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शारदीय नवरात्रि 2022 के दूसरा दिन इस तरह करें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, जानें मंत्र, विधि, भोग, आरती, स्वरूप

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नवदुर्गा के दूसरे रूप को ब्रह्मचारिणी कहते है। नवरात्रि के दूसरे दिन इसी रूप की पूजा की जाती है। जैसा कि नाम से ही पता चल रह है, माता ब्रह्मचारिणी ब्रह्म यानि तपस्या का आचरण करने वाली हैं। इनका दूसरा नाम तपस्चारिणी भी है। इस साल नवरात्रि 26 सितंबर 2022 से शुरू हैं और 27 सितंबर को ब्रह्मचारिणी मां की पूजा कर उन्हें प्रसन्न किया जायेगा। आइए जानते हैं मां के इस रूप की विशेषता क्या है। साथ ही जानेंगे इसकी पूजा की विधि, मंत्र, आरती और मां का भोग, इनका पूजन कैसे करें।

मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप

ब्रह्मचारिणी इस लोक के समस्त चर और अचर जगत की विद्याओं की ज्ञाता हैं। इनका स्वरूप श्वेत वस्त्र में लिपटी हुई कन्या के रूप में है, जिनके एक हाथ में अष्टदल की माला और दूसरे में कमंडल है। यह अक्षयमाला और कमंडल धारिणी ब्रह्मचारिणी नामक दुर्गा शास्त्रों के ज्ञान और निगमागम तंत्र-मंत्र आदि से संयुक्त हैं। भक्तों को यह अपनी सर्वज्ञ संपन्न विद्या देकर विजयी बनाती हैं। ब्रह्मचारिणी का स्वरूप बहुत ही सादा और भव्य है। अन्य देवियों की तुलना में वह अतिसौम्य, क्रोध रहित और तुरंत वरदान देने वाली देवी हैं।

मां ब्रह्मचारिणी का पूजा मंत्र

या देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

दधाना कपाभ्यामक्षमालाकमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।
ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥

मां ब्रह्मचारिणी का भोग

मां ब्रह्मचारिणी को भोग मिश्री, दूध और पंचामृत का भोग लगाना चाहिए।

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि

  • मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने के लिए सबसे पहले ब्रह्ममुहूर्त पर उठकर स्नान कर लें।
  • पूजा के लिए सबसे पहले आसन बिछाएं इसके बाद आसन पर बैठकर मां की पूजा करें।
  • इसके बाद माता को फूल, अक्षत, रोली, चंदन आदि चढ़ाएं।
  • ब्रह्मचारिणी मां को भोगस्वरूप पंचामृत चढ़ाएं। इसके साथ ही मिठाई का भोग लगाएं।
  • इसके साथ ही माताको पान, सुपारी, लौंग अर्पित करें।
  • इसके उपरांत देवी ब्रह्मचारिणी मां के मंत्रों का जाप करें और फिर मां की आरती करें।
मां ब्रह्मचारिणी की आरती

जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता।
जय चतुरानन प्रिय सुख दाता।
ब्रह्मा जी के मन भाती हो।
ज्ञान सभी को सिखलाती हो।
ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा।
जिसको जपे सकल संसारा।
जय गायत्री वेद की माता।
जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता।
कमी कोई रहने न पाए।
कोई भी दुख सहने न पाए।
उसकी विरति रहे ठिकाने।
जो तेरी महिमा को जाने।
रुद्राक्ष की माला ले कर।
जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर।
आलस छोड़ करे गुणगाना।
मां तुम उसको सुख पहुंचाना।
ब्रह्माचारिणी तेरो नाम।
पूर्ण करो सब मेरे काम।
भक्त तेरे चरणों का पुजारी।
रखना लाज मेरी महतारी।

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