Home धर्म The lunar eclipse on Guru Purnima will not be seen in India: गुरु पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण, भारत में नहीं दिखेगा, न सूतक लगेगा।

The lunar eclipse on Guru Purnima will not be seen in India: गुरु पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण, भारत में नहीं दिखेगा, न सूतक लगेगा।

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5 जुलाई को धनु राशि में चंद्र ग्रहण लग रहा है. जुलाई माह की यह एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना है. ज्योतिष शास्त्र में सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण को शुभ फल देना वाला नहीं माना गया है. वैज्ञानिकों ,खगोलविदों और ज्योतिषियों के लिए साल 2020 बहुत ही रोचक रहने वाला है। धनु राशि में 30 जून को देव गुरु बृहस्पति ने प्रवेश किया. जहां पहले से ही राहु मौजूद है. ग्रहण के दौरान बृहस्पति पर राहु की दृष्टि धनु राशि को प्रभावित करेगी. 5 जून से 5 जुलाई 2020 तक यानी एक माह के अंदर तीसरा ग्रहण है। इस दिन सूर्य मिथुन राशि में होगें और पूर्णिमा तिथि रहेगी।

चंद्र ग्रहण: समय

उपच्छाया से पहला स्पर्श: 08:37 प्रात:

परमग्रास चन्द्र ग्रहण: 09:59 प्रात:

उपच्छाया से अन्तिम स्पर्श: 11:22 प्रात:

ग्रहण अवधि: 02 घण्टे 43 मिनट 24 सेकेंड

ग्रहण दुनिया के कुछ ही इलाकों में दिखाई देगा। ये ग्रहण दक्षिण एशिया के कुछ इलाकों नॉर्थ और साउथ अमेरिका, यूरोप के देशों और पश्चिमी अफ्रीकी देशों में अमेरिका, और ऑस्ट्रेलिया में दिखाई देगा। इस ग्रहण में चंद्रमा और सूर्य के बीच पृथ्वी होती है लेकिन पृथ्वी की बाहरी छाया ही चंद्रमा को छू पाती है ऐसे में चंद्रमा पूरी तरह से गायब नहीं होता, बल्कि इसका एक किनारा ही छाया से ढक जाता है।

चंद्रग्रहण भारतीय समयानुसार दिन में है इसलिए यहां के लोगों को दिखाई नहीं देगा। हालांकि यह 2 घंटे 23 मिनट तक रहने वाला ग्रहण होगा।

लास एंजिल्स में 4 जुलाई रात 8 बजकर 5 मिनट से शुरू होकर 10 बजकर 52 मिनट तक दिखाई देगा। यह पौने तीन घंटे तक देखा जा सकेगा। केपटाउन में 5 जुलाई को सुबह 5 बजे तक खत्म होगा। इसके बाद 30 नवंबर को चंद्रग्रहण व 14 दिसंबर 2020 को टोटल सूर्यग्रहण होगा। इसे भी हम भारत से नहीं देख पाएंगे।

चंद्र ग्रहण का प्रभाव सभी राशियों पर पड़ता है. देश दुनिया पर भी इसका प्रभाव रहता है.

5 जुलाई को लगने वाले चंद्र ग्रहण में सूतक काल मान्य नहीं है.

इस ग्रहण को उपछाया ग्रहण माना जा रहा है. जब उपछाया ग्रहण होता है तो सूतक नहीं लगता है. इसलिए भोजन और पूजा आदि कार्य किए जा सकते हैं. लेकिन गर्भवती महिलाएं विशेष ध्यान रखें और नियमों का पालन करें.

बेशक यह ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा फिर भी हर ग्रहण का देशों , मनुष्यों ,प्रकृति, वनस्पति, मौसम, जलवायु आदि पर राशि अनुसार प्रभाव अवश्य पड़ता है। इस ग्रहण से प्राकृतिक आपदाओं, सीमा विवाद, जल प्रलय, बाढ़ आदि की आशंकाओं से इंकार नहीं किया जा सकता। इसकी संभावना 41 दिन तक बनी रहती है।

जहां तक मनुष्यों पर चंद्र ग्रहण के प्रभाव का विश्लेषण किया जाए तो यह 8 राशियों के लिए कल्याणकारी ही है। शेष 4 के लिए अनिष्टकारी नहीं कह सकते अतः इस ग्रहण के राशिफल से घबराने की आवश्यकता नहीं है। इस ग्रहण के फल का प्रभाव 30 दिन तक रहेगा।

यह राशिफल चंद्र राशि के अनुसार है।

मेष – राशि वालों के लिए सौभाग्यवद्धक ।

बृष- विरोधियों से सावधान रहें।

मिथुन- निवेश के लिए अच्छा समय।

कर्क- जल से उत्पन्न बीमारी से सावधान रहें।

सिंह- पंचम भाव के कारण व्यापार , संतान पक्ष से विवाह संबंधी अच्छे समाचार मिलेंगे।

कन्या- प्रापर्टी से लाभ, ननिहाल से शुभ समाचार, माता की सेहत का ध्यान रखें।

तुला- ग्रहण का प्रभाव सम रहेगा।

बृश्चिक- जहां चोटादि लगने की संभावना हो वहां सचेत रहें।

धनु- इस राशि में ग्रहण लगना हानिकारक होने की बजाय सकारात्मक प्रभाव रहेगा।

मकर- संक्रमण तथा गुप्त शत्रुओं से सावधानी बरतें।

कुंभ- ग्रहण का प्रभाव लाभ भाव में होने से ,लॉकडाउन के कारण रुके व्यापार में गति आएगी।

मीन- राशि के लिए ग्रहण लक्की है, महीने में कुछ शुभ समाचार मिलेंगे।

2020 में कुल ग्रहण

– पहला ग्रहण: 10-11 जनवरी, चंद्र ग्रहण (लग चुका है)

– दूसरा ग्रहण: 5 जून, च्रद्र ग्रहण (लग चुका है)

– तीसरा ग्रहण: 21 जून, यह सूर्य ग्रहण (लग चुका है)

– चौथा ग्रहण: 05 जुलाई

– पांचवा ग्रहण: 30 नवंबर को लगेगा, यह चंद्र ग्रहण होगा

– छठा ग्रहण: 14 दिसंबर को लगेगा, यह सूर्य ग्रहण होगा

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