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क्या आप भी अपने फिगर की चिंता में बच्चे को नहीं कराती स्तनपान

-सिर्फ आपका बच्चा ही नहीं आप भी खतरे में हैं

भारत समेत दुनिया के कुल 140 देशों में हर साल 1 अगस्त से 7 अगस्त तक वर्ल्ड ब्रेस्ट फीडिंग वीक मनाया जाता है। ज्यादा से ज्यादा लोगों के बीच ब्रेस्ट फीडिंग का महत्व और इसके फायदों के प्रति जागरूकता फैलाना ही वर्ल्ड ब्रेस्ट फीडिंग वीक मनाने का मुख्य उद्देश्य है। वर्ल्ड ब्रेस्ट फीडिंग वीक के दौरान जगह-जगह पर जागरूकता अभियान भी चलाया जाता है। हम सभी जानते हैं कि किसी भी नवजात शिशु के लिए मां का दूध अमृत समान होता है। लेकिन मौजूदा समय में कई महिलाएं अपने फिगर (शारीरिक बनावट) को लेकर काफी गंभीर रहती हैं और इसी वजह से वे अपने बच्चे को ब्रेस्ट फीडिंग नहीं कराती हैं।

बच्चे के लिए अमृत समान है मां का दूध

वर्ल्ड ब्रेस्ट फीडिंग वीक और बच्चे के लिए मां के दूध के महत्व को लेकर गायनेकोलॉजिस्ट का कहना है कक इस बात में कोई दो राय नहीं है कि बच्चे के लिए मां का दूध अमृत समान है। मां के दूध में वो सभी जरूरी पोषक तत्व मौजूद होते हैं जो एक नवजात बच्चे के विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। मां के दूध में प्रोटीन, कैलोरी, विटामिन, एंटीबॉडी समेत कई आवश्यक तत्व पाए जाते हैं। यही वजह है कि बच्चे के बेहतर विकास के लिए मां का दूध बहुत जरूरी होता है वरना उनके विकास में कई तरह की अड़चनें आती हैं।

मां का दूध पीने से बच्चे को नहीं होती ये दिक्कतें

नियमित रूप से मां का दूध पीने वाला बच्चा स्वस्थ रहता है और वह मां का दूध न पीने वाले बच्चे के मुकाबले कम बीमार पड़ता है। मां के दूध में मौजूद रहने वाले पोषक तत्वों की मदद से बच्चे को एलर्जी, इंफेक्शन, पेट से जुड़ी समस्याएं, अंडर फीडिंग और ओवर फीडिंग का भी डर नहीं रहता है। इतना ही नहीं, बच्चे को मां के दूध का फायदा सिर्फ बचपन में ही नहीं बल्कि बड़े होने पर भी मिलता रहता है। ऐसे बच्चों का आईक्यू लेवल काफी शानदार रहता है और उन्हें डायबिटीज जैसी बीमारियों का खतरा भी काफी कम रहता है। इस तरह से देखा जाए तो मां के दूध से बच्चे को किसी तरह का कोई नुकसान नहीं है और इसके सिर्फ फायदे ही फायदे हैं।

ब्रेस्ट फीडिंग कराने वाली महिलाओं को भी हैं कई फायदे

ब्रेस्ट फीडिंग से सिर्फ बच्चे को ही नहीं बल्कि मां को भी कई तरह के फायदे मिलते हैं। ब्रेस्ट फीडिंग कराने के दौरान महिलाओं का एक हार्मोन रिलीज होता है, जिसे ऑक्सीटोसिन कहा जाता है। ये हार्मोन महिलाओं के बच्चेदानी को एक बार फिर से पहले जैसे आकार में लाने में काफी मदद करता है। इसके अलावा कुछ और भी फायदे हैं जो लंबे समय के लिए फायदे पहुंचाते हैं। प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं का बढ़ा हुआ वजन ब्रेस्ट फीडिंग कराने से फिर कम हो जाता है। इतना ही नहीं, बच्चे को दूध पिलाने वाली महिलाओं में तुलनात्मक रूप से ओवरी कैंसर और ब्रेस्ट कैंसर का खतरा भी कम होता है।

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