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वृश्चिक राशिफल 13 अगस्त 2022

***|| जय श्री राधे ||***
*** महर्षि पाराशर पंचांग ***
***अथ पंचांगम् ***
****ll जय श्री राधे ll****
*********************

दिनाँक:-13/08/2022, शनिवार
द्वितीया, कृष्ण पक्ष,
भाद्रपद
“””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

*** दैनिक राशिफल ***

देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके।
नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।।
विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे।
जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत ।।

वृश्चिक
आज का दिन आपकी कठिनाइयां समाप्त होती दिख रही है। तीर्थदर्शन हो सकता है। सत्संग का लाभ मिलेगा। राजकीय सहयोग से कार्य पूर्ण लाभदायक रहेंगे। कारोबार मनोनुकूल रहेगा। शेयर मार्केट में जोखिम लें। नौकरी में चैन रहेगा। घरबाहर प्रसन्नता बनी रहेगी। दुष्टजन हानि पहुंचा सकते हैं। ध्यान रखें। पारिवारिक रिश्तों में मजबूती आएगी। किसी परिजन से लंबे समय से चल रहा वाद विवाद समाप्त होगा। भाइयों से आप किसी अहम मुद्दे पर विचार विमर्श करेंगे। ससुराल पक्ष से आपको खुशखबरी सुनने को मिल सकती है। कार्यक्षेत्र में अधिकारी भी आपके कार्य को देखकर आपकी प्रशंसा करेंगे। मामलों में व्यवस्थित काम करना फायदेमंद और लाभकारी रहेगा निजी मामलों में आप आज किसी किसी परिजन से सलाह ले सकते हैं।

 

तिथि———- द्वितीया 24:52:59 तक
पक्ष————————- कृष्ण
नक्षत्र——– शतभिषा 23:27:13
योग———— शोभन 07:48:00
योग———- अतिगंड 28:26:46
करण———– तैतुल 14:15:45
करण————– गर 24:52:59
वार———————– शनिवार
माह———————– भाद्रपद
चन्द्र राशि—————— कुम्भ
सूर्य राशि——————- कर्क
रितु————————– वर्षा
आयन—————– दक्षिणायण
संवत्सर——————- शुभकृत
संवत्सर (उत्तर) ———————नल
विक्रम संवत—————- 2079
गुजराती संवत————– 2078
शक संवत—————— 1944

वृन्दावन
सूर्योदय————— 05:49:52
सूर्यास्त————— 18:57:53
दिन काल————- 13:08:00
रात्री काल————- 10:52:29
चंद्रास्त—————- 06:53:27
चंद्रोदय—————- 20:16:24

लग्न—- कर्क 26°6′ , 116°6′

सूर्य नक्षत्र————— आश्लेषा
चन्द्र नक्षत्र—————- शतभिषा
नक्षत्र पाया——————– ताम्र

??? पद, चरण ???

गो—- शतभिषा 07:00:03

सा—- शतभिषा 12:27:11

सी—- शतभिषा 17:56:12

सू—- शतभिषा 23:27:13

से—- पूर्वाभाद्रपदा 29:00:27

??? ग्रह गोचर ???

ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद
==========================
सूर्य=कर्क 26:12 अश्लेषा , 3 डे
चन्द्र =कुम्भ 09 °23, शतभिषा, 1 गो
बुध =सिंह 19 ° 07′ पू o फा o ‘ 2 टा
शुक्र=कर्क 07°05, पुष्य ‘ 2 हे
मंगल=वृषभ 01°30 ‘ कृतिका ‘ 2 ई
गुरु=मीन 14°30 ‘ उ o भा o, 4 ञ
शनि=कुम्भ 29°33 ‘ धनिष्ठा ‘ 2 गी
राहू=(व) मेष 23°30’ भरणी , 4 लो
केतु=(व) तुला 23°30 विशाखा , 2 तू

??? मुहूर्त प्रकरण ???

राहू काल 09:07 – 10:45 अशुभ
यम घंटा 14:02 – 15:41 अशुभ
गुली काल 05:50 – 07:28 अशुभ
अभिजित 11:58 – 12:50 शुभ
दूर मुहूर्त 07:35 – 08:27 अशुभ

?पंचक अहोरात्र अशुभ

?चोघडिया, दिन
काल 05:50 – 07:28 अशुभ
शुभ 07:28 – 09:07 शुभ
रोग 09:07 – 10:45 अशुभ
उद्वेग 10:45 – 12:24 अशुभ
चर 12:24 – 14:02 शुभ
लाभ 14:02 – 15:41 शुभ
अमृत 15:41 – 17:19 शुभ
काल 17:19 – 18:58 अशुभ

?चोघडिया, रात
लाभ 18:58 – 20:19 शुभ
उद्वेग 20:19 – 21:41 अशुभ
शुभ 21:41 – 23:03 शुभ
अमृत 23:03 – 24:24* शुभ
चर 24:24* – 25:46* शुभ
रोग 25:46* – 27:07* अशुभ
काल 27:07* – 28:29* अशुभ
लाभ 28:29* – 29:50* शुभ

