्वास मत,बीजेपी बैकफुट पर

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कांग्रेस को मिलेगी नई ताकत

अजीत मेंदोला

नई दिल्ली।राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शुक्रवार को विधानसभा में ध्वनिमत मत से सदन का विश्वास जीत लिया।इस तरह गहलोत ने जहाँ सरकार में अपनी पकड़ को और मजबूत किया वहीं कांग्रेस को भी बड़ी राहत दी है।राजस्थान से मिली इस आक्सीजन का निश्चित तौर पर कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व अब आने वाले दिनों में लाभ उठायेगा।क्यों कि पिछले डेढ़ साल में कांग्रेस  अरुणाचल प्रदेश,मणिपुर,गोवा,कर्नाटक और मध्य्प्रदेश में अपनी सरकारें बचाने में नाकाम रही थी।राजस्थान में मुख्यमंत्री गहलोत ने जहाँ  अपनी सरकार बचाई वहीं बीजेपी के सरकार गिराने के अभियान को ध्वस्त कर दिया। यही नही गहलोत ने बीजेपी के आलाकमान को चेताया भी वह अपनी हरकतों से बाज आएं वर्ना जनता कब कुर्सी खींच लेगी पता नही चलेगा।गहलोत के आज के रुख से एक बात साफ हो गई कि वह आने वाले दिनों में मोदी और शाह के खिलाफ आक्रमक तेवर अपनाएंगे।इसी रणनीति पर पूरी कांग्रेस काम करेगी।

सदन शुरू होने से पहले बीजेपी को भी आभास हो गया था कि करने के लिये कुछ नही बचा है।इसलिये उसने अविश्वास प्रस्ताव को सदन शुरू होने से पहले ही वापस ले लिया।सदन में तोड़ी बहुत नोक झोंक जरूर देखने को मिली,लेकिन सत्ता पक्ष बहुमत के चलते पूरे जोश में था।बीजेपी के सदस्यों के रुख से लग गया था कि पार्टी के अंदर सब कुछ ठीक ठाक नही।इसका संकेत पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद दिए बयान से मिल गया था।वसुंधरा से पत्रकारों ने जब सवाल पूछा तो उनके चेहरे पर मुस्कान थी और उन्होंने कहा कि वह धौलपुर अपने घर पर सावन की पूजा में व्यस्त थी।इसलिये उन्हें राजनीतिक घटनाक्रम की बहुत जानकारी नही थी।उनके पूजा में व्यस्त होने के चलते ही सरकार गिराने वालों के मंसूबे पूरे नही हो पाए।बीजेपी अब जो भी सफाई दे, लेकिन उनकी अंदुरुनी लड़ाई के चलते ही राजस्थान में चुनी सरकार बच गई।वसुंधरा राजे पहले दिन से ही सरकार गिराने को लेकर तटस्थ थी।आज सदन में भी वह कुछ नही बोली।मुख्यमंत्री गहलोत ने भी बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व को ही ज्यादा निशाने पर रखा।

बीजेपी ने भी संख्या बल देख ध्वनि मत से विश्वास मत पारित होने के बाद मत विभाजन की मांग नही की।इस तरह गहलोत सरकार ने बाजी जीत ली।स्पीकर सीपी जोशी के कमरे में पहुंचने पर गहलोत के चेहरे पर जीती की खुशी साफ देखी जा सकती थी।इसके बाद जैसा गहलोत ने कहा कि उनकी सरकार कोरोना से जैसे निपट रही उसे आगे जारी रखेंगे।अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाएंगे।इस जीत के बाद बाड़ेबंदी में बंद विधायक भी अपने क्षेत्रों में रवाना हो गए।34 दिन बाद विधायकों को अपने घरों में जाने का मौका मिला।इस जीत के गहलोत सरकार के पास कड़ी चुनोतियाँ है।लेकिन अब यह तय है कि वह खुलकर फैसले कर सकेंगे।हालांकि पूर्व प्रदेश अध्य्क्ष सचिन पायलट ने आज जिस तरह की बयानबाजी की वह कहीं ना कहीं आलाकमान के दिशा निर्देशों के अनुरूप नही थी।उन्होंने राजस्थान छोड़े जाने की खबरों को पूरी तरह से नकारा।जबकि आलाकमान ने एक दिन पहले ही चुप रहने को कहा था।

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