पूर्णिमा के दिन 03 मार्च को लगेगा चंद्र ग्रहण
Chandra Grahan, (आज समाज), नई दिल्ली: इस साल फाल्गुन माह की पूर्णिमा के दिन 03 मार्च को चंद्र ग्रहण लगेगा। ये ग्रहण भारत में नजर आएगा। इस वजह से इसका सूतक काल भी मान्य होगा। खगोल विज्ञान में चंद्र ग्रहण की घटना बहुत विशेष मानी जाती है। खगोल विज्ञान के अनुसार, जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच में आ जाती है, तब चंद्र ग्रहण लगता है।
चंद्र ग्रहण की घटना धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण मानी गई है। धार्मिक दृष्टि से चंद्र ग्रहण की घटना का कारण राहु और केतु को बताया जाता है। इससे जुड़ी कथा स्कंद पुराण के अवंति खंड में वर्णित है। ऐसे में आइए जानते हैं कि चंद्रमा को राहु निगलने की कोशिश क्यों करता है?
स्कंद पुराण के अनुसार
स्कंद पुराण के अनुसार, देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया, जिससे कई किमती चीजें निकलीं। समुद्र मंथन से ही अमृत निकला। समुद्र मंथन के दौरान जब अमृत निकला तो उसे पीने को लेकर देवताओं और असुरों में विवाद हो गया। इस पर भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया और विवाद को सुलझाने पहुंचे। इसके बाद अमृत देवताओं को पिलाना शुरू कर दिया। भगवान विष्णु की इस चालाकी का पता स्वरभानु नाम के असुर को चल गया।
फिर वो देवताओं का रूप धारण कर देवताओं की कतार में बैठ गया और मोहिनी रूप में भगवान विष्णु के हाथ से अमृत पान कर लिया। यह बात सूर्य और चंद्रमा को पता चल गई। उन्होंने मोहिनी रूप धारण किए हुए विष्णु को इसके बारे में बता दिया। ये जानकर भगवान विष्णु को क्रोध आ गया।
इसलिए राहु करता है चंद्रमा को निगलने की कोशिश
उन्होंने अपने चक्र से स्वरभानु का सिर काट दिया, लेकिन स्वरभानु अमृत पान कर चुका था। इसलिए उसकी मृत्यु नहीं हुई। स्वरभानु के सिर को राहु कहा जाता है और धड़ को केतु। कथा के अनुसार, सूर्य और चंद्रमा के कारण स्वरभानु का भेद खुला था। इसलिए समय समय पर राहु यानी स्वरभानू का सिर सूर्य और चंद्रमा को निगलने की कोशिश करता है, इसलिए ग्रहण लगता है।


