Homeराशिफलवृष राशिफल 15 सितंबर 2022

वृष राशिफल 15 सितंबर 2022

***|| जय श्री राधे ||***
🌺🙏 महर्षि पाराशर पंचांग 🙏🌺
🙏🌺🙏 अथ पंचांगम् 🙏🌺🙏
****ll जय श्री राधे ll****
🌺🌺🙏🙏🌺🌺🙏🙏🌺🌺

दिनाँक:-15/09/2022, गुरुवार
पंचमी, कृष्ण पक्ष,
आश्विन
“””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

💮🚩 दैनिक राशिफल 🚩💮

देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके।
नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।।
विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे।
जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत ।।

वृष
मेहनत सफल रहेगी। बिगड़े काम बनेंगे। कार्यसिद्धि से प्रसन्नता रहेगी। आय में वृद्धि होगी। सामाजिक कार्य करने के अवसर मिलेंगे। घर-बाहर पूछ-परख रहेगी। जोखिम उठाने का साहस कर पाएंगे। पार्टनरों का सहयोग मिलेगा। समय की अनुकूलता का लाभ लें। धनार्जन होगा।

तिथि———– पंचमी 11:00:01 तक
पक्ष————————- कृष्ण
नक्षत्र———– भरणी 08:03:52
योग———— हर्शण 29:26:16
करण———– तैतुल 11:00:01
करण————– गर 23:34:22
वार———————– गुरूवार
माह———————– आश्विन
चन्द्र राशि——– मेष 14:27:40
चन्द्र राशि—————– वृषभ
सूर्य राशि——————- सिंह
ऋतु————————– वर्षा
सायन———————— शरद
आयन—————– दक्षिणायण
संवत्सर——————- शुभकृत
संवत्सर (उत्तर)——————— नल
विक्रम संवत—————- 2079
गुजराती संवत————- 2078
शक संवत—————– 1944

सूर्योदय————— 06:05:28
सूर्यास्त————— 18:22:59
दिन काल————- 12:17:31
रात्री काल————- 11:42:55
चंद्रास्त—————- 10:42:27
चंद्रोदय—————- 21:36:13

लग्न——- सिंह 28°0′ , 148°0′

सूर्य नक्षत्र——— उत्तरा फाल्गुनी
चन्द्र नक्षत्र—————– भरणी
नक्षत्र पाया—————— स्वर्ण

🚩💮🚩 पद, चरण. 🚩💮🚩

लो—-भरणी 08:03:52

अ—- कृत्तिका 14:27:40

ई—- कृत्तिका 20:54:05

उ—- कृत्तिका 27:23:00

💮🚩💮 ग्रह गोचर 💮🚩💮

ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद
==========================
सूर्य=सिंह 27:12 उ o फ़ाo , 1 टे
चन्द्र =मेष 25 °23, भरणी, 4 लो
बुध =कन्या 13 ° 07′ हस्त ‘ 2 ष
शुक्र=सिंह 18°05, पू o फ़ा o ‘ 2 टा
मंगल=वृषभ 19°30 ‘ रोहिणी’ 3 वी
गुरु=मीन 11°30 ‘ उ o भा o, 3 झ
शनि=मकर 25°33 ‘ धनिष्ठा ‘ 1 गा
राहू=(व) मेष 21°50’ भरणी , 3 ले
केतु=(व) तुला 21°50 विशाखा , 1 ती

राहू काल 13:46 – 15:19 अशुभ
यम घंटा 06:05 – 07:38 अशुभ
गुली काल 09:10 – 10:42 अशुभ
अभिजित 11:50 – 12:39 शुभ
दूर मुहूर्त 10:11 – 11:00 अशुभ
दूर मुहूर्त 15:06 – 15:55 अशुभ
वर्ज्यम 20:54 – 22:38 अशुभ

💮चोघडिया, दिन
शुभ 06:05 – 07:38 शुभ
रोग 07:38 – 09:10 अशुभ
उद्वेग 09:10 – 10:42 अशुभ
चर 10:42 – 12:14 शुभ
लाभ 12:14 – 13:46 शुभ
अमृत 13:46 – 15:19 शुभ
काल 15:19 – 16:51 अशुभ
शुभ 16:51 – 18:23 शुभ

🚩चोघडिया, रात
अमृत 18:23 – 19:51 शुभ
चर 19:51 – 21:19 शुभ
रोग 21:19 – 22:47 अशुभ
काल 22:47 – 24:14* अशुभ
लाभ 24:14* – 25:42* शुभ
उद्वेग 25:42* – 27:10* अशुभ
शुभ 27:10* – 28:38* शुभ
अमृत 28:38* – 30:06* शुभ

