West Asia Crisis : हमें हर स्थिति के लिए तैयार रहना होगा : रक्षा मंत्री

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West Asia Crisis : हमें हर स्थिति के लिए तैयार रहना होगा : रक्षा मंत्री
West Asia Crisis : हमें हर स्थिति के लिए तैयार रहना होगा : रक्षा मंत्री

पश्चिम एशिया तनाव पर राजनाथ सिंह ने उच्चस्तरीय बैठक की प्रतिनिधित्ता की

West Asia Crisis (आज समाज), नई दिल्ली : अमेरिका और ईरान के बीच शांति के लिए बातचीत करते-करते फिर से तनाव उभर आया है। अमेरिका की समझौते पर हस्ताक्षर करने की ईरान को दी गई धमकी के बाद ईरान के तेवर भी सख्त हो गए हैं। एक तरफ जहां ईरान ने दोबारा से होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है। वहीं उसने किसी भी दबाव के सामने झुकने से साफ इंकार कर दिया है।

जिससे पश्चिम एशिया में दोबारा से तनाव बढ़ने की आंशका बन गई है। इसी बीच देश के रक्षाा मंत्री राजनाथ सिंह ने पश्चिम एशिया तनाव को मंत्रियों के अनौपचारिक समूह (आईजीओएम) की उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस दौरान रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत को पश्चिम एशिया के हालात को देखते हुए हर स्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए, क्योंकि क्षेत्र की मौजूदा स्थिति अस्थिर है।

भारत को इस तनाव के लिए तैयार रहना होगा

इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत को किसी भी अचानक बढ़ रहे तनाव के लिए तैयार रहना चाहिए। इस बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी, रसायन और उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा, उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी, विमानन मंत्री के. राममोहन नायडू, जहाजरानी मंत्री सबार्नंद सोनोवाल और बिजली मंत्री मनोहर लाल शामिल हुए। रक्षा मंत्रालय ने कहा, राजनाथ सिंह ने संघर्ष की स्थिति को ‘अनिश्चित और अस्थिर’ बताया और कहा कि भारत को न केवल तनाव कम होने बल्कि फिर से बढ़ने की स्थिति के लिए भी तैयार रहना चाहिए।

किसी भी समस्या के लिए हम तैयार

सोशल मीडिया पर रक्षा मंत्री ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार इस संघर्ष से पैदा होने वाले किसी भी खतरे या समस्या से निपटने के लिए तेजी और प्रभावी तरीके से काम कर रही है। इस दौरान रक्षा मंत्री ने’ भारत मैरिटाइम इंश्योरेंस पूल’ बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने का भी जिक्र किया, जिसके लिए 12,980 करोड़ रुपये की सरकारी गारंटी दी गई है, ताकि समुद्री बीमा लगातार उपलब्ध रहे। मंत्रालय के अनुसार, इस व्यवस्था से यह सुनिश्चित होगा कि भारतीय व्यापार को अंतरराष्ट्रीय मार्गों से आने-जाने वाले जहाजों के लिए सस्ता बीमा मिलता रहे, भले ही वे अस्थिर समुद्री क्षेत्रों से गुजरें।

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