बनेंगे ग्रहों के दुर्लभ संयोग, रात में इस समय जरूर करें साधना
Mahashivratri, (आज समाज), नई दिल्ली: हर साल फाल्गुन माह की चतुर्दशी तिथि के दिन महाशिवरात्रि का पावन त्योहार मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यही वो दिन था जब भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। शिव-शक्ति के मिलन की याद में ये पावन त्योहार मनाया जाता है। इस पवित्र दिन भक्त भोलेनाथ का व्रत करते हैं। उनकी विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।
मान्यता है कि महाशिवरात्रि के दिन भोलेनाथ और माता पार्वती धरती लोक पर भ्रमण करने आते हैं। इस दौरान वो अपने भक्तों को विशेष आशीर्वाद देते हैं, जिससे जीवन खुशहाल होता है। इस साल ये पर्व 15 फरवरी को मनाया जाना वाला है। इस बार की महाशिवरात्रि बड़ी विशेष है। इस दिन और रात में ग्रहों के कुछ दुर्लभ संयोग बनेंगे। ऐसे में इस दिन रात की साधना बड़ी लाभदायक होगी।
महाशिवरात्रि पर चार पहर की पूजा
महाशिवरात्रि के दिन रात के चारों पहरों में भोलेनाथ की पूजा का विधान है। यही कारण है कि इस दिन रात में जागने और साधना करने के लिए कहा जाता है। ज्योतिष गणना और पुंडरीक महाराज के अनुसार, इस दिन ग्रह मिलकर कई शुभ और दुर्लभ योग एक साथ बना रहे हैं। दरअसल, इस दिन सूर्य, बुध और शुक्र एक साथ विशेष स्थिति में रहेंगे, जिससे त्रिग्रही योग बनेगा। श्रवण नक्षत्र का संयोग भी रहेगा।
पूरी रात साधना करें साधना
इसके अलावा, इस दिन व्यतिपात योग, वरियान योग, ध्रुव योग और राजयोग जैसे कई शुभ योग इस पर्व को खास बना रहे हैं। ऐसा 300 सालों के बाद हो रहा है कि महाशिवरात्रि पर ये सभी शुभ योग एक साथ बन रहे हैं। इस बार महाशिवरात्रि की रात उर्जा का स्रोत ऊर्ध्वगमनशील रहने वाला है। ऐसे में हो सके तो महाशिवरात्रि पर पूरी रात साधना और शिव भक्त करें।
महाशिवरात्रि पर रात का ये मुहूर्त होगा सबसे शुभ
अगर पूरी रात साधना नहीं कर सकते तो रात में एक मुहूर्त जोकि 45 मिनट का होता है, इसमें साधना अवश्य करें। महाशिवरात्रि की रात 12 बजकर 09 मिनट से 01 बजे के बीच तो भूलकर भी न सोएं। इस मुहूर्त में ग्रहों का सबसे शुभ संयोग होगा। इस समय में पूजा और साधना से विशेष लाभ होगा।


