
जल बंटवारे को सुलझाने की पेशकश की, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी को लिखा पत्र
Egypt & Ethiopia Water Dispute, (आज समाज), नई दिल्ली: नील नदी के पानी को लेकर मिस्र और इथियोपिया के बीच चल रहे विवाद में ट्रम्प ने मध्यस्थता का आॅफर दिया है। ट्रम्प ने यह बात मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी को लिखे एक पत्र में कही। यह पत्र ट्रम्प के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर भी पोस्ट किया गया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प ने पत्र में लिखा कि वह नील नदी के जल बंटवारे के सवाल को जिम्मेदारी से और स्थायी तौर पर सुलझाने के लिए अमेरिका की मध्यस्थता फिर से शुरू करने को तैयार हैं।
5 अरब डॉलर से बना डैम विवाद की वजह
मिस्र और इथियोपिया के बीच विवाद की बड़ी वजह इथियोपिया की ग्रैंड इथियोपियन रिनेसां डैम है। करीब 5 अरब डॉलर की लागत से यह बांध नील नदी की सहायक ब्लू नील नदी पर बनाया गया है। इथियोपिया ने 9 सितंबर को इस बांध का उद्घाटन किया था। इसके बाद से मिस्र में नाराजगी है।
अंतरराष्ट्रीय संधियों का उल्लंघन करता है बांध
इथियोपिया इस बांध को अपनी आर्थिक तरक्की के लिए बेहद अहम मानता है। इथियोपिया की आबादी 12 करोड़ से ज्यादा है और वह अफ्रीका का दूसरा सबसे अधिक आबादी वाला देश है। वहीं मिस्र का कहना है कि यह बांध अंतरराष्ट्रीय संधियों का उल्लंघन करता है। मिस्र को आशंका है कि इससे देश में सूखे और बाढ़ जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं। इथियोपिया इन आरोपों को खारिज करता रहा है।
मिस्र की जीवनरेखा है नील नदी
नील नदी मिस्र के लिए सिर्फ एक जलस्रोत नहीं, बल्कि देश की जीवनरेखा है। रेगिस्तानी इलाके वाले मिस्र में पीने का पानी, खेती, उद्योग और बिजली सब कुछ नील नदी पर टिका हुआ है। यही वजह है कि नील से जुड़ा कोई भी विवाद मिस्र के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बन जाता है। मिस्र की करीब 11 करोड़ आबादी की 90 से 95% पानी जरूरतें नील नदी से पूरी होती हैं। देश का लगभग 90% से ज्यादा इलाका रेगिस्तान है, जहां प्राकृतिक वर्षा बेहद कम होती है। ऐसे में नील नदी ही एकमात्र स्थायी जल स्रोत है, जो मिस्र को जीवन देता है।
जलसंकट का सामना कर रहा मिस्र
मिस्र पहले से ही जल संकट की स्थिति में है। 1959 के जल समझौते के तहत मिस्र को नील से हर साल 55.5 अरब क्यूबिक मीटर पानी मिलता है। यह मात्रा उस समय तय हुई थी, जब आबादी काफी कम थी। आज हालात यह हैं कि मिस्र में प्रति व्यक्ति सालाना जल उपलब्धता 600 क्यूबिक मीटर से भी नीचे आ चुकी है, जबकि संयुक्त राष्ट्र 1,000 क्यूबिक मीटर से कम को जल संकट की श्रेणी में रखता है।
ट्रम्प ने पहले कार्यकाल में मध्यस्थता कराई थी
अमेरिका ने 2019 के अंत से फरवरी 2020 की शुरूआत तक मिस्र और इथियोपिया के बीच नील नदी जल बंटवारे पर औपचारिक मध्यस्थता कराई थी। यह प्रक्रिया तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के कार्यकाल में शुरू हुई। बातचीत अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट और वर्ल्ड बैंक की मौजूदगी में वॉशिंगटन में हुई। मिस्र को आशंका थी इथियोपिया की जीईआरडी परियोजना से नील नदी का प्रवाह घटेगा। इससे पानी की कमी, कृषि पर असर, सूखे और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।
इथियोपिया ने हस्ताक्षर करने से कर दिया था इनकार
फरवरी 2020 में अमेरिका ने एक ड्राफ्ट एग्रीमेंट तैयार कराया। मिस्र ने इस मसौदे पर सहमति जता दी, लेकिन इथियोपिया ने हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया। इसके बाद अमेरिका की मध्यस्थता प्रक्रिया ठप हो गई। 2020 में ट्रम्प ने सार्वजनिक तौर पर मिस्र के पक्ष में बयान दिए थे। इसी के चलते इथियोपिया ने अमेरिका की निष्पक्षता पर सवाल उठाए थे।
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