नई दिल्ली।राजस्थान में गहलोत सरकार को संकट में डालने वाली बीजेपी अब खुद संकट में घिरती दिख रही है।बीजेपी आलाकमान ने जो प्रदेश कार्यकारिणी घोषित की है उससे इसके संकेत मिल रहे हैं।हालांकि बीजेपी अभी ऐसा नही मानती है,लेकिन जानकारों की माने तो एक तरह से पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को साइड करने की कोशिश की गई है।वसुंधरा राजे अभी पूरी तरह से मौन हैं।उनका मौन बीजेपी के लिये शुभसंकेत नही माना जा रहा है।वसुंधरा राजे का दिल्ली के साथ ठकराव जग जाहिर है।जब से उन्होंने प्रदेश की राजनीति संभाली तभी से वे दिग्गजों से भिड़ती रही हैं।भैरोसिंह शेखावत,जसवन्त सिंह,ललित किशोर चतुर्वेदी,रधुवीर कौशल जैसे प्रदेश के बड़े नेता रहे हों या दिल्ली में पार्टी का कोई भी राष्ट्रीय अध्य्क्ष रहा हो।वसुंधरा ने राजस्थान की राजनीति में अपने तरह की राजनीति की।आज भी उसी तरह से वह चल रही हैं।
 उनका जनाधार ओर लोकप्रियता ठीक उसी तरह की है जैसे मुख्य्मंत्री अशोक गहलोत की।दोनों की प्रदेश  के ढाणी ढाणी ओर गांव तक सीधी पकड़ है।गहलोत ने अपनी छवि आज तक साधरण कार्यकर्ता की बनाई हुई है।वसुंधरा राजे राजपरिवार से आती जरूर हैं पर चुनाव के समय वह सीधे संवाद बना अपने को लोकप्रिय बना लेती हैं।ग्रामीणों में भी उसी रंग ढंग में रंग जाती है।यही वजह है कि चाह कर भी बीजेपी का कोई भी आलाकमान उनको साइड नही कर पाया।2017 में तत्कालीन बीजेपी अध्य्क्ष अमित शाह ने प्रदेश की कमान गजेंद्र सिंह शेखावत को देनी चाही तो वसुंधरा राजे के वीटो के चलते वह ऐसा नही कर पाये।वसुंधरा की पसंद ही उस समय चली।पार्टी चुनाव हार गई।इसके बाद प्रदेश बीजेपी में फिर प्रयोग शुरू हुए।गजेंद्र सिंह शेखावत को केंद्र में कैबनेट मंत्री बना उनका कद बढ़ाया गया।सतीश पुनिया को प्रदेश की कमान सौप दी गई ।बीजेपी का आलाकमान ने अपने हिसाब से राजनीति की।वसुंधरा विरोधी माने जाने वालों हनुमान बेनीवाल,किरोडी लाल मीणा ओर शेखावत पर हाथ धरा।प्रदेश अध्य्क्ष सतीश पुनिया ने भी इस गुट के साथ हो गए।कहा जाता है इसी गुट ने गृहमंत्री अमित शाह को भरोसा दिलाया कि वह गहलोत सरकार को गिरा देंगे।एक तीर से दो निशाने साधने की तैयारी थी।एक तो कांग्रेस में टूट कर गहलोत सरकार को हटाने की दूसरा गजेंद्र सिंह शेखावत को मुख्य्मंत्री बना वसुंधरा राजे युग का अंत करने की।लेकिन सारे दाव उल्टे पड़ गये।सचिन पायलट संख्या बल नही जुटा पाये।तो गजेंद्र सिंह कई आरोपो में गिर गए।भरस्टाचार से लेकर खरीद फरोख्त के आरोप लगे हैं।
बीजेपी आलाकमान का दांव फेल होने के कोर्ट कचहरी के भरोसे नए दांव खेले गए।उसी के तहत बीएसपी के विधायकों का मामला कोर्ट तक ले जाया गया है।अब जब गजेंद्र खुद विवादों में आ गए तो सूत्रों का कहना है कि अब सांसद दिया कुमारी को  आगे बढ़ाने की तैयारी शुरू हो गई है।नई कार्यकरिणी से इसके संकेत दे दिये है।दिया कुमारी युवा हैं और वह भी राजघराने परिवार से ही आती है।लेकिन वसुंधरा राजे अभी इतनी उम्र दराज नही हुई हैं वह अपने विरोधियों से लोहा न ले सके।इसलिये  गहलोत सरकार को जब से अस्थिर करने की कोशिश की जा रही है तब से वह पूरी बारीकी से घटनाक्रम पर नजर रख चुप हैं।अभी जो हालात राजस्थान में हैं उनमें वसुंधरा राजे की अनदेखी बीजेपी नही कर सकती है।क्योंकि बीजेपी के पास अभी ऐसा कोई नेता नही है जो अपने दम पर पार्टी को जितवा सके।समाप्त