9 अप्रैल को पड़ रही है वैशाख माह की कालाष्टमी
Kalashtami, (आज समाज), नई दिल्ली: हिंदू पंचांग के अनुसार, हर माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी का पर्व मनाया जाता है। साल 2026 में वैशाख माह की कालाष्टमी 9 अप्रैल को पड़ रही है। यह दिन भगवान काल भैरव को समर्पित होता है, जिन्हें शिव का उग्र और रक्षक रूप माना जाता है।
इस दिन खासतौर पर रात का समय बेहद रहस्यमयी और शक्तिशाली माना जाता है, जिसे लेकर लोगों के मन में कई तरह के सवाल उठते हैं कि क्या सच में इस रात तांत्रिक शक्तियां बढ़ जाती हैं या यह केवल एक आध्यात्मिक संयोग है? आइए विस्तार से जानते हैं।
कौन हैं काल भैरव?
शास्त्रों के अनुसार, काल भैरव को काशी का कोतवाल और तंत्र-मंत्र का अधिपति देव माना गया है। भगवान शिव के इस स्वरूप की उत्पत्ति असुरों का संहार करने और धर्म की रक्षा के लिए हुई थी। चूंकि भैरव जी को काल (समय और मृत्यु) पर विजय प्राप्त करने वाला देवता माना जाता है, इसलिए इनकी पूजा रात्रि काल में अधिक फलदायी मानी गई है।
क्यों खास होती है कालाष्टमी की रात?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कालाष्टमी की रात भगवान काल भैरव की उपासना का सर्वोत्तम समय होती है। भैरव को काल के स्वामी और नकारात्मक शक्तियों के नियंत्रक के रूप में पूजा जाता है। माना जाता है कि इस रात ब्रह्मांड की ऊजार्एं अधिक सक्रिय होती हैं, जिससे साधना और तंत्र-मंत्र का प्रभाव तेजी से बढ़ता है। यही वजह है कि साधक इस रात विशेष साधना करते हैं।
तांत्रिक शक्तियां बढ़ने की मान्यता का सच
यह धारणा पूरी तरह से आस्था और परंपराओं पर आधारित है। तंत्र शास्त्र के अनुसार, अमावस्या, कालाष्टमी और चतुर्दशी जैसी तिथियां ऐसी होती हैं, जब सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रकार की ऊजार्एं सक्रिय रहती हैं। इस दौरान तांत्रिक साधना करने वालों को जल्दी सिद्धि मिलने की संभावना अधिक मानी जाती है।
रहस्यमयी क्यों मानी जाती है यह रात?
मान्यता है कि कालाष्टमी की रात काल भैरव जागृत अवस्था में होते हैं और अपने भक्तों के कष्ट दूर करते हैं। वहीं इस रात को रहस्यमयी इसलिए भी कहा जाता है क्योंकि इस समय वातावरण शांत, ऊर्जा केंद्रित और ध्यान के लिए अनुकूल होता है। प्राचीन समय से ही साधु-संत और तांत्रिक इस रात को साधना के लिए उपयुक्त मानते आए हैं।
कालाष्टमी पर क्या करें?
इस दिन भैरव बाबा की पूजा, दीपदान, सरसों के तेल का दीपक जलाना और ओम काल भैरवाय नम: मंत्र का जाप करना बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे जीवन की परेशानियां कम होती हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
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