💮होरा, दिन
बृहस्पति 06:05 – 07:07
मंगल 07:07 – 08:08
सूर्य 08:08 – 09:10
शुक्र 09:10 – 10:11
बुध 10:11 – 11:13
चन्द्र 11:13 – 12:14
शनि 12:14 – 13:16
बृहस्पति 13:16 – 14:17
मंगल 14:17 – 15:19
सूर्य 15:19 – 16:20
शुक्र 16:20 – 17:22
बुध 17:22 – 18:23

🚩होरा, रात
चन्द्र 18:23 – 19:22
शनि 19:22 – 20:20
बृहस्पति 20:20 – 21:19
मंगल 21:19 – 22:17
सूर्य 22:17 – 23:16
शुक्र 23:16 – 24:14
बुध 24:14* – 25:13
चन्द्र 25:13* – 26:12
शनि 26:12* – 27:10
बृहस्पति 27:10* – 28:09
मंगल 28:09* – 29:07
सूर्य 29:07* – 30:06

🚩💮 उदयलग्न प्रवेशकाल 💮🚩

सिंह > 03:10 से 05:20 तक
कन्या > 05:20 से 07:34 तक
तुला > 07:34 से 09:40 तक
वृश्चिक > 09:40 से 11:56 तक
धनु > 11:56 से 14:22 तक
मकर > 14:22 से 16:04 तक
कुम्भ > 16:04 से 17:30 तक
मीन > 17:30 से 18:06 तक
मेष > 18:06 से 19:38 तक
वृषभ > 19:38 से 22:26 तक
कर्क > 01:26 से 02:56 तक

🚩विभिन्न शहरों का रेखांतर (समय)संस्कार

(लगभग-वास्तविक समय के समीप)
दिल्ली +10मिनट——— जोधपुर -6 मिनट
जयपुर +5 मिनट—— अहमदाबाद-8 मिनट
कोटा +5 मिनट———— मुंबई-7 मिनट
लखनऊ +25 मिनट——–बीकानेर-5 मिनट
कोलकाता +54—–जैसलमेर -15 मिनट

नोट– दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।
प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥
अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।
लाभ में व्यापार करें ।
रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।
काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।
अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।

💮दिशा शूल ज्ञान————-दक्षिण
परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो घी अथवा केशर खाके यात्रा कर सकते है l
इस मंत्र का उच्चारण करें-:
शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l
भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll

🚩 अग्नि वास ज्ञान -:
यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,
चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।
दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,
नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।। महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्
नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।

15 + 5 + 5 + 1 = 26 ÷ 4 = 2 शेष
आकाश लोक पर अग्नि वास हवन के लिए अशुभ कारक है l

🚩💮 ग्रह मुख आहुति ज्ञान 💮🚩

सूर्य नक्षत्र से अगले 3 नक्षत्र गणना के आधार पर क्रमानुसार सूर्य , बुध , शुक्र , शनि , चन्द्र , मंगल , गुरु , राहु केतु आहुति जानें । शुभ ग्रह की आहुति हवनादि कृत्य शुभपद होता है

मंगल ग्रह मुखहुति

💮 शिव वास एवं फल -:

20 + 20 + 5 = 45 ÷ 7 = 3 शेष

वृषभारूढ़ = शुभ कारक

🚩भद्रा वास एवं फल -:

स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।
मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।

💮🚩 विशेष जानकारी 🚩💮

* षष्ठी श्राद्ध

*चंद्र षष्ठी

*इंजीनियर्स दिवस

💮🚩💮 शुभ विचार 💮🚩💮

अन्तर्गतमलौ दुष्टः तीर्थस्नानशतैरपि ।
न शुध्दयति यथा भाण्डं सुरदा दाहितं च यत् ।।
।। चा o नी o।।

आप चाहे सौ बार पवित्र जल में स्नान करे, आप अपने मन का मैल नहीं धो सकते. उसी प्रकार जिस प्रकार मदिरा का पात्र पवित्र नहीं हो सकता चाहे आप उसे गरम करके सारी मदिरा की भाप बना दे.

🚩💮🚩 सुभाषितानि 🚩💮🚩

गीता -: क्षेत्र-क्षेत्रज्ञविज्ञानयोग अo-13

इच्छा द्वेषः सुखं दुःखं सङ्‍घातश्चेतना धृतिः ।,
एतत्क्षेत्रं समासेन सविकारमुदाहृतम्‌ ॥,

तथा इच्छा, द्वेष, सुख, दुःख, स्थूल देहका पिण्ड, चेतना (शरीर और अन्तःकरण की एक प्रकार की चेतन-शक्ति।,) और धृति (गीता अध्याय 18 श्लोक 34 व 35 तक देखना चाहिए।,)– इस प्रकार विकारों (पाँचवें श्लोक में कहा हुआ तो क्षेत्र का स्वरूप समझना चाहिए और इस श्लोक में कहे हुए इच्छादि क्षेत्र के विकार समझने चाहिए।,) के सहित यह क्षेत्र संक्षेप में कहा गया॥,6॥,

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