Magh Purnima: माघ पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान को क्यों माना जाता है अश्वमेध यज्ञ के समान?

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Magh Purnima: माघ पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान को क्यों माना जाता है अश्वमेध यज्ञ के समान?
Magh Purnima: माघ पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान को क्यों माना जाता है अश्वमेध यज्ञ के समान?

जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
Magh Purnima, (आज समाज), नई दिल्ली: हिंदू धर्म में माघ महीने की पूर्णिमा का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान करने से मनुष्य के जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं। साल 2026 में माघ पूर्णिमा का यह पावन पर्व 1 फरवरी को मनाया जाएगा। माना जाता है कि माघ पूर्णिमा के दिन खुद देवता रूप बदलकर धरती पर आते हैं और प्रयागराज में संगम तट पर स्नान करते हैं। आइए जानते हैं इस दिन का महत्व, शुभ मुहूर्त और पूजा की सही विधि।

अश्वमेध यज्ञ के समान क्यों मिलता है फल?

पौराणिक कथाओं और मत्स्य पुराण में उल्लेख है कि माघ मास के दौरान सभी तीर्थ स्थल गंगाजल में निवास करते हैं। विशेष रूप से पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान करने का फल अश्वमेध यज्ञ करने के बराबर माना गया है। कहा जाता है कि जो व्यक्ति इस दिन नियम-निष्ठा के साथ स्नान और दान करता है, उसे न केवल शारीरिक कष्टों से मुक्ति मिलती है, बल्कि उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी दिन कल्पवास की परंपरा का समापन भी होता है।

तिथि और शुभ मुहूर्त

  • पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 31 जनवरी 2026, रात से।
  • पूर्णिमा तिथि का समापन: 1 फरवरी 2026, शाम तक।
  • उदयातिथि के अनुसार: माघ पूर्णिमा का व्रत और स्नान 1 फरवरी 2026 (रविवार) को ही किया जाएगा।
  • स्नान का शुभ समय: ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 05:15 से 06:10 के बीच) सर्वोत्तम है।

माघ पूर्णिमा पूजा विधि

अगर आप घर पर पूजा कर रहे हैं या नदी तट पर जा रहे हैं, तो इस विधि का पालन करें।

  • ब्रह्म मुहूर्त स्नान: सुबह जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान करें। यदि संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
  • सूर्य अर्घ्य: स्नान के बाद तांबे के लोटे में जल, लाल फूल और अक्षत डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें।
  • विष्णु पूजा: भगवान सत्यनारायण या श्री हरि विष्णु की पूजा करें। उन्हें पीले फूल, फल, पंचामृत और तुलसी दल अर्पित करें।
  • मंत्र जाप: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नम: मंत्र का जाप करें।
  • आरती और दान: पूजा के आखिरी में आरती करें और फिर गरीबों या ब्राह्मणों को तिल, गुड़, कंबल, घी और अनाज का दान करें।

इस दिन क्या करें और क्या न करें?

  • क्या करें: चंद्रमा को दूध और जल का अर्घ्य दें , इससे मानसिक शांति मिलती है, पितरों के नाम पर तर्पण करें।
  • क्या न करें: इस दिन तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा) से दूर रहें और किसी का अपमान न करें।

दान का महत्व

माघ पूर्णिमा पर दान का फल अनंत गुना हो जाता है। इस दिन काले तिल का दान विशेष रूप से फलदायी माना गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ऐसा करने से शनि और राहु के दोषों से मुक्ति मिलती है।