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गर्मी में लू से बचें, बतरें ये सावधानियाँ

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गर्मी में चक्कर आने, घबराहट सिरदर्द और कमजोरी जैसे लक्षण होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। थोड़ी सी भी लापरवाही आप पर भारी पड़ सकती है। ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से हर साल तापमान के बढ़ते ग्राफ को तो रोका नहीं जा सकता है, लेकिन अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखकर हीट स्ट्रोक से बचा जा सकता है। तेज धूप और गर्म हवाओं को लेकर बरती गई जरा सी लापरवाही स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। ज्यादा देर तक तेज धूप और गर्मी के बीच रहने पर शरीर का तापमान नियंत्रक तंत्र फेल होने लगता है और शरीर का तापमान सामान्य नहीं हो पाता। इस अवस्था को सन स्ट्रोक या लू लगना कहते हैं। शरीर में पानी की कमी होने पर सन स्ट्रोक की आशंका और बढ़ जाती है। तुरंत इसका उपचार न करने पर शरीर का तापमान इतना बढ़ जाता है कि किडनी, लिवर, हृदय, दिमाग आदि पर विपरीत असर पडऩे लगता है।

लू लगने का कारण
गर्मी में बढ़े हुए तापमान को कम करने के लिए हमारे शरीर में रक्त प्रवाह का बढऩा, पसीना निकलना, सांस के जरिए गर्म हवाओं को बाहर निकालना जैसी कई क्रियाएं होती हैं। रक्त का तापमान सामान्य से ज्यादा होने पर मस्तिष्क के मध्य में स्थित हाइपोथैलेमस भाग संचार तंत्र को रक्त प्रवाह बढ़ाने और रक्त वाहिनियों, खास तौर पर त्वचा में स्थित वाहिनियों को फैलाने का संकेत देता है। फैली हुई वाहिनियों से जितना ज्यादा रक्त प्रवाह होता है, उतनी ही तेजी से रक्त का तापमान कम होता है। ऐसा नहीं होने पर स्वेद ग्रंथियां सक्रिय हो जाती हैं और पसीने के जरिए शरीर का तापमान नियंत्रित करती हैं। इसके बावजूद रक्त का तापमान कम नहीं होने पर लू लगने के लक्षण दिखाई देने लगते हैं।

लू के लक्षण
लू लगने पर आमतौर पर तीन अवस्थाएं नजर आती हैं। पहली अवस्था में रोगी के शरीर से पसीना नहीं निकलता है। त्वचा खुश्क होने के साथ ही धीरे-धीरे उसकी रंगत उड़ जाती है। रोगी बेहोशी, थकावट और कमजोरी महसूस करने लगता है और नब्ज की गति बढ़ जाती है। दूसरी अवस्था में सिर में तेज दर्द, त्वचा नीली पडऩे लगती है और सांस की गति धीमी हो जाती है। तीसरी अवस्था में तेज बुखार के साथ सांस की गति तेज हो जाती है और शरीर पूरी तरह नीला पड़ जाता है। यह बेहद घातक अवस्था होती है। लू लगने पर शरीर के बाहरी तापमान से ज्यादा आंतरिक तापमान होता है। इसे नापने के लिए गुदा से तापमान लिया जाता है जिसे लिए अलग तरह का थर्मामीटर होता है।

पानी की न हो कमी
लू लगने पर रोगी को नींबू पानी, ओआरएस का घोल या ग्लूकोज थोड़े-थोड़े समय पर पिलाते रहना चाहिए। बार-बार उल्टी व दस्त से शरीर में होने वाली पानी की कमी को यह घोल पूरा करते हैं। इसके अलावा नारियल पानी, बेल का शर्बत, आम पना, राई का पानी जैसी तरल चीजें लगातार पिलाने से फायदा होता है। शरीर में पानी की कमी नहीं होनी चाहिए, इसलिए खूब पानी पीना चाहिए और पानी वाले फलों तरबूज, ककड़ी, खीरा आदि का भी सेवन करना चाहिए।

ऐसे दें प्राथमिक चिकित्सा
लू लगने पर सबसे पहले शरीर के तापमान को कम करना जरूरी होता है। इसके लिए सिर और पूरे बदन पर गीला कपड़ा या तौलिया रखें। हथेली और तलवे पर बर्फ रगड़ें। रोगी को हवादार जगह पर लिटाएं और शरीर का तापमान कम होने तक ठंडक देना जारी रखें। रोगी को लिटाते वक्त पैरों के नीचे तकिया लगाकर थोड़ा ऊंचा कर दें। हाथ और पैरों पर मसाज करें ताकि कम तापमान वाले रक्त का संचार मस्तिष्क और पूरे शरीर में हो सके। अगर रोगी होश में है तो उसे घूंट-घूंट करके ठंडा पानी या ओआरएस का घोल पिलाएं।
गर्मी को मात देने का सबसे बेहतरीन तरीका है शरीर में पानी की कमी नहीं आने दें। जितना हो सके ठोस डाइट की बजाए लिक्विड डाइट ही लें। लू लगने पर प्राथमिक उपचारों में प्राकृतिक उपचारों को ही प्राथमिकता दें। ज्यादा परेशानी होने पर चिकित्सकीय परामर्श लेने में बिल्कुल लापरवाही ना बरतें।

इलेक्ट्रोलाइट न हो कम
पोटेशियम, क्लोरीन और सोडियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट की कमी पूरा करने के लिए छाछ, नींबू पानी आदि का सेवन करना चाहिए। चाय, कॉफी, कोल्ड ड्रिंक्स जैसे कैफीन युक्त पेय पदार्थों का सेवना कम करना चाहिए क्योंकि इनसे डीहाइड्रेशन की आशंका ज्यादा रहती है।

इन्हें ज्यादा खतरा
छोटे बच्चों, बूढ़ों और धूप में ज्यादा घूमने या काम करने वालों को लू लगने का ज्यादा खतरा रहता है। बच्चों में तापमान नियंत्रक प्रणाली पूरी तरह से विकसित नहीं होने के कारण लू लगने की आशंका दोगुनी रहती है जबकि बुजुर्गों में पानी की कमी होने से खतरा बढ़ जाता है। ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और थायराइड से परेशान लोगों को ज्यादा एहतियात रखनी चाहिए। चक्कर आना, घबराहट सिरदर्द और कमजोरी जैसे लक्षण होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

ऐसे करें बचाव
धूप में निकलने से पहले खूब पानी पीएं। एक्सरसाइज करने के दौरान भी थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहें। पानी पीने के लिए प्यास लगने का इंतजार न करें, खासतौर पर जब आपको पसीना आ रहा हो। तेज धूप में न निकलें। अगर निकलना हो तो टोपी पहनें या किसी कपड़े से सिर को अच्छी तरह से ढक लें। हल्के रंग के ढीले ढाले सूती कपड़े पहनें। हल्का और कम तेल मसाले का खाना खाएं और खाली पेट बाहर न निकलें। कुछ दवाएं जिनसे रक्त धमनी संकीर्ण होती हैं उनसे भी लू लगने का खतरा रहता है। इनमें एंटी डिप्रेसेंट, पेनकिलर्स आदि दवाएं शामिल हैं।

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