30 अगस्त को रखा जाएगा व्रत, जाने शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
Santan Saptami Vrat, (आज समाज), नई दिल्ली: संतान सप्तमी का व्रत माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि के लिए रखती है। इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती और सूर्यदेव की विशेष रूप से पूजा की जाती है। यह व्रत भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को रखा जाता है। इस बार यह व्रत 30 अगस्त 2025 को रखा जाएगा। इस दिन संतान से जुड़ी सभी मुश्किलों को दूर करने के लिए गणेश चालीसा का पाठ करना भी बहुत ही लाभकारी माना गया है।

पूजा का शुभ मुहूर्त

सप्तमी तिथि प्रारंभ: 29 अगस्त, रात 8:25 बजे। सप्तमी तिथि समाप्त: 30 अगस्त, रात 10:46 बजे। पूजा का शुभ मुहूर्त (निशिता काल): सुबह 11:05 बजे से दोपहर 12:47 बजे तक। इस दिन महिलाएं व्रत रखकर भगवान सूर्य और संतान गोपाल की विशेष पूजा करती हैं।

संतान के जीवन से नकारात्मक प्रभाव होते है दूर

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, संतान सप्तमी का व्रत करने से संतान के जीवन से नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं। यह व्रत विशेष रूप से माताओं को अपनी संतान की रक्षा और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना के लिए करना चाहिए। पुराणों में उल्लेख है कि इस दिन श्रद्धा और भक्ति से व्रत करने पर माता संतति सुख और संतान की आयु बढ़ाने का आशीर्वाद प्राप्त करती हैं।

संतान सप्तमी व्रत और पूजा विधि

  • व्रत रखने वाली महिलाएं सूर्योदय से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • पूजा के लिए चौकी सजाएं।
  • भगवान शिव व माता पार्वती की फोटो या प्रतिमा सामने रखें।
  • शिव-पार्वती की मूर्ति रखने के बाद नारियल के पत्तों के साथ कलश स्थापित करें।
  • अब धूप, दीप व आरती के साथ बेलपत्र, फल-फूल व मिठाई अर्पित करें।
  • पूजा के बाद संतान सप्तमी व्रत कथा पढ़ें या सुनें।
  • संतान गोपाल की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक जलाएं।
  • संतान की मंगलकामना के लिए विशेष मंत्रों का जाप करें।
  • पूरे दिन उपवास रखा जाता है और संध्या काल में कथा सुनकर व्रत का समापन किया जाता है।
  • अंत में प्रसाद का वितरण कर संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।

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