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Special on Women’s Day: महिला दिवस पर विशेष-इनसे सीखें-बेटी के जन्म पर डाक्टर नहीं लेती कोई फीस

बिन बेटी हम समाज की कल्पना भी नहीं कर सकते, पर इसे विडंबना हीं कहेंगे की आज भी हमारे समाज में बेटी को वो दर्जा नहीं मिल पाया है जिसकी वो हक़दार है। सरकार भले ही भ्रूण हत्या पर रोक लगा चुकी है, बावजूद आज भी चोरी-छिपे कोख में पल रही कन्या भ्रूण हत्या हो रही है। विश्व महिला दिवस पर हम बात करेंगे एक ऐसे शख्सियत से जो समाज के लिए मिसाल पेश कर रही हैं। जी हां हम बात कर रहे हैं डॉ. शिप्रा धर की जो अपने अस्पताल में लड़कियों के जन्म लेने पर कोई भी फीस या डिलीवरी चार्ज नहीं लेती हैं। डॉक्टर शिप्रा धर ने लड़कियों के जन्म को बढ़ाना देने के लिए एक मुहिम शुरू की है, इस अनोखी मुहीम के तहत उनके नर्सिंग होम में यदि कोई महिला (Girls Birth ) बच्ची को जन्म देती है, तो उससे कोई डिलिवरी चार्ज नहीं लिया जाता। उनके नर्सिंग होम में अब तक 400 से ज्यादा बेटियों ने जन्म लिया है और उनके जन्म पर कोई चार्ज नहीं लिया गया है। डॉ. शिप्रा धर ने अजन्मी बेटियों को गर्भ में ही मारने को रोकने के लिए और लोगों की सोच में बदलाव के लिए यह सराहनीय प्रयास शुरू किया है।डॉ. शिप्रा धर का कहना है कि लोगों में बेटियों के प्रति नकारात्मक सोच अब भी है। जब परिजनों को पता चलता है कि बेटी ने जन्म लिया है तो वह मायूस हो जाते हैं। गरीबी के कारण कई लोग तो रोने भी लगते हैं, इसी सोच को बदलने की वह कोशिश कर रही हैं ताकि अबोध कन्या को लोग खुशी से अपनाएं। डॉक्टर शिप्रा धर ने बताया कि इसीलिए वह बेटी के जन्म पर फीस नहीं लेती हैं और मरीज से बेड चार्ज भी नहीं लिया जाता, यदि ऑपरेशन करना पड़े तो वह भी मुफ्त है।

काशी के सांसद और देश के पीएम नरेंद्र मोदी भी डॉक्टर शिप्रा धर की तारीफ कर चुके हैं। पीएम मोदी जब 2019 में अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी आये थे तो उन्हें ये जानकारी मिली कि
डॉ शिप्राधर द्वारा उनके अस्पताल में बेटी पैदा होने पर कोई भी फीस नही ली जाती है, यह सुनकर पीएम मोदी बहुत प्रभावित हुए थे। पीएम मोदी ने डॉक्टर शिप्रा धर के साथ मुलाकात की और मंच से अपने संबोधन में डॉक्टर शिप्रा धर का जिक्र करते हुए कहा कि हमारे बीच एक बहन जी हैं जो समाज के लिए बहुत अनुकरणीय कार्य कर रही हैं। इनके इस मुहिम से बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओं की मुहिम को बल मिलेगा।

यही नहीं डॉ शिप्रा धर ने गरीब लड़कियों की शिक्षा का भी बीड़ा उठाया है। वह नर्सिंग होम में ही लड़कियों को पढ़ाती हैं। घरों में काम करने वाली कई आया की बच्चियां उनके पास पढ़ने आती हैं।आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों को वोकेशनल ट्रेनिंग भी दिलवाती हैं ताकि निर्धन बेटियां स्वावलंबी बनें। डॉ. शिप्रा ने बताया कि उनके पति डॉ. मनोज कुमार श्रीवास्तव फिजीशियन है और उनसे ही उन्हें यह करने की प्रेरणा मिली और वो भी उनका पूरा साथ देते हैं।डॉक्टर शिप्रा धर का मानना है कि सनातन काल से ही बेटियों को लक्ष्मी का दर्जा दिया गया है, जहां बेटी के जन्म पर खुशी नहीं, वह पैसा किस काम का। अगर बेटियों के प्रति समाज की सोच बदल सके तो वे खुद को सफल समझें।

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