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Priyanka’s experiments only hope for miracles for Congressmen: यूपी -प्रियंका के प्रयोगों से ही है कांग्रेसियों को चमत्कार की उम्मीद

नई दिल्ली। महासचिव प्रियंका गांधी के प्रयोग क्या उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को जिंदा कर पायंगे?क्योंकि 18 मार्च को यूपी चुनाव वर्ष में प्रवेश कर चुका।अभी तक जानकार कांग्रेस को मुकाबले में मानने को तैयार नही है।आज की बात करें तो मुकाबला बीजेपी और सपा के बीच ही माना जा रहा है।जिसमे बीजेपी नम्बर एक पर यथावत बनी मानी जा रही है।दूसरे नम्बर पर सपा है तो बसपा अभी तीसरे नंबर पर ही बनी हुई है।कांग्रेस सीन में ही नही है।मतलब 2017 की स्थिति में कोई बदलाव नही हुआ है।लेकिन कांग्रेसी ऐसा नही मानते हैं।उनका दावा है कि जब चुनाव का समय आएगा तो तब कांग्रेस सब को चोंका देगी।इसके पीछे तर्क है कि प्रियंका गांधी का जमीनी स्तर किया जाने वाला काम।प्रदेश से लेकर बूथ स्तर कांग्रेस ने अपने कार्यकर्ता तैयार कर लिये हैं।यूं कहा जा सकता है यूपी अकेला प्रदेश है जहां पर कांग्रेस में संगठन स्तर पर पूरा काम कर लिया गया है।अब जनता के बीच पैठ बनाने के लिये लगातार कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।प्रियंका गांधी खुद लगातार रैलियां कर ही रही है अब न्याय पंचायतों से सीधा संवाद करेंगी।

  दरअसल प्रियंका गांधी ने सक्रिय राजनीति में आने से पूर्व कई प्रयोग किये थे।2014 के लोकसभा चुनाव में तो वह पर्दे के पीछे प्रमुख रणनीतिकार बनी थी।लेकिन संयोग से उसी चुनाव के बाद से पार्टी का बुरा दौर शुरू हो गया।लेकिन प्रयोगों के मामले में वह डटी रही।2017 यूपी के चुनाव में उन्होंने एक ऐसा प्रयोग किया कि पार्टी 7 सीटों पर सिमट गई।उसी समय से कांग्रेस में पुराने और नए नेताओं के बीच बड़े टकराव की शुरुआत हुई।तब के प्रदेश प्रभारी गुलाम नवी आजाद और उत्तर प्रदेश में चेहरा बनाई गई शीला दीक्षित समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन के पक्ष में नही थी।लेकिन प्रियंका गांधी की पहल पर ही गठबंधन हुआ था।इस हार के बाद वह खुलकर राजनीति में सामने आ गई।यूपी में फिर  प्रयोग किया गया।उत्तर प्रदेश का पूर्वी  हिस्सा प्रियंका गांधी को दूसरा ज्योतिरादित्य सिंधिया को दिया गया।यह प्रयोग बुरी तरह असफल रहा।2019 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी तक चुनाव हार गए।एक मात्र सीट सोनिया गांधी की आई।इस हार के बाद से कांग्रेस अभी तक उभरी नही है।राहुल के इस्तीफे के बाद से सोनिया अंतरिम अध्य्क्ष बनी हुई है।सिंधिया पार्टी छोड़ कर चले गये।2019 के लोकसभा चुनाव के हार के बाद प्रियंका ने पूरी यूपी की जिम्मेदारी खुद संभाल ली।निजी सचिव के रूप में काम कर रहे धीरज श्रीवास्तव को हटा संदीप सिंह को यह जिम्मेदारी दी गई।

  इसके बाद प्रियंका ने अपनी नई टीम के साथ प्रयोग जारी रखे हुए हैं।उन्होंने अजय सिंह लल्लु को प्रदेश की जिम्मेदारी दे नई टीम का गठन किया।इसमे ब्लाक स्तर से लेकर प्रदेश तक नए चेहरे सामने लाये गए।आंदोलन की कमान प्रियंका ने खुद संभाली हुई है।प्रदेश में कहीं भी कोई घटना हो खुद पहुंच जाती है।इससे पार्टी कार्यकताओं में सक्रियता बढ़ी है।अपने स्तर पर प्रियंका ने 9 हजार न्याय पंचायतों का गठन करवाया।एक न्याय पंचायत के तहत 5 से 10 ग्राम सभाएं आती है।जिला,ब्लाक,न्याय पंचायत,ग्राम पंचायत और फिर बूथ।हर जगह नई नियक्ति की गई है।प्रभारी सचिव धीरज गुर्जर बताते हैं 15 अगस्त हर बूथ पर 10 कार्यर्ताओं की नियुक्ति हो जायेगी।पूरे प्रदेश में 1लाख 60 हजार बूथ हैं।हर एक कार्यकर्ता का पूरा डाटा पार्टी के पास होगा।प्रियंका गांधी अभी तक 15 हजार पदाधिकारियों को नियुक्त कर चुकी हैं।जमीनी स्तर पर गांव गांव में काम हो रहा है।जब चुनाव आएंगे कांग्रेस सब को चोंका देगी।धीरज के हिसाब से कांग्रेस संगठन के रूप में मजबूत हो गई है।इसमें कोई दो राय नही है कि प्रियंका यूपी को लेकर अपने हिसाब से जूझ रही है।उन्होंने इलाहाबाद में  मछुवारो पर पुलिस के अत्याचारों के बाद खुद सामने आ उनकी मदद तो की ही साथ ही निषाद ओर पिछड़े वर्ग पर पकड़ बनाने के लिये  इलाहाबाद के बसवार गांव से 1मार्च से नदी यात्रा की शुरुआत करवा दी।इस यात्रा में पार्टी के नेता शामिल होते हैं।एक माह तक चलने वाली यह यात्रा इस माह के आखिर में बलिया में समाप्त होगी।प्रियंका की कोशिश यही है पिछड़े वर्ग में कैसे सेंध लगाई जाए।25 मार्च को यूपी के बागवत में किसान रैली करने के बाद प्रियंका मध्य यूपी फिर पूर्व की तरफ जायँगी।बीच बीच मे न्याय,गांव व ब्लाक स्तर के पदाधिकारियों के साथ बैठके भी करेंगी।प्रियंका अकेला चल पार्टी में जान डालने की कोशिश तो कर रही हैं,लेकिन प्रदेश में मजबूत नेतृत्व न होने के चलते पार्टी अभी बहुत असर डालती नही दिख रही है।जानकारों का मानना है कि या तो प्रियंका खुद कमान संभाल यूपी में अभी से डेरा डालती हैं तो फिर पार्टी में जान आती दिख सकती है।

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