Homeखेलआखिर क्या है न्यूज़ीलैंड का स्पोर्ट्स मॉडल, जिसकी है आज सीखने की...

आखिर क्या है न्यूज़ीलैंड का स्पोर्ट्स मॉडल, जिसकी है आज सीखने की ज़रूरत

मनोज जोशी

भारत मैं जितनी आबादी गोरखपुर और नोएडा की मिलाकर है, उतनी आबादी करीब-करीब न्यूज़ीलैंड की है। यानी कुल 50 लाख के आस-पास। वहीं भारत की आबादी उससे 280 गुना अधिक है लेकिन इस देश की टीम हमें न सिर्फ वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप के फाइनल में हराती है बल्कि पिछले साल अपने देश में टीम इंडिया का क्लीन स्वीप भी करती है और वर्ल्ड रैंकिंग में भारत को पहले स्थान से हटाकर दुनिया की नम्बर एक टीम भी बन जाती है। इस टीम ने वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप के फाइनल में भारत को हराकर 144 साल के टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। न्यूज़ीलैंड ने छह साल में तीसरी बार आईसीसी ट्रॉफी के फाइनल में प्रवेश किया था और अब जाकर केन विलियम्सन की  अगुवाई में टीम आईसीसी ट्रॉफी जीतने में सफल रही।

इस देश से क्रिकेट के ऐसे महान खिलाड़ी तैयार हुए हैं, जिन्हें कोई भी अपनी टीम में रखना चाहेगा। टीम इंडिया के पूर्व कोच जॉन राइट इसी देश के बेहतरीन बल्लेबाज़ थे। 80 के दशक में कपिलदेव सहित जिन चार महान ऑलराउंडरों की चर्चा होती है, उसमें से एक रिचर्ड हैडली भी न्यूज़ीलैंड से थे। वनडे क्रिकेट में शुरुआती ओवरों में ताबड़तोड़ बल्लेबाज़ी की परम्परा शुरू करने वाले मार्क ग्रैटबैच न्यूज़ीलैंड के ओपनिंग बल्लेबाज़ थे। आईपीएल के पहले ही मैच में टीम के स्कोर के बराबर अकेले ही 157 रन की पारी खेलने वाले ब्रैंडन मैक्कुलम न्यूज़ीलैंड के धाकड़ बल्लेबाज़ और आज केकेआर के कोच हैं। यहीं से स्टीफन फ्लेमिंग सीएसके के कोच हैं और आज के दौर में केन विलियम्सन फैब 4 के सदस्य हैं।

ये छोटा सा मुल्क अगर क्रिकेट में नम्बर वन है तो रगबी में यह दुनिया की नम्बर दो टीम है। यहां की टीम 1976 के मांट्रियल ओलिम्पक का गोल्ड मेडल भी जीत चुकी है। ओलिम्पिक में जितने पदक भारत को शताब्दी में हासिल हुए हैं, उतने पदक यह देश केवल दो ओलिम्पिक में भागीदारी से ही हासिल कर लेता है। रियो ओलिम्पिक के पिछले आयोजन में इस टीम ने चार गोल्ड. नौ सिल्वर और पांच ब्रॉन्ज़ मेडल हासिल किए थे। उसे रोइंग में दो और केनोइंग और सेलिंग में एक-एक गोल्ड हासिल हुए। बाकी पदक उसे साइक्लिंग, एथलेटिक्स और गोल्फ
में हासिल हुए।

इसी देश की एक शॉटपुटर Valerie Adams अब तक ओलिम्पिक में दो गोल्ड और एक सिल्वर मेडल जीत चुकी हैं। वर्ल्ड चैम्पियनशिप के चार और कॉमनवेल्थ गेम्स के तीन गोल्ड भी उनके नाम हैं। न्यूज़ीलैंड के ही जोसफ Parker ने 2016 में WBO का हैवीवेट खिताब जीतकर सबका दिल जीत लिया था।

अब यहां सवाल यह उठता है कि आखिर क्या है न्यूज़ीलैंड का स्पोर्ट्स मॉडल। दरअसल, इसके पीछे उसकी सफलता का राज़ छह से सात खेलों को चुनना है और उसमें महारथ हासिल करना है। वहीं भारत में स्थिति बिल्कुल अलग है। यहां ओलिम्पियन होना भी बड़ी उपलब्धि मानी जाती है जो सरकारी नौकरी मिलने में मददगार साबित होती है। यहां तक कि भारतीय ओलिम्पिक संघ के अध्यक्ष नरेंद्र बत्रा भी पदकों की संख्या बढ़ाने की बात नहीं कहते। उनका उद्देश्य सभी 28 ओलिम्पिक स्पोर्ट्स में भागीदारी करना है। जब तक यह सोच नहीं बदलेगी और क्वॉलीफाई करना ही सबसे बड़ा मकसद न होकर ओलिम्पिक पदक सबसे बड़ा मकसद नहीं होगा, तब तक भारत एक- दो या ज़्यादा से ज़्यादा छह पदकों से ऊपर नहीं पहुंच सकता।

SHARE
RELATED ARTICLES

Most Popular