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Chandigarh’s daughter in NASA: चंडीगढ़ की बेटी ने नासा में लहराया परचम, दुनिया भर में भारत का डंका

चंडीगढ़ अंतरिक्ष मिशन में देश का नाम कल्पना चावला ने रोशन किया था और इसी कड़ी में भारत के नाम एक औऱ उपलब्धि जुड़ गई है। वैंडी के नाम से जानी जाने वाली वंदना वर्मा नासा के मार्स मिशन में बेहद अहम भूमिका निभा रही हैं। वे पर्सीवरेंस रोवर के रोबोटिक ऑपरेशन की चीफ इंजीनियर हैं जो कि देश के लिए किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है। शुरु से स्टडी में बेहद प्रभावी रही वैंडी का जन्म पंजाब के हलवारा में हुआ और उन्होंने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज ( पेक, चंडीगढ़) से इलैक्ट्रीकल में पढाई की। इसके बाद कार्नेगी मेलन यूनिवर्सिटी से रोबोटिक्स में पीजी कोर्स करने के बाद 2005 में वहीं से पीएचडी की। इस क्षेत्र में शुरु से ही उनकी काबिलियत के चर्च थे और फिर 2007 में वो वैंडी नासा की जेट प्रोपल्शन लेबोरेट्री में शामिल हो गई। उनकी उपलब्धियों के लिए उनको पेक के शताब्दि कार्यक्रम में सम्मानित किया जाएगा। ये भी बता दें कि पेक से पढ़ी एक और होनहार एल्युमनाई कविता कौर जो कि 1995 बैच की छात्रा रही हैं, वे मार्स मिशन 2020 में कई अहम भूमिकाएं निभाई हैं। वो वहां ग्राउंड डाटा सिस्टम इंजीनियर , जीडीएस इंटीग्रेशन और टेस्ट इंजीनियर रही हैं।

वैंडी की भूमिका बेहद अहम है मार्स अभियान में, जानिए

वैंडी की इस उपलब्धि से देश का हर नागरिक गौरांवित महसूस कर रहा है। लेकिन यहां ये समझना भी बेहदह जरुरी है नासा के मार्स अभियान में उनका क्या रोल व क्या कार्य है। उन्होंने मार्स रोवर का सॉफ्टवेयर तैयार किया है। उनके द्वारा लिखा गया व डेवल्प की गई प्रोग्रामिंग लैंग्वेज नासा की कई ऑटोमेशन तकनीक में इस्तेमाल किया जाता है। साल 2008 से वो मार्स पर रोवर ड्राईव कर रही हैं। इसके अलावा वहां रोबोटिक आर्म और सैंपलिंग सिस्टम को रोवर प्लानंर के रुप में ड्राइव कर रही हैं। नासा का मार्स रोवर 18 फरवरी 2021 को वहां लैंड किया था। लैंडिंग के दौरान एक उच्च रेसोल्य़ूशन वाली इमेज भी ली गई।

परिवार के बारे भी जानिए

उनकी बहन वंदना प्रो अर्चना सेक्टर 32 स्थित एसडी कॉलेज में आंग्ल भाषा की प्रोफेसर हैं। उनके पिता वीके वर्मा मिग 21 फाइटर पायलय व एयर मार्शल ( रिटायर्ड) रहे हैं। बता दें कि अर्चना वर्मा के पति वीपी सिंह पंजाब सरकार में बतौर प्रिंसिपल सेक्रेटरी तैनात हैं।

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वैंडी वर्मा के बारे में एक बार जानिए

-हलवाड़ा में जन्म के बाद वो एक शहर से दूसरे शहर में शिफ्ट होती रही हैं, कारण था उनके पिता इंडियन एयर फोर्स में पायलट थे, उनकी स्कूलिंग हलवाड़ा के केंद्रीय विधालय से हैं। अपनी पढ़ाई के दौरान उन्होंने भी पायलट का लाइसेंस ले लिया था।

-साल 2005 में उन्होंने पीएचडी पूरी की थी जिसमें थीसिस विषय ट्रैक्टेबल पार्टिकल फिल्टर्स फॉर रोबोट फॉल्ट डायग्नोसिस रहा

-प्लक्सिल , एक ओपन सोर्स प्रोग्रामिंग लैंग्वेज की वो को-राइटर रही हैं

-उनको कई अवार्ड मिले जिनमें नासा की तरफ से नासा ऑनर्स अवार्ड्स व दो एमएसएल अवार्ड्स शामिल हैं।

वंदना वर्मा ने दुनिया में भारत का नाम रोशन किया है और उनकी उपलब्धि पर पूरे देश का नाज है। वंदना बचपन से ही अंतरिक्ष साइंटिस्ट बनना चाहती थी और अपनी मेहनत के बूते ऐसा कर भी पाई। पेक से अध्ययन के बाद वो उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका से उन्हें स्कोलरशिप मिल गई। इंडिया में पढ़ाई के दौरान वो स्टडी में पूरी तरह से पारंगत थी।

प्रो अर्चना, वंदना की बहन

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