?होरा, दिन
शनि 05:50 – 06:56
बृहस्पति 06:56 – 08:01
मंगल 08:01 – 09:07
सूर्य 09:07 – 10:13
शुक्र 10:13 – 11:18
बुध 11:18 – 12:24
चन्द्र 12:24 – 13:30
शनि 13:30 – 14:35
बृहस्पति 14:35 – 15:41
मंगल 15:41 – 16:47
सूर्य 16:47 – 17:52
शुक्र 17:52 – 18:58

?होरा, रात
बुध 18:58 – 19:52
चन्द्र 19:52 – 20:47
शनि 20:47 – 21:41
बृहस्पति 21:41 – 22:35
मंगल 22:35 – 23:30
सूर्य 23:30 – 24:24
शुक्र 24:24* – 25:19
बुध 25:19* – 26:13
चन्द्र 26:13* – 27:07
शनि 27:07* – 28:02
बृहस्पति 28:02* – 28:56
मंगल 28:56* – 29:50

?? उदयलग्न प्रवेशकाल ??

कर्क > 03:03 से 05:20 तक
सिंह > 05:20 से 07:26 तक
कन्या > 07:26 से 09:36 तक
तुला > 09:36 से 11:50 तक
वृश्चिक > 11:50 से 14:06 तक
धनु > 14:06 से 16:36 तक
मकर > 16:36 से 18:10 तक
कुम्भ > 18:10 से 19:42 तक
मीन > 19:42 से 20:16 तक
मेष > 20:16 से 10:48 तक
वृषभ > 10:48 से 00:40 तक
मिथुन > 00:40 से 03:03 तक

?विभिन्न शहरों का रेखांतर (समय)संस्कार

(लगभग-वास्तविक समय के समीप)
दिल्ली +10मिनट——— जोधपुर -6 मिनट
जयपुर +5 मिनट—— अहमदाबाद-8 मिनट
कोटा +5 मिनट———— मुंबई-7 मिनट
लखनऊ +25 मिनट——–बीकानेर-5 मिनट
कोलकाता +54—–जैसलमेर -15 मिनट

नोट– दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।
प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥
अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।
लाभ में व्यापार करें ।
रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।
काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।
अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।

?दिशा शूल ज्ञान————-पूर्व
परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो लौंग अथवा कालीमिर्च खाके यात्रा कर सकते है l
इस मंत्र का उच्चारण करें-:
शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l
भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll

? अग्नि वास ज्ञान -:
यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,
चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।
दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,
नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।। महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्
नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।

15 + 2 + 7 + 1 = 25 ÷ 4 = 1 शेष
पाताल लोक पर अग्नि वास हवन के लिए अशुभ कारक है l

?? ग्रह मुख आहुति ज्ञान ??

सूर्य नक्षत्र से अगले 3 नक्षत्र गणना के आधार पर क्रमानुसार सूर्य , बुध , शुक्र , शनि , चन्द्र , मंगल , गुरु , राहु केतु आहुति जानें । शुभ ग्रह की आहुति हवनादि कृत्य शुभपद होता है

चन्द्र ग्रह मुखहुति

? शिव वास एवं फल -:

17 + 17 + 5 = 39 ÷ 7 = 4 शेष

सभायां = संताप कारक

?भद्रा वास एवं फल -:

स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।
मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।

?? विशेष जानकारी ??

* द्वितीय शनिवार

*अश्वत्थ मारुति पूजन

*अशून्य शयन व्रत

*रानी अहिल्याबाई पुण्य तिथि

??? शुभ विचार ???

तादृशी जायते बुध्दिर्व्यवसायोऽपि तादृशः ।
सहायास्तादृशा एव यादृशी भवितव्यता ।।
।। चा o नी o।।

सर्व शक्तिमान के इच्छा से ही बुद्धि काम करती है, वही कर्मो को नियंत्रीत करता है. उसी की इच्छा से आस पास में मदद करने वाले आ जाते है.

??? सुभाषितानि ???

गीता -: मोक्षसान्यांसयोग अo-18

असक्तबुद्धिः सर्वत्र जितात्मा विगतस्पृहः।,
नैष्कर्म्यसिद्धिं परमां सन्न्यासेनाधिगच्छति॥,

सर्वत्र आसक्तिरहित बुद्धिवाला, स्पृहारहित और जीते हुए अंतःकरण वाला पुरुष सांख्ययोग के द्वारा उस परम नैष्कर्म्यसिद्धि को प्राप्त होता है॥,49॥,

 

*** आपका दिन मंगलमय हो ***
*** *** *** *** *** *** 
आचार्य नीरज पाराशर (वृन्दावन)
(व्याकरण,ज्योतिष,एवं पुराणाचार्य)

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