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Anti-CAA strike in Lucknow for two months ends due to Corona: कोरोना के चलते लखनऊ में दो महीने से चल रहा सीएए विरोधी धरना खत्म

लखनऊ।   कोरोना के प्रकोप, राजधानी सहित यूपी के 16 जिलों में लाकडाउन के चलते नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और एनआरसी के विरोध में बीते 63 दिनों से  लखनऊ के एतहासिक घंटाघर पर चल रहा महिलाओं धरना स्थगित कर दिया गया है। सोमवार सुबह धरना दे रही महिलाओं ने घंटाघर खाली कर दिया। इससे पहले रविवार को आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के उपाध्यक्ष और धर्मगुरु मौलाना कल्बे सादिक और किंग जार्ज मेडिकल विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के वरिष्ठ डाक्टर कौसर उस्मान ने महिलाओं से धरना खत्म करने की अपील की थी। कांग्रेस नेत्री व सामाजिक कार्यकर्ता सदफ ज़फर, मशहूर शायर मुनव्वर राना की बेटी और सीएए विरोध का प्रमुख चेहरा रहीं सुमैय्या राना ने भी शनिवार और रविवार को धरना स्थल पर जाकर महिलाओं से कोरोना प्रकोप के चलते धरना स्थगित करने की अपील की थी। सोमवार सुबह 7.30 बजे धरना समाप्त होने के बाद पुलिस ने कोरोना के चलते सभी महिलाओं को सुरक्षित उनके घर तक पहुंचाया ।
महिलाओं ने अपना धरना समाप्त कर दिया । और इससे पहले दो महीने से ज्यादा समय से दिन रात डटी रहीं महिलाओं ने भावुक भाषण दिए व हालात माकूल होने पर फिर लौटने व धरना शुरु करने का वादा भी किया। प्रदर्शन से हटने के बाद महिलाएं धरना स्थल पर दुपट्टा छोड़कर गई हैं।उन्होंने एक ज्ञापन भी सहायक पुलिस आयुक्त चौक को सौंपा है। जिस मे लिखा है कि कोरोना खत्म होगा तो प्रदर्शन करने वापस आएंगे। धरना स्थल पर सांकेतिक तौर पर मौजूदगी के लिए प्रदर्शनकारी महिलाएं अपना दुपट्टा छोड़ गई हैं। खाली होने के बाद लखनऊ प्रशासन ने पूरे घंटाघर क्षेत्र को सैनेटाइज कर सफाई करवाई और वहां पुलिस बल तैनात कर दिया।
दो माह से ज़्यादा चले इस प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कई बार  प्रदर्शनकरियों को हटाने का अथक प्रयास किया एक दर्जन से ज़्यादा मुक़दमे दर्ज किये प्रदर्शनकारी महिलाओं के परिवार वालों को गिरफ्तार तक किया गया । कड़कड़ाते जाड़े में पुलिस ने कम्बल छीने और महिलाओं तक खाने पीने का सामान तक नही पहुंचने दिया । प्रदर्शनकरियों के समर्थन में आए लोगों को परेशान किया गया, कईयों पर मुकदमे लादे गए और हिरासत में लिया गया । धरना दे रही महिलाओं का हौसला तोड़ने के लिए घण्टाघर पर बने बाथरूम तोड़ डाले गए और टेंट तक नही लगने दिया । इस बीच कई बार भयानक ठंड पड़ी बारिश हुई और ओले गिरे । धरने के दौरान 2 प्रदर्शनकारी महिलाओं की तबियत खराब होने से जान तक चली गयी ।
कोरोना के संक्रमण की शुरुआत के बाद से धरना स्थगित करने के प्रयास किए जा रहे थे। महिलाओं को संगठित करने में जुटे लोगों ने इसके लिए समझाना भी शुरु किया था और लोगों को राजी भी कर लिया था पर इसी बीच पुलिस ने दो बार धरनास्थल पर जबरन लोगों को धमकाने और मुकदमे दर्ज करने का काम कर महिलाओं को भड़का दिया
-अजय त्रिवेदी
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