Home राज्य पंजाब Chitkara University’s College of Education celebrates International Ozone Day: चितकारा यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ एजुकेशन ने अंतर्राष्ट्रीय ओज़ोन दिवस मनाया

Chitkara University’s College of Education celebrates International Ozone Day: चितकारा यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ एजुकेशन ने अंतर्राष्ट्रीय ओज़ोन दिवस मनाया

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राजपुरा । वियेना कन्वेंशन और वैश्विक ओज़ोन परत संरक्षण के 35 साल पूरे होने के मौके पर चितकारा कॉलेज ऑफ एजुकेशन ने  पंजाब स्टेट काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी,  मिनिस्ट्री आफ एनवायरमेंट फारेस्ट क्लाइमेट चैंज और एनवायरमेंटल इनफारमेशन सिस्टम के साथ मिलकर ओज़ोन डे को मनाया।

इस अवसर पर ‘ओज़ोन-ओ-लॉजी’ नामक ऑनलाइन क्विज  प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें ओज़ोन परत और इसके संरक्षण के बारे में छात्रों के ज्ञान का परीक्षण हुआ और साथ ही उन्हें इस विषय पर नवीनतम जानकारी भी प्रदान की गयी। चितकारा इंटरनेशनल स्कूल चंडीगढ़ के छात्रों ने बड़े उत्साह के साथ इस प्रतियोगिता में ऑनलाइन भाग लिया। चितकारा कॉलेज ऑफ एजुकेशन के अल्फा शिक्षकों ने इस विषय पर पोस्टर बना इनके माध्यम से ओज़ोन परत के समग्र पहलुओं और इसके संरक्षण पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए  डॉ सुमित अरोड़ा ने ओज़ोन फॉर लाइफ विषय पर अपने विचार रखे,  डाक्टर अरोडा  अटल मिशन फार रिजुवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफारमेशन के तहत कैपेसिटी बिल्डिंग एंड इंस्टीट्यूशनल स्ट्रेंथनिंग स्पेशियलिस्ट के रूप में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा की  सूर्य के प्रकाश के बिना पृथ्वी पर जीवन संभव नहीं है लेकिन यदि ओज़ोन परत नहीं होती तो फिर सूर्य से निकलने वाली ऊर्जा पृथ्वी पर जीवन के लिए बहुत अधिक खतरनाक होगी। यह स्ट्रैटोस्फेरिक परत सूरज की सबसे हानिकारक अल्ट्रावायलेट रेडिएशन  से पृथ्वी को बचाती है। उन्होंने ओज़ोन-घटाने वाले एजेंटों के उपयोग और ग्लोबल वार्मिंग की रोकथाम में योगदान देने का आह्वान किया।

इस अवसर पर बोलते हुए, इकालाजिक कारपोरेशन के फाउंडर व एनजीओ सोशल सब्सटेंस के सदस्य डॉ पुनीत अरोड़ा ने किचन गार्डनिंग के महत्व का उल्लेख किया, रसोई के कचरे के पुन: उपयोग के लिए भोजन का महत्व और सुझाव दिए। उन्होंने ओज़ोन संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया।

इस ऑनलाइन कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोतर सत्र का भी आयोजन किया गया था, जिसमें यूनाइटेड नेशंस डवलपमेंट प्रोग्राम के मांट्रियर प्रोटोकाल यूनिट के पूर्व टेक्निकल एडवाइजर अंशु कुमार ने सवालों के जबाव दिए।  सभी ने प्रदूषण को कम करके, वृक्षारोपण करके, ग्लोबल वार्मिंग को रोकने के लिए, और ओज़ोन-घटने वाले एजेंटों के उपयोग को कम करके ओज़ोन परत की रक्षा करने का संकल्प लिया।

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