Homeमनोरंजनतेनाली रामा: सोने के आम Mangoes Of Gold

तेनाली रामा: सोने के आम Mangoes Of Gold

ब्राह्मण लोग राजा की सरलता तथा भोलेपन का लाभ उठा रहे हैं, सो उसने उन ब्राह्मणों को पाठ पढ़ाने की एक योजना बनाई।

आज समाज डिजिटल, अम्बाला। 
Mangoes Of Gold : राजा कृष्णदेव राय की माता बहुत वृद्ध हो गई थीं। वे बहुत बीमार पड़ गई, उन्हें लगा कि अब वे शीघ्र ही मर जाएंगी। उन्हें आम बहुत पसंद थे इसलिए जीवन के अंतिम दिनों में वे आम दान करना चाहती थीं सो उन्होंने राजा से ब्राह्मणों को आमों को दान करने की इच्छा प्रकट की। वे समझती थीं कि इस प्रकार दान करने से उन्हें स्वर्ग की प्राप्ति होगी।

Mangoes Of Gold

अपनी मां की अंतिम अपूर्ण इच्छा के बारे में बताया

सो कुछ दिनों बाद राजा की माता अपनी अंतिम इच्छा की पूर्ति किए बिना ही मृत्यु को प्राप्त हो गईं। उनकी मृत्यु के बाद राजा ने सभी विद्वान ब्राह्मणों को बुलाया और अपनी मां की अंतिम अपूर्ण इच्छा के बारे में बताया। कुछ देर तक चुप रहने के पश्चात ब्राह्मण बोले कि‘यह तो बुरा हुआ महाराज, अंतिम इच्छा के पूरा न होने की दशा में तो उन्हें मुक्ति ही नहीं मिल सकती। वे प्रेत योनि में भटकती रहेंगी। महाराज आपको उनकी आत्मा की शांति का उपाय करना चाहिए। तब महाराज ने उनसे माता की अंतिम इच्छा की पूर्ति का उपाय पूछा।

Read Also : तेनालीराम ने चोरों को पकड़ा TenaliRam Caught Thieves

अंतिम इच्छा पूरी न होने के कारण प्रेत-योनि में भटक रही होंगी

ब्राह्मण बोले कि उनकी आत्मा की शांति के लिए आपको उनकी पुण्यतिथि पर सोने के आमों का दान करना पडेगा। अतः राजा ने मां की पुण्यतिथि पर कुछ ब्राह्मणों को भोजन के लिए बुलाया और प्रत्येक को सोने से बने आम दान में दिए। जब तेनालीराम को यह पता चला, तो वह तुरंत समझ गया कि ब्राह्मण लोग राजा की सरलता तथा भोलेपन का लाभ उठा रहे हैं, सो उसने उन ब्राह्मणों को पाठ पढ़ाने की एक योजना बनाई। अगले दिन तेनालीराम ने ब्राह्मणों को निमंत्रण-पत्र भेजा। उसमें लिखा था कि तेनालीराम भी अपनी माता की पुण्यतिथि पर दान करना चाहता है, क्योंकि वे भी अपनी एक अधूरी इच्छा लेकर मरी थीं।जबसे उसे पता चला है कि उसकी मां की अंतिम इच्छा पूरी न होने के कारण प्रेत-योनि में भटक रही होंगी।

Mangoes Of Gold
Mangoes Of Gold

ब्राह्मणों को स्वादिष्ट भोजन परोसा गया

वह बहुत ही दुखी है और चाहता है कि जल्दी उसकी मां की आत्मा को शांति मिले। ब्राह्मणों ने सोचा कि तेनालीराम के घर से भी बहुत अधिक दान मिलेगा, क्योंकि वह शाही विदूषक है। सभी ब्राह्मण निश्चित दिन तेनालीराम के घर पहुंच गए। ब्राह्मणों को स्वादिष्ट भोजन परोसा गया। जन करने के पश्चात सभी दान मिलने की प्रतीक्षा करने लगे। तभी उन्होंने देखा कि तेनालीराम लोहे के सलाखों को आग में गर्म कर रहा है।पूछने पर तेनालीराम बोला, कि ‘मेरी मां फोड़ों के दर्द से परेशान थीं। मृत्यु के समय उन्हें बहुत तेज दर्द हो रहा था। इससे पहले कि मैं गर्म सलाखों से उनकी सिंकाई करता, वह मर चुकी थी। अब उनकी आत्मा की शांति के लिए मुझे आपके साथ वैसा ही करना पड़ेगा, जैसी कि उनकी अंतिम इच्छा थी। यह सुनकर ब्राह्मण बौखला गए। वे वहां से तुरंत चले जाना चाहते थे।वे गुस्से में तेनालीराम से बोले कि हमें गर्म सलाखों से दागने पर तुम्हारी मां की आत्मा को शांति मिलेगी?

Mangoes Of Gold

हम वे सोने के आम तुम्हें दे देते हैं

‘नहीं महाशय, मैं झूठ नहीं बोल रहा। यदि सोने के आम दान में देने से महाराज की मां की आत्मा को स्वर्ग में शांति मिल सकती है तो मैंअपनी मां की अंतिम इच्छा क्यों नहीं पूरी कर सकता? यह सुनते ही सभी ब्राह्मण समझ गए कि तेनालीराम क्या कहना चाहता है। वे बोले, ‘तेनालीराम, हमें क्षमा करो। हम वे सोने के आम तुम्हें दे देते हैं। बस तुम हमें जाने दो।’तेनालीराम ने सोने के आम लेकर ब्राह्मणों को जाने दिया, परंतु एक लालची ब्राह्मण ने सारी बात राजा को जाकर बता दी।

Read Also : अकबर बीरबल: बिना काटे लकड़ी का टुकड़ा छोटा कैसे होगा Wood Without Cutting

Read Also : तेनालीराम : शिल्पी की अद्भुत मांग Amazing Demand For Craftsmen

तुम इतने लालची कैसे हो गए

यह सुनकर राजा क्रोधित हो गए और उन्होंने तेनालीराम को बुलाया। वे बोले कि तेनालीराम यदि तुम्हें सोने के आम चाहिए थे, तो मुझसे मांग लेते। तुम इतने लालची कैसे हो गए कि तुमने ब्राह्मणों से सोने के आम ले लिए?
महाराज, मैं लालची नहीं हूं, अपितु मैं तो उनकी लालच की प्रवृत्ति को रोक रहा था। यदि वे आपकी मां की पुण्यतिथि पर सोने के आम ग्रहण कर सकते हैं, तो मेरी मां की पुण्यतिथि पर लोहे की गर्म सलाखें क्यों नहीं झेल सकते? ‘राजा तेनालीराम की बातों का अर्थ समझ गए। उन्होंने ब्राह्मणों को बुलाया और उन्हें – भविष्य में लालच त्यागने को कहा।

SHARE
RELATED ARTICLES

Most Popular